Fri Sep 11, 2026 | 05:59 PM IST

Medically Reviewed by Archana Singhal , Counsellor & Family Therapist

स्ट्रेस केवल दिमाग को ही नहीं, शरीर के इन 7 अंगों को भी पहुंचाता है गंभीर नुकसान, एक्पर्ट से जानें

तनाव को हमेशा मेंटल हेल्थ से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन बहुत ज्यादा स्ट्रेस फिजिकल हेल्थ पर भी असर डाल सकता है। हमेशा तनाव में रहने वाले लोगों के शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। इस लेख में डॉक्टर ने स्ट्रेस को मैनेज करने के तरीके भी बताए हैं।  

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तनाव यानी स्ट्रेस से आमतौर पर सभी लोग गुजरते हैं। काम का प्रेशर, परिवार की चिंता, पैसों की परेशानी या लगातार किसी बात को लेकर बेचैनी, इन सबका असर सिर्फ मूड पर नहीं पड़ता, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है। लंबे समय तक स्ट्रेस में रहने से शरीर के कई अंगों के फंक्शन सामान्य तरीके से काम नहीं कर पाते। स्ट्रेस का शरीर के किन अंगों पर असर पड़ता है? यह जानने के लिए हमने माइंडवेल काउंसल की संस्थापक, काउंसलर और फैमिली थेरेपिस्ट अर्चना सिंघल (Archana Singhal, Counsellor & Family Therapist and Founder of Mindwell Counsel) से बात की।

तनाव शरीर के किन अंगों पर असर डाल सकता है?

Archana Singhal कहती हैं, “जब कोई व्यक्ति तनाव में होता है, तो शरीर एक फाइट या फ्लाइट रिस्पॉन्स में चला जाता है। इस दौरान एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं। अगर यह थोड़े समय के लिए होता है, तो शरीर का इम्यून सिस्टम इसे नॉर्मल कर देता है, लेकिन अगर बार-बार यह होता है या लंबे समय तक तनाव बना रहता है, तो परेशानी हो सकती है।”

1. दिमाग और नर्व सिस्टम

Archana Singhal का कहना है, “स्ट्रेस का सीधा असर दिमाग और नर्व सिस्टम पर पड़ता है। अचानक तनाव होने पर शरीर अलर्ट मोड में चला जाता है और हार्ट रेट बढ़ सकता है। अगर तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर मूड, सोने के पैटर्न, फोकस करने और मेमोरी पर पड़ सकता है। लगातार तनाव रहने पर व्यक्ति चिड़चिड़ापन, बेचैनी या ध्यान लगाने में परेशानी महसूस कर सकता है।”

2. हार्ट और ब्लड वेसल्स

Archana Singhal ने बताया कि स्ट्रेस के समय हार्ट तेजी से धड़क सकता है और ब्लड प्रेशर कुछ समय के लिए बढ़ सकता है। शरीर इसलिए एक्टिव होता है, ताकि शरीर की मांसपेशियों और दूसरे जरूरी अंगों तक जल्दी ब्लड और ऑक्सीजन पहुंच सकें। क्रोनिक स्ट्रेस में लगातार हाई ब्लड प्रेशर और अनहेल्दी लाइफस्टाइल के कारण हार्ट से जुड़ी बीमारियां होने का रिस्क बढ़ सकता है। अगर किसी को तनाव रहता है और साथ में वह स्मोकिंग, फिजिकल एक्टिविटी न करना और खराब डाइट जैसी आदतें भी जुड़ जाए, तो हार्ट की बीमारियां हो सकती है। इसलिए लगातार स्ट्रेस को सिर्फ मेंटल हेल्थ से जोड़ना सही नहीं है।

3. पेट और गट हेल्थ

Archana Singhal ने कहा, “जब भी कोई बहुत ज्यादा तनाव में होता है, तो उसे पेट में अजीब-सा महसूस होने लगता है। किसी को एसिडिटी या हार्टबर्न की परेशानी महसूस होने लगती है, तो किसी को ब्लोटिंग होने लगती है। कई लोग टेंशन में टॉयलेट जाने लगते हैं। दिमाग का सीधा असर पेट की हेल्थ पर पड़ता है। दिमाग और डाइजेशन सिस्टम एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और इस वजह से स्ट्रेस होते ही पेट पर तुरंत असर दिखाई भी दे सकता है। कई लोगों का स्ट्रेस में खाने का तरीका भी बदल जाता है। कोई बहुत ज्यादा खाने लगता है, तो कोई बिल्कुल खाना छोड़ देता है। इस कारण कुछ लोगों को ब्लोटिंग, पेट दर्द, मतली, कब्ज या दस्त जैसी शिकायतें हो सकती हैं।”

4. हार्मोन्स और एंडोक्राइन सिस्टम

Archana Singhal के अनुसार, जब ब्रेन को लगता है कि शरीर किसी खतरे में है, तो ऐसे समय में शरीर में हाइपोथालामस पिट्यूचरी एड्रेनालाईन यानी HPA axis एक्टिवि हो जाता है और एड्रेनालाईन ग्लैंड कोर्टिसोल रिलीज करने लगती है। जैसे ही कोर्टिसोल रिलीज होता है, तो मुश्किलों से निपटने के लिए शरीर एनर्जी रिलीज करने लगता है। जब स्ट्रेस कम होने लगता है, तो हार्मोन लेवल सामान्य होने लगता है। 

