Sat Oct 24, 2026 | 04:25 PM IST

Medically Reviewed by Dr Akshay Chugh

स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल को नेचुरल तरीके से कंट्रोल करने के लिए फॉलो करें ये 7 तरीके

कोर्टिसोल, जिसे स्ट्रेस हार्मोन भी कहते हैं, का हाई लेवल वजन बढ़ने, हाई ब्लड प्रेशर और एंग्जायटी जैसी समस्याओं का कारण बनता है। ऐसे में नींद में सुधार, गहरी सांस लेने और रोजाना एक्सरसाइज करने से कोर्टिसोल कम किया जा सकता है।  
स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल को नेचुरल तरीके से कंट्रोल करने के लिए फॉलो करें ये 7 तरीकेस्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल को नेचुरल तरीके से कंट्रोल करने के लिए फॉलो करें ये 7 तरीके

कोर्टिसोल हार्मोन को हम स्ट्रेस हार्मोन के रूप में भी जानते हैं। यह हमारे शरीर की एड्रिनल ग्लैंड द्वारा बनता है। जब आप तनाव में होते हैं तो कोर्टिसोल हार्मोन शरीर को फाइट या फ्लाइट मोड के लिए तैयार करता है। हालांकि, जब तनाव लगातार बना रहता है तो कोर्टिसोल का लेवल बहुत ज्यादा हाई हो जाता है, जिससे वजन बढ़ना, हाई ब्लड प्रेशर, कमजोर इम्यूनिटी, एंग्जायटी और स्लीप डिसऑर्डर जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इसलिए, कोर्टिसोल लेवल को नेचुरल तरीके से कम करना हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। आइए इस लेख में Dr. Akshay Chugh, Internal Medicine & Metabolic Disorders, Metro Hospital and Heart Institute, Noida से जानते हैं कि कोर्टिसोल लेवल कम करने के लिए क्या करना चाहिए?

नेचुरल तरीके से कोर्टिसोल लेवल कम करने के तरीके

साल 2024 में Psychoneuroendocrinology जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, कोर्टिसोल हार्मोन के लेवल को कम करने में स्ट्रेस मैनेजमेंट तकनीकें काफी प्रभावी साबित होती हैं। माइंडफुलनेस, मेडिटेशन और रिलैक्सेशन जैसी तकनीकें कोर्टिसोल के लेवल को सकारात्मक तरीके से बदलने में सबसे ज्यादा असरदार हैं।

Dr. Akshay Chugh बताते हैं कि कोर्टिसोल लेवल कम करने के लिए न सिर्फ मेडिटेशन करना काफी नहीं है, बल्कि आप इन उपायों को भी अपना सकते हैं-

1. नींद की गुणवत्ता सुधारें

कोर्टिसोल और नींद का एक गहरा और उलटा कनेक्शन होता है। जब आप कम सोते हैं तो शरीर कोर्टिसोल लेवल बढ़ा देता है और जब कोर्टिसोल बढ़ा होता है तो आपको नींद नहीं आती है। इसलिए, डॉक्टर रोजाना रात को 7 से 8 घंटे की गहरी और अच्छी नींद लेने की सलाह देते हैं। सोने और जागने का एक तय समय होना जरूरी है। रात में सोने से 1 घंटा पहले स्क्रीन से दूरी बना लें, ताकि मेलाटोनिन सही से बने और कोर्टिसोल का लेवल कम हो सके।

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2. गहरी सांस और वेगस नर्व स्टिमुलेशन

जब आप तनाव में होते हैं, तो आपकी सांसें छोटी और तेज हो जाती हैं, जिससे शरीर को और ज्यादा कोर्टिसोल रिलीज करने का संकेत मिलता है। दिन में दो बार 5 से 10 मिनट के लिए 4-7-8 ब्रीदिंग तकनीक या डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज का अभ्यास करें। गहरी सांस लेने से हमारी वेगस नर्व एक्टिव होती है, जो दिमाग को यह संदेश देती है कि अब खतरा टल गया है और कोर्टिसोल का लेवल गिरने लगता है।

