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क्या अकेलापन बढ़ा रहा है डिमेंशिया का खतरा? जानें डॉक्टर से

अकेलेपन के कारण लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर जिसके कारण स्ट्रेस होने जैसी समस्याएं होती हैं, साथ ही इसके कारण डिमेंशिया का खतरा भी बढ़ सकता है।
क्या अकेलापन बढ़ा रहा है डिमेंशिया का खतरा? जानें डॉक्टर सेक्या अकेलापन बढ़ा रहा है डिमेंशिया का खतरा? जानें डॉक्टर से

अकेले रहने के कारण लोगों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। इसके कारण लोगों को स्ट्रेस, एंग्जायटी, डिप्रेशन और याददाश्त में कमी होने जैसी कई मानिसक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन क्या वाकई में इसके कारण डिमेंशिया जैसी बीमारी का खतरा बढ़ता है? आइए इस बारे में Neha Sinha, Dementia Specialist and Clinical Psychologist, CEO and Co - founder, Epoch Elder Care से जानें।

क्या अकेलापन के कारण डिमेंशिया का खतरा हो सकता है?

डिमेंशिया स्पेशलिस्ट नेहा सिन्हा के अनुसार, "डिमेंशिया भले ही एक आनुवंशिक (जेनेटिक) बीमारी हो, लेकिन हमारी रोज की लाइफस्टाइल भी इसके लक्षणों को बढ़ावा दे सकती है। लाइफ की छोटी-छोटी आदतें स्वास्थ्य को कई तरह से प्रभावित कर सकती हैं। अकेलापन उन्हीं में से एक है। डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी के शुरुआती लक्षणों को पहचानना अक्सर मुश्किल हो सकता है और लोग इन्हें समझ नहीं पाते हैं, खासकर जो लोग अकेले रहते हैं या दूसरे से कटे-कटे रहते हैं, उनमें यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती रहती है। ऐसे लोगों में इस बीमारी का पता तब तक नहीं चल पाता है, जब तक कि यह इतनी गंभीर न हो जाए और इसके कारण रोज को काम प्रभावित होने लगे।"

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नेहा सिन्हा के अनुसार, "कई स्टडीज में पता चलता है कि लंबे समय तक रहने वाला अकेलापन डिमेंशिया के खतरे को लगभग 30% से 60% तक बढ़ा देता है और यह रिजल्ट तब भी नहीं बदलता, जब व्यक्ति का बाकी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य ठीक हो।"

2025 में Nature Mental Health Journal में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, अकेलापन महसूस करने से डिमेंशिया का खतरा 31% तक बढ़ जाता है।

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अकेलापन कैसे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है?

नेहा सिन्हा के अनुसार, अकेलेपन का असर सिर्फ मन पर नहीं, बल्कि पूरे शरीर पर पड़ता है। इसकी वजह से शरीर में स्ट्रेस बढ़ने वाले कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है और नींद प्रभावित होने लगती है। ये सब मिलकर किसी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकते हैं। ये परेशानियां कभी नजर नहीं आती हैं और ये धीरे-धीरे व्यक्ति की याद रखने की क्षमता को कम करने लगती है।

नोएडा के मेट्रो हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन के कंसल्टेंट डॉ. अक्षय चुघ के अनुसार, अकेलेपन का असर व्यक्ति के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इसके कारण व्यक्ति के स्ट्रेस में रहने, नींद न आने, शरीर में हार्मोन्स के असंतुलित होने की समस्या बढ़ती है, याददाश्त कमजोर होने लगती है और ब्रेन पर भी बुरा असर हो सकता है। 

निष्कर्ष

लाइफस्टाइल की छोटी-छोटी आदतों के कारण व्यक्ति को डिमेंशिया की बीमारी का खतरा हो सकता है, खासकर अकेलेपन के कारण। डिमेंशिया के शुरुआती लक्षणों की लोग ठीक से पहचान नहीं कर पाते हैं, जिसके कारण इस बीमारी का पता व्यक्ति को तब चलता है, जब यह आपके रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करने लगती है। ध्यान रहे, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी परेशानी महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

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FAQ

  • डिमेंशिया के क्या लक्षण है?

    डिमेंशिया की बीमारी होने के कारण व्यक्ति की याददाश्त के कमजोर होने, सोचने-समझने में परेशानी होने, भ्रम होने, नियमित एक्टिविटीज की क्षमता के धीरे-धीरे कम होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। 

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Priyanka Sharma

Health & Lifestyle Journalist

प्रियंका शर्मा पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 2 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर हैं। वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, प्रेगनेंसी, स्किनकेयर, हेयरकेयर, आयुर्वेद, योग और हार्ट हेल्थ जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखती हैं और जटिल स्वास्थ्य जानकारी को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञों की राय और भरोसेमंद मेडिकल स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह Grehlakshmi (महिला केंद्रित हिंदी पत्रिका) और Noida Khabar के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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