Fri Sep 11, 2026 | 06:02 PM IST

Medically Reviewed by Dr Bala Raja Sekhar Chandra , Sr. Consultant - Neuro & Spine Surgeon

बार-बार चीजें भूलना कब है चिंता की बात? डाॅक्‍टर से जानें किन संकेतों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज

कभी-कभी चीजें भूल जाना सामान्य बात है, लेकिन अगर बार-बार भूलने की समस्या रिश्तों, रोज के काम या सुरक्षा पर असर डालने लगे, तो यह चिंता का विषय हो सकता है।

कभी-कभी चीजों को भूलना इतनी च‍िंता की बात नहीं है। हम सब कभी न कभी क‍िसी चीज को भूल जाते हैं। समय बीतने के साथ कुछ बातें या घटनाएं भूल जाना भी सामान्य है। किसी नई जानकारी को सीखने के कुछ समय बाद उसे भूलने की संभावना ज्यादा होती है, लेकिन जिन यादों को हम बार-बार याद करते या इस्तेमाल करते हैं, उनके भूलने की संभावना कम होती है। जब हम किसी चीज पर ठीक से ध्यान नहीं देते हैं, तो भी उसे भूल सकते हैं। उम्र बढ़ने के साथ भूलने की आदत कुछ हद तक बढ़ सकती है, लेक‍िन कम उम्र में ही जब सामान्‍य चीजें याद न रहें और जरूरी बातें भी आपको सोचने पर याद न आएं, तो यह च‍िंता का व‍िषय हो सकता है। आइए जानते हैं बार-बार चीजें भूलना कब गंभीर हो सकता है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Bala Raja Sekhar Chandra Yetukuri, Sr. Consultant Neuro & Spine Surgeon And Clinical Director- Advance Endoscopic Spine Surgery At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।

Harvard Medical School में प्रकाश‍ित एक लेख के मुताब‍िक, कभी-कभी किसी सवाल का जवाब हमें पता होता है, लेकिन उस समय याद नहीं आता। ऐसा लगता है कि जवाब जुबान पर है, लेकिन हम उसे बोल नहीं पाते। इसे ब्लॉकिंग (Blocking) कहा जाता है। कई बार इसके पीछे कोई दूसरी मिलती-जुलती याद होती है, जो सही जवाब को याद करने में रुकावट डालती है।

बार-बार चीजें भूलना कब चिंता की बात है?

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इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए-

  • एक ही सवाल बार-बार पूछना।
  • हाल ही में हुई बातचीत या तय तारीख को भूल जाना, खासकर याद दिलाने के बावजूद भी।
  • ऐसी जगहों का भी रास्ता भूल जाना जहां पहले कई बार जा चुके हैं।
  • रोजमर्रा के काम जैसे खाना बनाना, बिल भरना या दवा लेना मुश्किल लगना।

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इंफेक्‍शन और स्‍ट्रोक बन सकते हैं कारण

अगर भ्रम या याददाश्त की समस्या अचानक शुरू हो, खासकर इसके साथ शरीर में कमजोरी, बोलने में लड़खड़ाहट, तेज सिरदर्द, नजर में बदलाव, बुखार या सिर पर चोट लगी हो, तो तुरंत डॉक्‍टर की मदद लें। ये किसी इंफेक्‍शन, स्ट्रोक या अन्‍य गंभीर आपात स्थिति के संकेत भी हो सकते हैं।

भूलने से संबंध‍ित इन समस्‍याएं का इलाज संभव है

भूलने की समस्या के कई ऐसे कारण भी हो सकते हैं जिनका इलाज संभव है। इनमें नींद की कमी, तनाव, डिप्रेशन, थायराइड, विटामिन B12 की कमी शामिल हैं। डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री, जांच और जरूरी टेस्ट के जरिए समस्या के कारण का पता लगा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर न्यूरोलॉजिस्ट या मेमोरी स्पेशलिस्ट से म‍िलने की सलाह दी जा सकती है।

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हमेशा डिमेंशिया या अल्जाइमर रोग कारण नहीं होते

लगातार बढ़ती याददाश्त की समस्या डिमेंशिया या अल्जाइमर रोग जैसी न्यूरोलॉजिकल स्थितियों से संबंध‍ित हो सकती है। ऐसे मामलों में व्यक्ति केवल छोटी-छोटी बातें ही नहीं भूलता, बल्कि रोजमर्रा के काम करने में भी परेशानी महसूस कर सकता है। ध्यान रखें कि हर भूलने की समस्या अल्जाइमर या डिमेंशिया नहीं होती। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से जांच कराएं।

याददाश्त को बेहतर बनाने के ल‍िए क्‍या करें?