3. नियमित और संतुलित व्यायाम करें

नियमित रूप से एक्सरसाइज करने से तनाव को कम करने में मदद मिलती है, लेकिन बहुत ज्यादा या हाई इंटेंसिटी वर्कआउट करने से शरीर पर एक शारीरिक तनाव पड़ता है, जिससे कोर्टिसोल लेवल और ज्यादा बढ़ सकता है। इसलिए हफ्ते में 150 मिनट मॉडरेट एक्सरसाइज करें, जिसमें ब्रिस्क वॉक, योग, स्विमिंग या हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शामिल हो। यह आपके शरीर में एंडोर्फिन और सेरोटोनिन लेवल को बढ़ाता है, जो कोर्टिसोल को नेचुरल तरीके से कम करने में मदद करते हैं।

4. कैफीन और शुगर का सेवन सीमित करें

बहुत ज्यादा चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स पीने से एड्रिनल ग्लैंड्स को बढ़ावा मिलता है और वे अचानक कोर्टिसोल लेवल को रिलीज करते हैं। इसलिए, दोपहर 2 बजे के बाद कैफीन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। मीठी चीजें और जंक फूड खाने से ब्लड शुगर लेवल तेजी से स्पाइक होता है, जिसके बाद शरीर उसे कंट्रोल करने के लिए कोर्टिसोल रिलीज करता है। इसके बजाय फाइबर और प्रोटीन से भरपूर फूड्स का सेवन करना चाहिए।

5. एडाप्टोजेनिक जड़ी-बूटियां लें

कुछ खास जड़ी-बूटियां हमारे शरीर के तनाव से लड़ने की क्षमता को बढ़ाती हैं, जिन्हें एडाप्टोजेन कहा जाता है। अश्वगंधा का नियमित सेवन शरीर में बढ़े हुए कोर्टिसोल लेवल को काफी हद तक कम करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, तुलसी और ब्राह्मी का सेवन भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद मानी जाती है।

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6. कैमोमाइल टी या हर्बल टी का सेवन करें

दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, क्योंकि हल्का डिहाइड्रेशन भी शरीर में कोर्टिसोल लेवल को बढ़ा सकता है। शाम के समय कैमोमाइल टी या ग्रीन टी का एक कप पीने से न सिर्फ नर्वस सिस्टम शांत होता है, बल्कि नींद की क्वालिटी भी बेहतर होती है।

7. सोशल कनेक्शन और खुलकर हंसना

अकेलापन और आइसोलेशन शरीर में कोर्टिसोल और इंफ्लेमेशन को बढ़ाते हैं। इसलिए, कोर्टिसोल लेवल को कम करने के लिए दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएं, कोई कॉमेडी फिल्म या वीडियो देखें। हंसने से शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन का लेवल कम होता है और इम्यूनिटी मजबूत होती है।

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कोर्टिसोल हार्मोन ज्यादा रहने पर डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

जब कोर्टिसोल लेवल लंबे समय तक ज्यादा रहता है तो यह कुशिंग सिंड्रोम का संकेत हो सकता है। अगर आपको लगातार वजन बढ़ना, मांसपेशियों में कमजोरी, ज्यादा थकान, हाई ब्लड प्रेशर या मूड में लगातार बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए। सही समय पर और सही इलाज से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।

निष्कर्ष
तनाव हमारी लाइफ का एक हिस्सा बन चुका है और हम चाहकर भी तनाव के बिना अपना जीवन नहीं जी सकते हैं। लेकिन बहुत ज्यादा तनाव लेना न सिर्फ हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक माना जाता है, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हो सकता है। इसलिए, तनाव को मैनेज करना बहुत जरूरी है, ताकि कोर्टिसोल लेवल को संतुलित रखा जा सके।
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FAQ

  • आपके शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने का क्या कारण है?

    शरीर में कोर्टिसोल लेवल बढ़ने का मुख्य कारण बहुत ज्यादा तनाव, खराब नींद, पिट्यूटरी या एड्रिनल ग्लैंड में ट्यूमर और कुछ दवाइयों का सेवन करना है।
  • शरीर में कोर्टिसोल कितना होना चाहिए?

    आमतौर पर सुबह के समय कोर्टिसोल लेवल 10 से 20 माइक्रोग्राम प्रति डीएल और शाम को कम होकर 3 से 10 mcg/dL के बीच होना चाहिए।

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Oct 24, 2026 15:10 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Akshay Chugh