कोर्टिसोल हार्मोन की मदद से स्ट्रेस मैनेजमेंट, ब्लड शुगर मैनेजमेंट और मेटाबॉलिज्म की सेहत को बनाए रखने में मदद मिलती है, लेकिन अगर कोर्टिसोल हार्मोन का लेवल बढ़ जाए, तो शरीर में कई समस्याएं हो सकती हैं। अगर आपका भी वजन तेजी से बढ़ रहा है, चेहरा गोल दिखने लगता है या कंधों के बीच ज्यादा फैट दिखने लगता है, तो यह हाई कोर्टिसोल का संकेत हो सकता है। कुछ लोगों को मांसपेशियों में कमजोरी, चलने या उठने में परेशानी, हाई बीपी, लगातार थकान और अनिद्रा जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। घाव भरने में अधिक समय लगना या मुंहासे भी हाई कोर्टिसोल लेवल का संकेत हो सकता है। हालांकि, ये लक्षण अन्य समस्याओं में भी नजर आते हैं इसलिए डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। आइए जानते हैं कोर्टिसोल लेवल बढ़ने के अन्य संकेतों के बारे में। बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Raman Boddula, Senior Consultant Endocrinologist At Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।
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साल 2025 में Journal of Alzheimer’s Disease Reports में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, लंबे समय तक हाई कोर्टिसोल लेवल की वजह से याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। अध्ययन में यह भी बताया गया कि हाई कोर्टिसोल से बचने के लिए मेटाबॉलिक हेल्थ को बैलेंस करना अहम हो सकता है।
कोर्टिसोल लेवल बढ़ने के संकेत
| हाई कोर्टिसोल के संकेत | |
| फैट संबंधित संकेत | वजन बढ़ना |
| चेहरा गोल दिखना | |
| कंधों के बीच ज्यादा फैट होना | |
| त्वचा संबंधित संकेत | मुंहासे बढ़ना |
| अनचाहे बाल बढ़ना | |
| घाव भरने में अधिक समय लगना | |
| महिलाओं में दिखने वाले संकेत | पीरियड्स अनियमित होना |
| गर्भधारण में समस्या | |
| मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संकेत | चिंता और चिड़चिड़ापन |
| डिप्रेशन | |
| ध्यान लगाने में परेशानी होना | |
| अन्य संकेत | थकान और कमजोरी |
| हाई बीपी | |
| मांसपेशियों में कमजोरी |
महिलाओं में हाई कोर्टिसोल लेवल के संकेत
- महिलाओं में शरीर या चेहरे पर अनचाहे बालों का बढ़ना,
- पीरियड्स का अनियमित होना,
- महिलाओं में गर्भधारण करने में परेशानी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
- मूड में बदलाव के रूप में चिंता, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन और ध्यान लगाने में परेशानी भी हो सकती है।
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स्टेरॉइड रिएक्शन और हाई कोर्टिसोल संकेत एक जैसे लगते हैं
हाई कोर्टिसोल के संकेत, स्टेरॉइड दवाओं के साइड इफेक्ट्स से मिलते-जुलते हैं। जो लोग लंबे समय तक स्टेरॉइड दवाएं लेते हैं, उनमें भी हाई कोर्टिसोल जैसे संकेत दिख सकते हैं। अगर ये लक्षण लगातार बने हुए हैं, बढ़ रहे हैं या एक साथ कई लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से सलाह लें। डॉक्टर की सलाह पर सीरम कोर्टिसोल टेस्ट भी करा सकते हैं।
स्टेरॉइड दवाएं अचानक बंद न करें
अगर आप स्टेरॉइड दवाएं लेते हैं, तो उसे लेना अचानक बंद न करें। डॉक्टर लक्षणों की जांच करके जरूरत पड़ने पर कोर्टिसोल टेस्ट की सलाह दे सकते हैं, ताकि इसके पीछे का कारण पता लगाया जा सके और समय पर इलाज शुरू किया जा सके।
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एनर्जी लेवल और सॉल्ट इनटेक चेक करें
हाई कोर्टिसोल के दौरान एनर्जी लेवल में बदलाव आता है और लगातार थकान महसूस हो सकती है या सुबह के समय अधिक थकान महसूस हो सकती है। अगर लंबे समय तक थकान, कमजोरी, रोज के काम करने में एनर्जी की कमी महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। इसके साथ ही, डाइट में नमक की मात्रा को भी चेक करें, खासकर अगर हाई बीपी की समस्या है। ये केवल हाई कोर्टिसोल के संकेत हो सकते हैं इसलिए पुष्टि के लिए डॉक्टर से सलाह लेना न भूलें।
