जब भी किसी व्यक्ति की याददाश्त कमजोर हो रही होती है, तो लोगों को लगता है कि ऐसा अल्जाइमर रोग या डिमेंशिया के कारण हो रहा है और इसे ठीक करना नामुमकिन है। जबकि कमजोर याददाश्त के पीछे कई ऐसे कारण हो सकते हैं जिन्हें कंट्रोल या ठीक किया जा सकता है जैसे थायराइड या विटामिन बी12 की कमी, स्लीप एपनिया, स्ट्रेस और डिप्रेशन, कुछ दवाओं का असर या अल्कोहल का सेवन। इन समस्याओं का इलाज संभव है। हालांकि, देर करने पर अन्य शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं। अल्जाइमर रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के मकसद से सितंबर माह को विश्व अल्जाइमर माह (World Alzheimer’s Month 2026) के रूप में मनाया जाता है। आइए इस मौके पर याददाश्त कमजोर होने के पीछे छुपे कारणों को विस्तार से समझते हैं जिनका इलाज संभव है। बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Bala Raja Sekhar Chandra Yetukuri, Sr. Consultant Neuro & Spine Surgeon And Clinical Director- Advance Endoscopic Spine Surgery At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।
| कमजोर याददाश्त के इन कारणों का इलाज संभव है | |
| थायराइड | विटामिन बी12 की कमी |
| स्लीप एपनिया | स्ट्रेस और डिप्रेशन |
| कुछ दवाओं का असर | अल्कोहल का अधिक सेवन |
क्या हर बार याददाश्त कमजोर होना डिमेंशिया या अल्जाइमर का संकेत है?
हर बार याददाश्त कमजोर होना डिमेंशिया या अल्जाइमर का संकेत नहीं होता। उम्र बढ़ने पर कभी-कभार नाम या चीजें भूलना सामान्य हो सकता है, लेकिन याददाश्त लगातार कमजोर हो रही हो और रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
Harvard Medical School में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, उम्र बढ़ने के साथ दिमाग के फ्रंटल लोब के काम करने की क्षमता में कुछ बदलाव आ सकते हैं, जिससे छोटी-छोटी बातें भूलने की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, तनाव, थकान, नींद की कमी, मूड से जुड़ी समस्याएं भी याददाश्त को प्रभावित कर सकती हैं।
1. थायराइड और विटामिन बी12 की कमी
हाइपोथायराइडिज्म, यानी थायराइड ग्रंथि का कम एक्टिव होना, थकान, सोचने की गति धीमी होना और चीजें भूलने जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। इसी तरह विटामिन B12 की कमी तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकती है और मूड में बदलाव, हाथ-पैर में झनझनाहट, कमजोरी और याददाश्त से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकती है।
थायराइड फंक्शन और विटामिन बी12 की जांच कराएं
- जब भी याददाश्त या मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित कोई समस्या हो, तो खुद से इलाज न करें और न ही सप्लीमेंट्स लें।
- मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री जानने के साथ याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता की जांच करें। जरूरत पड़ने पर थायराइड फंक्शन और विटामिन बी12 जैसी जांच भी कराने की सलाह दी जा सकती है।
साल 2021 में Journal Of Neuroendocrinology में प्रकाशित एक समीक्षा में थायराइड हार्मोन में गड़बड़ी और याददाश्त, ध्यान, सोचने-समझने की क्षमता और व्यवहार में बदलाव के बीच संबंध से जुड़े शोधों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने कुल 106 अध्ययनों को इसमें शामिल किया।
समीक्षा के अनुसार, हाइपोथायराइडिज्म में सामान्य सोचने की क्षमता, याददाश्त, ध्यान और एकाग्रता प्रभावित हो सकती है। कुछ अध्ययनों में थायराइड का इलाज करने के बाद व्यवहार संबंधित लक्षणों में सुधार भी देखा गया है। हालांकि, ऐसा हर केस में होना जरूरी नहीं है।
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2. स्लीप एपनिया
पर्याप्त और अच्छी नींद न मिलने से भी दिमाग की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। खासतौर पर ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया और लंबे समय तक नींद की कमी होने से ध्यान और याददाश्त प्रभावित हो सकती है।
3. स्ट्रेस और डिप्रेशन
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लंबे समय तक रहने वाला स्ट्रेस और डिप्रेशन भी ब्रेन फॉग, काम करने की इच्छा में कमी और ध्यान लगाने में परेशानी का कारण बन सकते हैं। खासकर, उम्रदराज लोगों में ये लक्षण कभी-कभी डिमेंशिया जैसे नजर आ सकते हैं। हालांकि, सही मदद और उचित इलाज से सुधार हो सकता है।
4. कुछ दवाओं का असर
कुछ दवाएं याददाश्त, ध्यान और सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। खासकर उम्रदराज लोगों में कई दवाएं एक साथ लेने पर ऐसे दुष्प्रभावों का खतरा बढ़ सकता है। कुछ नींद की दवाएं, एलर्जी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं याददाश्त को प्रभावित कर सकती हैं।
अचानक डोज बंद न करें
अपनी मर्जी से दवा बंद या उसकी खुराक कम न करें। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर दवा बदलने या उसके विकल्प पर विचार कर सकते हैं।
5. अल्कोहल का अधिक सेवन
लंबे समय तक अधिक शराब का सेवन भी याददाश्त को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, ज्यादा अल्कोहल के सेवन से कुछ पोषक तत्वों की कमी भी हो सकती है, जो मानसिक और तंत्रिका संबंधित समस्याओं का कारण बन सकती है।
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डॉक्टर किन जांचों की सलाह दे सकते हैं?
याददाश्त कमजोर होने पर डॉक्टर लक्षणों के आधार पर ब्लड टेस्ट, जैसे थायराइड फंक्शन और विटामिन बी12 की जांच कर सकते हैं। कुछ मामलों में सीटी स्कैन या एमआरआई जैसे टेस्ट भी किए जा सकते हैं।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
- अगर कमजोर याददाश्त की समस्या लगातार बनी रहे,
- समय के साथ यह समस्या बढ़ती जाए,
- रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
निष्कर्ष:
कमजोर याददाश्त का कारण हमेशा अल्जाइमर या डिमेंशिया ही नहीं होता, इसके पीछे अन्य कारण हो सकते हैं जिनका समय पर इलाज करना संभव है। थायराइड या विटामिन बी12 की कमी, स्लीप एपनिया, स्ट्रेस और डिप्रेशन, कुछ दवाओं का असर या अल्कोहल का सेवन। कमजोर याददाश्त की समस्या लगातार बनी रहे, समय के साथ बढ़ने लगे, रोजमर्रा के काम प्रभावित हों, तो डॉक्टर से संपर्क करें। याददाश्त कमजोर होने पर डॉक्टर ब्लड टेस्ट, जैसे थायराइड फंक्शन और विटामिन बी12 की जांच कर सकते हैं।
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FAQ
क्या डिमेंशिया में बोलने में भी परेशानी होती है?
हां, कुछ लोगों को सही शब्द सोचने, बातचीत को समझने या अपनी बात साफ ढंग से कहने में परेशानी हो सकती है।क्या अल्जाइमर का इलाज संभव है?
अल्जाइमर का फिलहाल कोई स्थायी इलाज नहीं है जो इस बीमारी को पूरी तरह से खत्म कर दे। हालांकि, लक्षणों को सही इलाज और थेरेपी से कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। सकते हैं।
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Sep 30, 2026 19:18 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Bala Raja Sekhar Chandra
