रिटायरमेंट के बाद लोगों का रूटीन बदल जाता है और जीवन में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं। बढ़ती उम्र के इस पड़ाव पर बच्चे भी अपने जीवन में व्यस्त हो जाते हैं और पुराने दोस्तों से भी रोज मिलना मुश्किल हो जाता है। उम्र बढ़ने के साथ चलने-फिरने में परेशानी के कारण घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। इस स्थिति में बुजुर्ग खुद को अकेलेपन में पाते हैं। लंबे समय तक अकेलेपन में रहने के कारण बुजुर्गों को मेंटल हेल्थ से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। इस बारे में Greater Noida के शारदा हॉस्पिटल के Psychiatrist Dr. Abhinit Kumar का कहना है कि बुजुर्गों में अकेलापन और मेंटल हेल्थ के बीच आपस में गहरा कनेक्शन है। अकेलेपन से कई मानसिक बीमारियां होने का रिस्क बढ़ जाता है।
बुजुर्गों में अकेलेपन की समस्या इतनी गंभीर क्यों बनती जा रही है?
Humanities and Social Sciences Communications ने साल 2025 में एक स्टडी की गई। यह एक सिस्टेमेटिक रिव्यू था, जिसमें बुजुर्गों में अकेलेपन को लेकर रिसर्च की गई। इस रिव्यू में 126 स्टडीज और कुल 12,50,322 बुजुर्गों को शामिल किया गया। इसमें पाया गया कि 27.6% बुजुर्ग अकेलापन महसूस कर रहे थे। इसमें बताया गया कि अकेलेपन के कारण बुजुर्गों को हेल्थ से जुड़ी समस्याएं जैसे डिप्रेशन और आत्महत्या जैसे ख्याल आने लगते हैं।
अकेलेपन के कारण बुजुर्गों में होने वाली 5 मेंटल हेल्थ समस्याएं
Dr. Abhinit Kumar ने बताया कि बुजुर्गों को अकेलेपन के कारण कई तरह की मेंटल हेल्थ की समस्याएं हो सकती हैं और उन्हें इस बारे में पता ही नहीं चलता कि वे मानसिक बीमारियों से गुजर रहे हैं।
1. डिप्रेशन और लगातार उदासी
Dr. Abhinit Kumar ने कहा, "अकेलेपन का सबसे सीधा असर मूड पर दिखाई दे सकता है। जब किसी बुजुर्ग के पास अपनी बात साझा करने वाला कोई करीबी व्यक्ति नहीं होता या परिवार और दोस्तों से बातचीत बहुत कम हो जाती है, तो उन्हें लगातार उदासी महसूस हो सकती है। फिर धीरे-धीरे उनके कामों में भी रुचि कम हो सकती है, जो पहले पसंद आते थे। लोगों से मिलने का मन न करना, हर समय निराश महसूस करना या खुद को दूसरों से अलग कर लेना भी दिखाई दे सकता है। अगर लंबे समय तक उदासी बनी रहती है, तो डिप्रेशन के लक्षण महसूस हो सकते हैं।"
2. एंग्जायटी होना
Dr. Abhinit Kumar कहते हैं, "जब बुजुर्ग अकेले रहने लगते हैं, तो छोटी-छोटी चिंताएं भी बड़ी लगने लग सकती हैं। बुजुर्ग अपनी सेहत को लेकर बहुत चिंता में भी रहते हैं। मेरे पास कई ऐसे बुजुर्ग भी आते हैं, जिन्हें इस बात का डर बना रहता है कि अगर रात में तबीयत खराब हो गई या कोई जरूरत पड़ गई, तो मदद कौन करेगा। ऐसी चिंता लगातार बेचैनी बढ़ा सकती है और इससे धीरे-धीरे एंग्जायटी बढ़ने लगती है।
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3. नींद पूरी न होना
Dr. Abhinit Kumar ने बताया कि अकेलेपन के कारण डिप्रेशन और एंग्जायटी होने के कारण नींद पर भी असर पड़ सकता है। दिनभर किसी से बात न होने पर कई बुजुर्ग रात में अपने विचारों में ज्यादा उलझे रह सकते हैं। इस वजह से उन्हें सोने में समय लगना, बार-बार नींद खुलना या सुबह उठने के बाद भी थकान महसूस होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर रोज ऐसा ही हो रहा है, तो इसे बढ़ती उम्र की समस्या मानकर नजरअंदाज न करें, बल्कि एक्सपर्ट को जरूर दिखाएं।
4. याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता पर असर
Dr. Abhinit Kumar ने कहा, “लंबे समय तक लोगों से बातचीत न करने से इसका असर उनकी कोग्नेटिव हेल्थ पर भी पड़ता है। जब बुजुर्ग बातचीत करता है, अपनी बात रखता है, दूसरों की बातें सुनता है और अलग-अलग गतिविधियों में हिस्सा लेता है, तो दिमाग लगातार एक्टिव रहता है। इसके उलट, लंबे समय तक अकेलेपन के कारण उसे चीजें याद रखने में परेशानी होने लगती है और उसकी सोचने-समझने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, भूलने की आदत को सीधे तौर पर डिमेंशिया से नहीं जोड़ा जा सकता है।”
5. खुद की अहमियत कम महसूस होना
Dr. Abhinit Kumar कहते हैं, “मेरे पास कई ऐसे बुजुर्ग आते हैं, जिन्हें महसूस होता है कि अब उनकी किसी को जरूरत नहीं है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि वे लंबे समय से अकेले रह रहे थे और उनके पास बात करने के लिए कोई करीबी नहीं था। इससे उनके आत्मविश्वास की कमी आने लगती है।”
परिवार बुजुर्गों को अकेलेपन और डिप्रेशन से कैसे बाहर निकाल सकते हैं?
National Institue of Aging के मुताबिक, परिवार को बुजुर्गों की समस्याओं को समझना चाहिए और उनके डिप्रेशन के लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए। अगर वे किसी से बात नहीं कर रहे हैं या अकेले बैठे हैं, तो उनके साथ कुछ समय बिताना चाहिए।
- परिवार के लोग रोज कुछ समय बुजुर्गों से बात करें।
- उनकी पसंद और पुराने अनुभवों की बात करें।
- दोस्तों और रिश्तेदारों से कनेक्ट करने के लिए फोन या वीडियो कॉल करें।
- वॉकिंग ग्रुप या कम्यूनिटी एक्टिविटीज में उन्हें जाने के लिए प्रोत्साहित करें।
- घर में पालतू जानवर उनके अकेलेपन को कम कर सकते हैं।
- अगर सुनने में परेशानी है, तो हियरिंग एड लगवानी चाहिए।
- अगर ज्यादा परेशानी महसूस हो, तो एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए।
निष्कर्ष
आमतौर पर अकेलापन बुजुर्गों की मेंटल हेल्थ पर असर डाल सकता है। इसलिए घर के बुजुर्गों के साथ बातचीत और एक्टिविटीज करने से उनका दिमाग व्यस्त रहता है। इससे उम्र बढ़ने के साथ होने वाली परेशानियों से भी बचा जा सकता है। एक्टिव दिमाग और शरीर कई तरह की बीमारियों के रिस्क को कम कर सकता है।
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FAQ
क्या डिजिटल तकनीक और स्मार्टफोन बुजुर्गों का अकेलापन दूर करने में मदद कर सकते हैं?
यह तरीका मदद कर सकता है। उन्हें सरल तरीके से वीडियो कॉल, ऑडियो बुक्स, भक्ति संगीत या व्हाट्सएप इस्तेमाल करना सिखाने से वे दूर रहने वाले रिश्तेदारों और दोस्तों से जुड़े रहते हैं, जिससे अलगाव की भावना कम होती है।क्या बुजुर्गों में अकेलापन अचानक स्वभाव में अत्यधिक चिड़चिड़ापन और गुस्से का कारण बन सकता है?
कई बार बुजुर्ग अपनी भावनात्मक परेशानी, डर या असहायता को सीधे व्यक्त नहीं कर पाते। यह छिपा हुआ तनाव चिड़चिड़ापन, जिद्दीपन या छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा होने के रूप में बाहर आता है।
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Sep 29, 2026 19:55 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr. Abhinit Kumar