ग्रोथ हार्मोन को बढ़ाने के लिए नींद पूरी करें
कोर्टिसोल हार्मोन एड्रेनल ग्लैंड में बनता है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर भी बढ़ सकता है। ऐसा ग्रोथ हार्मोन के कारण हो सकता है। यह हार्मोन पिट्यूटरी ग्लैंड में बनता है। उम्र बढ़ने के साथ ग्रोथ हार्मोन भी कम होने लगता है। हमारे शरीर में मौजूद ग्रोथ हार्मोन, कोर्टिसोल का एंटागनिस्ट होता है। यानी शरीर में जितना ज्यादा ग्रोथ हार्मोन बढ़ेगा उतना ही ज्यादा कोर्टिसोल घटेगा। साथ ही, जितना ज्यादा कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ेगा, उतना अधिक ग्रोथ हार्मोन घटेगा। इसलिए शरीर में ग्रोथ हार्मोन को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए नींद पूरी करें। सोने से ग्रोथ हार्मोन का बैलेंस सुधर सकता है। अनिद्रा के कारण ग्रोथ हार्मोन का स्तर घट सकता है।
IGF हार्मोन रिलीज करने के लिए तय समय पर भोजन करें
कोर्टिसोल को कंट्रोल करने के लिए आईजीएफ (Insulin Like Growth Factor or IGF) हार्मोन भी जरूरी है। यह भी कोर्टिसोल हार्मोन को कंट्रोल करने का काम करता है। आईजीएफ हार्मोन लिवर के अंदर बनता है। अगर आईजीएफ हार्मोन का लेवल घटता है, तो ग्रोथ हार्मोन का स्तर भी घट सकता है और कोर्टिसोल लेवल बढ़ सकता है। इससे बचने के लिए बार-बार भोजन करने से बचें वरना शरीर में इंसुलिन हार्मोन बनेगा, लेकिन आईजीएफ हार्मोन नहीं बनेगा। यह हार्मोन तब बनता है जब आप भोजन न कर रहे हों। इसलिए फिक्स समय पर भोजन करें।
IGF हार्मोन कैसे काम करता है?
यह हार्मोन शरीर में फैट बर्निंग प्रक्रिया को रेगुलेट करता है और जब हम भूखे होते हैं या फास्टिंग फेज होता है, तो यह हार्मोन ब्लड शुगर लेवल को रेगुलेट करने में मदद करता है। जबकि इंसुलिन हार्मोन खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करता है, जबकि आईजीएफ हार्मोन भोजन से पहले शुगर लेवल को कंट्रोल करता है।
निष्कर्ष:
वजन बढ़ना, चेहरा गोल दिखना, कंधों के बीच ज्यादा फैट दिखना, मांसपेशियों में कमजोरी, हाई बीपी, थकान और कमजोरी, मुंहासे बढ़ना, घाव भरने में अधिक समय लगना, अनचाहे बालों का बढ़ना, पीरियड्स अनियमित होना, गर्भधारण में समस्या, चिंता, चिंता, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन और ध्यान लगाने में परेशानी, हाई कोर्टिसोल के लक्षण हो सकते हैं। हालांकि, ये लक्षण अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से भी जुड़े हो सकते हैं इसलिए डॉक्टर की सलाह पर सीरम कोर्टिसोल टेस्ट कराएं। कई बार स्टेरॉइड दवाओं के रिएक्शन से भी हाई कोर्टिसोल के संकेत दिख सकते हैं। ऐसे में स्टेरॉइड का सेवन अचानक बंद न करें, पहले डॉक्टर से जांच कराएं। इसके अलावा, कोर्टिसोल को कंट्रोल करने के लिए ग्रोथ और आईजीएफ हार्मोन पर गौर करें। अगर आईजीएफ हार्मोन का लेवल घटता है, तो ग्रोथ हार्मोन का स्तर भी घट सकता है और कोर्टिसोल लेवल बढ़ सकता है।
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FAQ
क्या हाई कोर्टिसोल से डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है?
हां, लंबे समय तक हाई कोर्टिसोल लेवल के कारण ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित हो सकता है और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।हाई कोर्टिसोल और कुशिंग सिंड्रोम में क्या अंतर है?
हाई कोर्टिसोल एक स्ट्रेस हार्मोन है और कुशिंग सिंड्रोम लंबे समय तक शरीर में हाई कोर्टिसोल के कारण होने वाली एक कंडीशन है।
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Sep 29, 2026 19:21 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Raman Boddula