अगर स्ट्रेस लगातार रहता है, तो सिस्टम लगातार एक्टिवेट हो सकता है। इस वजह से मेटाबोलिक से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

stress on body

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5. इम्यून सिस्टम

Archana Singhal कहती हैं, “स्ट्रेस और इम्यूनिटी आपस में जुड़े हुए हैं। स्ट्रेस के कारण शरीर का इम्यून सिस्टम लगातार एक्टिव मोड में रहता है, जिसका असर लंबे समय में देखने को मिल सकता है। अगर किसी व्यक्ति को स्ट्रेस के साथ नींद खराब होना, ठीक तरीके से खान-पान का ध्यान न रखना और फिजिकल एक्टिविटी कम करने से शरीर के पूरे हेल्थ पर पड़ सकता है। इस वजह से लंबे समय से तनाव में रहने वाले व्यक्ति को बार-बार थकान या कमजोरी महसूस हो सकती है। हालांकि, हर बार ऐसी समस्या का कारण स्ट्रेस ही हो, यह जरूरी नहीं है।”

6. मांसपेशियों और शरीर में दर्द

Archana Singhal का कहना, “स्ट्रेस में मांसपेशियों में भी स्ट्रेस महसूस होने लगता है। लंबे समय तक तनाव में रहने वाले लोगों को गर्दन, कंधे और पीठ की मांसपेशियों में दर्द रह सकता है। इसलिए कई बार लोगों को स्ट्रेस में रहने पर स्ट्रेचिंग, फिजिकल एक्टिविटी या रिलेक्सेशन एक्सरसाइज करने की सलाह दी जा सकती है।”

7. रिप्रोडक्टिव सिस्टम

Archana Singhal ने बताया कि लंबे समय तक रहने वाला स्ट्रेस सेक्शुअल हेल्थ पर असर डाल सकता है। महिलाओं में ज्यादा स्ट्रेस के कारण पीरियड्स अनियमित होना, पीरियड्स का साइकल में बदलाव होना या PMS के लक्षणों से परेशानी देखी जा सकती हैं।

वहीं पुरुषों में क्रोनिक स्ट्रेस के कारण लिबिडो और सेक्शुअल फंक्शन में बदलाव हो सकते हैं। स्ट्रेस के कारण टेस्टोस्टेरोन और स्पर्म हेल्थ पर भी असर पड़ सकता है।

प्रेग्नेंसी के दौरान बहुत ज्यादा स्ट्रेस होना मां और शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए प्रेग्नेंट महिला अगर स्ट्रेस से गुजर रही है, तो उसे डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

स्ट्रेस के बारे में रिसर्च क्या कहती है?

Mayo Clinic का मानना है कि स्ट्रेस शरीर के कई अंगों पर असर डाल सकता है।

शरीर पर असर

मूड पर असर

व्यवहार पर असर 

सिरदर्द

एंग्जायटी होना

बहुत ज्यादा या कम खाना 

मांसपेशियों में खिंचाव या दर्द

बेचैनी महसूस होना 

गुस्से में चिल्लाना

सीने में दर्द

फोकस कम होना 

नशीली दवाओं या शराब का सेवन

थकान

मेमोरी से जुड़ी समस्याएं

तंबाकू का सेवन

यौन इच्छा में बदलाव

खुद को असहाय महसूस करना

दोस्तों से दूरी बनाना और घर में रहना

पेट खराब होना

चिड़चिड़ापन या गुस्सा

शारीरिक गतिविधि कम करना

नींद से जुड़ी समस्याएं

डिप्रेशन 

….

इम्यून सिस्टम कमजोर होना

स्ट्रेस कम करने के उपाय

Archana Singhal ने कहा कि तनाव को पूरी तरह से खत्म करना तो मुमकिन नहीं है, लेकिन इसे मैनेज किया जा सकता है।

  • रोज कुछ समय फिजिकल एक्टिविटी जरूर करें।
  • नींद का रुटीन को नियमित रखें।
  • परिवार या दोस्तों से बातचीत करें।
  • लंबी व गहरी सांस लेने जैसे प्राणायाम करने चाहिए।
  • मेडिटेशन स्ट्रेस को मैनेज करने का अच्छा तरीका है।
  • अगर स्ट्रेस बढ़ गया है, तो मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल से सलाह जरूर लें।

निष्कर्ष
स्ट्रेस शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर लक्षण की वजह स्ट्रेस ही हो। इसलिए अगर शरीर में लगातार दर्द, बहुत ज्यादा थकान होना, सांस लेने में परेशानी, छाती में दर्द, लगातार डाइजेशन से जुड़ी परेशानी या पीरियड्स में बदलाव होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। स्ट्रेस को लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलावों से मैनेज किया जा सकता है।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • क्या तनाव की वजह से रात में दांत कटकटाने की आदत पड़ सकती है?

    दांत कटकटाने को ब्रक्सिज्म कहा जाता है। अनजाने में तनाव के कारण लोग सोते समय जबड़े की मांसपेशियों को कस लेते हैं और दांत पीसते हैं, जिससे सुबह उठने पर जबड़े में दर्द और सिरदर्द होता है।
  • तनाव का त्वचा और बालों की सेहत पर क्या सीधा असर पड़ता है?

    स्ट्रेस से शरीर में सूजन बढ़ती है, जिससे एक्ने, सोरायसिस, एग्जिमा और अचानक बालों का तेजी से झड़ना शुरू हो सकता है। 

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 10, 2026 11:09 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Archana Singhal

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