  • याददाश्त को बेहतर बनाने के ल‍िए फ‍िज‍िकल एक्‍ट‍िव‍िटी अपनाएं। यह द‍िमाग के ल‍िए फायदेमंद होती है जैसे पैदल चलना, योग या दूसरी शारीरिक गतिविधियां।
  • फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, नट्स और बीज डाइट में शामिल करें। साथ ही, ड‍िहाइड्रेशन से बचें। पर्याप्‍त मात्रा में पानी का सेवन करें।
  • दाल, अंडे, दूध-दही, पनीर, मछली आदि जैसे प्रोटीन स्रोत लें।
  • एकाग्रता बढ़ाने के ल‍िए मेड‍िटेशन करें और नींद पूरी करें।
  • क्रॉसवर्ड, सुडोकू या पजल जैसी एक्‍ट‍िव‍िटीज के जर‍िए द‍िमाग की क्षमता को मजबूत बनाएं।
  • जानकारी को जोड़कर याद करें। किसी नई जानकारी को पहले से मालूम चीजों से जोड़कर याद करना आसान हो सकता है।
  • मल्‍टीटास्‍क‍िंग से बचें। एक समय में दो काम करने का प्रयास न करें, इससे द‍िमाग कंफ्यूज होता है और तनाव बढ़ सकता है।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

अगर भूलने की समस्या समय के साथ बढ़ रही है, परिवार के लोगों को भी इसमें बदलाव नजर आ रहा है या इसके साथ सही शब्द याद करने में परेशानी, गलत फैसले लेना, व्यक्तित्व या मूड में बदलाव और लोगों से दूरी बनाना जैसे लक्षण दिख रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

न‍िष्‍कर्ष:

कभी-कभी चीजें भूलना सामान्‍य है, लेक‍िन अगर हाल ही में हुई बात, तारीख, खास बातें, ऐसे रास्‍ते जहां बार-बार जाते हैं याद न रहे, तो यह च‍िंता का व‍िषय हो सकता है। चीजें भूलने के पीछे हमेशा डिमेंशिया या अल्जाइमर रोग कारण नहीं होता। इसके पीछे इंफेक्‍शन या स्‍ट्रोक जैसे कारण हो सकते हैं। इसके अलावा नींद की कमी, तनाव, ड‍िप्रेशन, थायराइड, व‍िटाम‍िन बी12 की कमी जैसे कारण भी हो सकते हैं। अगर भूलने की समस्या समय के साथ बढ़ने लगे, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें। साथ ही, मूड में बदलाव या फैसले लेने में परेशानी हो, तो भी इसे गंभीरता से लें और इलाज कराएं।

image credit: magnific

FAQ

  • क्‍या माइंड गेम्‍स और पहेली खेलने से याददाश्त बेहतर होती है?

    पहेलियां, पढ़ना और नई चीजें सीखने से द‍िमाग को एक्‍ट‍िव रखने में मदद म‍िलती है। इसके साथ पर्याप्त नींद, एक्‍सरसाइज और संतुलित आहार भी जरूरी हैं।
  • क्‍या शरीर में पानी की कमी से याददाश्त कमजोर हो सकती है?

    शरीर में पानी की कमी से थकान, स‍िरदर्द और ध्‍यान लगाने में परेशानी हो सकती है। इससे व्‍यक्‍त‍ि को चीजें याद रखने में भी द‍िक्‍कत हो सकती है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 10, 2026 15:43 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Bala Raja Sekhar Chandra

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