मेनोपॉज होने पर महिलाओं में पीरियड्स स्थायी रूप से बंद हो जाती है और इस दौरान शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। इसमें एक बदलाव एस्ट्रोजन हार्मोन में कमी से जुड़ा है। मेनोपॉज के आस-पास कई महिलाओं को भूलने, ध्यान लगाने में परेशानी और चीजों को याद रखने में दिक्कत महसूस होती है। इसलिए मेनोपॉज को डिमेंशिया के साथ जोड़कर देखा जाता है। डिमेंशिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें दिमाग की कई क्षमताएं प्रभावित होने लगती हैं और इसका असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। अल्जाइमर रोग भी डिमेंशिया का एक प्रमुख कारण है। अल्जाइमर रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के मकसद से सितंबर माह को विश्व अल्जाइमर माह (World Alzheimer’s Month 2026) के रूप में मनाया जाता है। आइए इस मौके पर जानते हैं कि आखिर मेनोपॉज के बाद कुछ महिलाओं में डिमेंशिया का खतरा क्यों बढ़ जाता है और इससे कैसे बचें? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Bala Raja Sekhar Chandra Yetukuri, Sr. Consultant Neuro & Spine Surgeon And Clinical Director- Advance Endoscopic Spine Surgery At Yashoda Hospitals,Hitec City, Hyderabad से बात की।
Harvard Medical School के मुताबिक, एक अध्ययन में पाया गया कि जिन महिलाओं में करीब 45 साल की उम्र में मेनोपॉज हुआ, उनमें 65 साल की उम्र से पहले डिमेंशिया का पता चलने की संभावना उन महिलाओं की तुलना में 30% अधिक थी, जिनके पीरियड्स करीब 50 साल की उम्र में बंद हुए थे।
साल 2023 में Maturitas में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, मेनोपॉज और डिमेंशिया का संबंध देखा गया। अध्ययन के मुताबिक, डिमेंशिया के संबंध के कारण महिलाओं को मेनोपॉज के दौरान हॉट फ्लैशेज, रात में पसीना, नींद की समस्या और मूड में बदलाव जैसी समस्याएं हुईं। स्टडी में स्वस्थ खान-पान, वजन को कंट्रोल रखना और शारीरिक गतिविधि जैसे उपाय सुझाए।
मेनोपॉज (Menopause) और मानसिक सेहत का आपस में क्या कनेक्शन है?
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मेनोपॉज के बाद कुछ महिलाओं में डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है। इसके पीछे कुछ कारण हो सकते हैं-
- हार्मोनल बदलाव
- ब्लड वेसल्स से जुड़ी समस्याएं और
- उम्र बढ़ने जैसे कई कारण हो सकते हैं।
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एस्ट्रोजन हार्मोन और डिमेंशिया का संबंध
मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल काफी कम हो जाता है। इससे दिमाग में सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और ब्लड वेसल्स से होने वाले नुकसान का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, मेनोपॉज खुद डिमेंशिया का कारण नहीं बनता।
साल 2024 में The American Journal Of Geriatric Psychiatry में प्रकाशित एक स्टडी में 2,73,260 महिलाओं के डेटा का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि लंबे समय तक एस्ट्रोजन के संपर्क में रहने वाली महिलाओं में डिमेंशिया का खतरा कम मिला। जिन महिलाओं में एस्ट्रोजन का संपर्क 38 से 42 साल तक रहा, उनमें डिमेंशिया का खतरा 28% कम था।
मेनोपॉज के बाद ब्रेन फॉग (Brain Fog) और याददाश्त में कमी के शुरुआती लक्षण
कई महिलाओं को पेरिमेनोपॉज या मेनोपॉज के दौरान कुछ समय के लिए ब्रेन फॉग की समस्या हो सकती है। इसमें-
- चीजें भूलना
- ध्यान लगाने में परेशानी और
- अनिद्रा की समस्या हो सकती है।
ये लक्षण अक्सर हार्मोन में बदलाव, चिंता, हॉट फ्लैशेज और खराब नींद से जुड़ी होती हैं। इसका मतलब यह जरूरी नहीं है कि महिला को डिमेंशिया है। हालांकि, अगर याददाश्त की समस्या लगातार बनी रहे या समय के साथ बढ़ती जाए, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
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महिलाओं में डिमेंशिया और अल्जाइमर का खतरा ज्यादा क्यों होता है?
- जिन महिलाओं को समय से पहले या जल्दी मेनोपॉज हो जाता है, खासकर 45 साल की उम्र से पहले, उनमें डिमेंशिया का खतरा ज्यादा हो सकता है।
- हाई बीपी, डायबिटीज, मोटापा, धूम्रपान, सुनने की क्षमता कम होना, डिप्रेशन, शारीरिक गतिविधि की कमी और सामाजिक रूप से अलग-थलग रहने के कारण महिलाओं में स्ट्रेस, एंग्जाइटी, डिप्रेशन के कारण मेनोपॉज के बाद डिमेंशिया का खतरा हो सकता है।
- कम उम्र में दोनों अंडाशय को सर्जरी से हटाने वाली महिलाओं में भी इसका खतरा देखा गया है। हालांकि, इस पर सीमित स्टडी हुई है।
डॉक्टर के इन 5 टिप्स से मेनोपॉज के बाद घटाएं डिमेंशिया का रिस्क
- दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए नियमित एक्सरसाइज करें, पर्याप्त नींद लें और हेल्दी डाइट लें।
- बीपी, ब्लड शुगर लेवल और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करें।
- धूम्रपान और अल्कोहल के सेवन से बचें।
- डिमेंशिया से बचाव के लिए हार्मोन थेरेपी तब तक शुरू न करें जब तक डॉक्टर इसे लेने की सलाह न दें।
- स्ट्रेस से बचें। योग, मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज की मदद लें।
निष्कर्ष:
मेनोपॉज खुद डिमेंशिया का कारण नहीं है। हालांकि, इस दौरान एस्ट्रोजन की कमी, पेरिमेनोपॉज या मेनोपॉज के दौरान कुछ समय के लिए ब्रेन फॉग, हार्मोनल बदलाव, बढ़ती उम्र, ब्लड वेसल्स से जुड़ी समस्याएं, डायबिटीज, हाई बीपी, नींद की समस्या, डिप्रेशन और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है।
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FAQ
क्या डिमेंशिया सिर्फ बुजुर्गों को होता है?
डिमेंशिया उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा आम होता है, लेकिन यह केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। इसके लक्षण कम उम्र में भी शुरू हो सकते हैं।डिमेंशिया की जांच कैसे होती है?
मेडिकल हिस्ट्री, फिजिकल एग्जामिनेशन और याददाश्त, भाषा से जुड़ी जांच हो सकती है। जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट, सीटी और एमआरआई भी किए जा सकते हैं।
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Sep 30, 2026 18:18 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Bala Raja Sekhar Chandra
