Fri Sep 11, 2026 | 09:15 PM IST

Medically Reviewed by Dr. Pooja Pillai , Internal Medicine

पैर की नस दबने के क्या कारण होते हैं? डॉक्टर से जानें

आजकल कई लोग पैर में झनझनाहट, सुन्नपन, जलन या तेज दर्द की शिकायत करते हैं, कुछ मामलों में यह दर्द कमर से शुरू होकर पैर तक जाता है, तो कभी सिर्फ जांघ, पिंडली या पंजे तक सीमित रहता है। यहां जानिए, पैर की नस दबने के क्या कारण होते हैं?

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करना, मोबाइल या लैपटॉप पर झुककर रहना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी आम हो गई है। इसका सीधा असर हमारी रीढ़ और नसों पर पड़ता है। जब कमर या पैर की नसों पर लगातार दबाव बना रहता है, तो दिमाग और मांसपेशियों के बीच सिग्नल सही तरीके से नहीं पहुंच पाते। नतीजा दर्द, सुन्नपन और कमजोरी, कई बार यह दर्द कमर से शुरू होकर पैर तक फैलता है। दिलचस्प बात यह है कि पैर की नस दबने की समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। आजकल युवा, ऑफिस में काम करने वाले लोग और यहां तक कि खिलाड़ी भी इसका शिकार हो रहे हैं। कई बार लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं, इसलिए लोग समय पर डॉक्टर तक नहीं पहुंच पाते। इस लेख में एस्टर सीएमआई हॉस्पिटल, बैंगलोर की कंसल्टेंट - इंटरनल मेडिसिन, डॉ. पूजा पिल्लई (Dr. Pooja Pillai, Consultant - Internal Medicine, Aster CMI Hospital, Bangalore) से जानिए, पैर की नस दबने के क्या कारण होते हैं?

पैर की नस दबने के क्या कारण होते हैं? - What causes a compressed nerve in the leg

इंटरनल मेडिसिन, डॉ. पूजा पिल्लई के अनुसार, ''जब पैर की नस पर लगातार दबाव बना रहता है, तो दर्द, झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। यह दबाव रीढ़ की हड्डी से लेकर मांसपेशियों तक कहीं भी हो सकता है।''

1. स्लिप डिस्क या हर्नियेटेड डिस्क - Slipped or Herniated Disc

पैर में नर्व दबने की सबसे आम वजह स्लिप डिस्क मानी जाती है। जब कमर की रीढ़ की हड्डी के बीच मौजूद डिस्क अपनी जगह से खिसक जाती है, तो वह आसपास की नसों को दबाने लगती है। इससे दर्द कमर से शुरू होकर पैर तक फैल सकता है, जिसे आमतौर पर साइटिका कहा जाता है।

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2. स्पाइनल स्टेनोसिस और बोन स्पर की भूमिका - Spinal Stenosis

उम्र बढ़ने के साथ कई लोगों में रीढ़ की नलिका सिकुड़ने लगती है, जिसे स्पाइनल स्टेनोसिस कहा जाता है। इसके अलावा हड्डियों पर अतिरिक्त बढ़ोतरी यानी बोन स्पर भी बन सकते हैं। ये दोनों स्थितियां नसों के लिए जगह कम कर देती हैं, जिससे पैर की नसों पर दबाव पड़ता है और चलने में दर्द या सुन्नपन महसूस होने लगता है।

3. चोट या एक्सीडेंट के बाद बढ़ सकता है खतरा

गिरने, सड़क दुर्घटना या किसी खेल के दौरान लगी चोट के बाद शरीर में सूजन या अंदरूनी चोट हो सकती है। यह सूजन आसपास की नसों को दबा सकती है। कई बार चोट ठीक होने के बाद भी नस पर बना दबाव लंबे समय तक बना रहता है, जिससे पैर में लगातार दर्द या कमजोरी महसूस होती है।

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4. टाइट मसल्स

सिर्फ हड्डियां ही नहीं, बल्कि टाइट मसल्स भी नसों को दबा सकती हैं। खासतौर पर हिप, जांघ और नितंब (buttocks) की मांसपेशियां अगर ज्यादा सख्त हो जाएं, तो वे नसों को फंसा लेती हैं। इसे पिरिफॉर्मिस सिंड्रोम जैसी स्थितियों में देखा जाता है, जहां दर्द पैर तक फैलता है।

5. गलत पोश्चर और लंबे समय तक बैठना

ऑफिस में घंटों गलत तरीके से बैठना, झुककर काम करना या लंबे समय तक बिना ब्रेक लिए बैठना भी पैर की नसों को नुकसान पहुंचा सकता है। गलत पोश्चर से रीढ़ पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जो धीरे-धीरे नसों को कंप्रेस कर देता है।

निष्कर्ष

पैर में नर्व दबने की समस्या सिर्फ उम्र या थकान की वजह से नहीं होती, बल्कि इसके पीछे रीढ़ की हड्डी, मांसपेशियां, चोट और लाइफस्टाइल जैसे कई कारण हो सकते हैं। समय रहते सही जांच और इलाज न मिलने पर यह समस्या लंबे समय तक परेशान कर सकती है। इसलिए शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

All Images Credit- Freepik

FAQ

  • पैर में नस दबने के आम लक्षण क्या होते हैं?

    पैर में झनझनाहट, सुन्नपन, जलन, तेज दर्द, कमजोरी या चलने में संतुलन बिगड़ना इसके आम लक्षण हैं।
  • क्या कमर की समस्या से पैर में दर्द हो सकता है?

    स्लिप डिस्क या साइटिका जैसी कमर की समस्याएं पैर की नसों को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे दर्द पैर तक फैलता है।
  • लंबे समय तक बैठने से पैर की नस दब सकती है क्या?

    गलत पोश्चर में लंबे समय तक बैठने से रीढ़ और मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जो नसों को कंप्रेस कर सकता है।

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Akanksha Tiwari

Akanksha Tiwari

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आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jan 04, 2026 18:00 IST

    Modified By : Anurag Gupta
  • Jan 04, 2026 18:00 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr. Pooja Pillai

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