क्या आपने कभी गौर किया है कि दिन भर का काम खत्म होने के बाद भी दिमाग रुकता नहीं? बिस्तर पर लेटने के बाद पुरानी बातें, भविष्य की चिंताएं और अगर ऐसा हो गया तो? जैसे सवाल बार-बार दिमाग में घूमते रहते हैं। यही आदत जब कंट्रोल से बाहर हो जाती है, तो इसे ओवरथिंकिंग कहा जाता है। आज के समय में यह समस्या केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं रही, बल्कि हर उम्र और हर वर्ग के लोगों को प्रभावित कर रही है। काम का दबाव, रिश्तों की उलझनें, सोशल मीडिया पर परफेक्ट दिखने की होड़ और भविष्य को लेकर अनिश्चितता, ये सभी कारण दिमाग को लगातार सोचने पर मजबूर कर देते हैं। शुरुआत में यह केवल चिंता जैसी लगती है, लेकिन धीरे-धीरे यही सोच इंसान की मानसिक शांति छीन लेती है। कई बार व्यक्ति खुद भी यह समझ नहीं पाता कि वह सामान्य चिंता और गंभीर मानसिक समस्या के बीच की सीमा कब पार कर चुका है। इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हमने, एस्टर सीएमआई हॉस्पिटल, बेंगलुरु की कंसल्टेंट- साइकियाट्री, डॉ. दिव्या श्री केआर (Dr Divya Shree KR, Consultant – Psychiatry, Aster CMI Hospital, Bangalore) से बात की-
क्या ज्यादा सोचने की आदत डिप्रेशन की शुरुआत हो सकती है? - Can Overthinking Lead To Depression
डॉ. दिव्या श्री केआर के अनुसार, ओवरथिंकिंग और डिप्रेशन के बीच गहरा संबंध है। लगातार नकारात्मक सोच व्यक्ति के आत्मविश्वास को कमजोर करती है और उसे खुद को दोषी मानने की आदत डाल देती है। जब इंसान हर स्थिति में बुरा ही सोचने लगता है, तो धीरे-धीरे उसका दिमाग पॉजिटिव भावनाओं को स्वीकार करना बंद कर देता है। यही स्थिति आगे चलकर डिप्रेशन का रूप ले सकती है, जिसमें व्यक्ति उदासी, निराशा और खालीपन महसूस करने लगता है।
इसे भी पढ़ें: Overthink पर हर दिन इतने घंटे बर्बाद कर देते हैं 81% भारतीय, एक्सपर्ट से जानें कैसे बंद करें ये फर्जी टाइम वेस्ट
- डॉ. दिव्या श्री केआर बताती हैं कि ओवरथिंकिंग दिमाग में स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल को बढ़ा देती है।
- लंबे समय तक कोर्टिसोल का लेवल बढ़ा रहने से नींद, भूख और मूड तीनों प्रभावित होते हैं।
- व्यक्ति को नींद न आना, थकान, चिड़चिड़ापन और किसी भी काम में मन न लगना जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
- यही लक्षण डिप्रेशन के शुरुआती संकेत माने जाते हैं, जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।
ओवरथिंकिंग से जुड़े डिप्रेशन के लक्षण
डॉ. दिव्या श्री केआर के अनुसार, अगर ओवरथिंकिंग के साथ-साथ व्यक्ति को लगातार उदासी, अकेलापन, बेवजह रोना, खुद को बेकार समझना, भविष्य को लेकर डर और आत्मग्लानि महसूस हो रही है, तो यह डिप्रेशन का संकेत हो सकता है। कई मामलों में व्यक्ति सामाजिक एक्टिविटी से दूरी बनाने लगता है और उसे पहले पसंद आने वाली चीजों में भी रुचि नहीं रहती। यह स्थिति मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है।
इसे भी पढ़ें: ओवरथिंकिंग की समस्या कम करेगी ये निष्पन्द भव क्रिया, जानें करने का तरीका और फायदे

ओवरथिंकिंग से कैसे बचा जा सकता है? - How to overcome overthinking
डॉ. दिव्या श्री केआर के अनुसार, ओवरथिंकिंग से बाहर निकलने के लिए सबसे पहले इसे पहचानना जरूरी है। माइंडफुलनेस, मेडिटेशन, योग और डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज दिमाग को शांत करने में मदद करती हैं। इसके अलावा अपनी फीलिंग्स को किसी भरोसेमंद व्यक्ति से शेयर करना और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग लेना भी बेहद फायदेमंद होता है। डॉ. दिव्या श्री केआर यह भी सलाह देती हैं कि डिजिटल डिटॉक्स और पर्याप्त नींद मानसिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
निष्कर्ष
ओवरथिंकिंग को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है, क्योंकि यह धीरे-धीरे डिप्रेशन जैसी गंभीर मानसिक समस्या की ओर ले जा सकती है। डॉ. दिव्या श्री केआर के अनुसार, समय रहते अपनी सोच के पैटर्न को समझना और उसे सकारात्मक दिशा में मोड़ना बेहद जरूरी है। अगर नकारात्मक विचार लगातार परेशान कर रहे हैं, तो प्रोफेशनल मदद लेने में हिचकिचाएं नहीं।
All Images Credit- Freepik
FAQ
डिप्रेशन क्या होता है?
डिप्रेशन एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें व्यक्ति लंबे समय तक उदासी, निराशा और खालीपन महसूस करता है।क्या डिप्रेशन केवल मानसिक समस्या है?
डिप्रेशन का असर शरीर पर भी पड़ता है। इससे सिरदर्द, थकान, पाचन समस्याएं, नींद की दिक्कत और इम्यूनिटी कमजोर होने जैसी शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं।क्या डिप्रेशन अपने आप ठीक हो सकता है?
कुछ मामलों में हल्का डिप्रेशन लाइफस्टाइल में सुधार से बेहतर हो सकता है, लेकिन गंभीर या लंबे समय तक रहने वाला डिप्रेशन बिना इलाज के ठीक नहीं होता। समय पर इलाज जरूरी है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jan 06, 2026 18:01 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Jan 06, 2026 18:01 IST
Modified By : Akanksha TiwariJan 06, 2026 18:01 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Divya Shree K R