Global Cancer Observatory 2022 के अनुसार, भारत में पुरुषों में मुंह के कैंसर के मामले एक लाख से भी अधिक दर्ज किए गए, जिसके साथ यह पुरुषों में होने वाले सभी कैंसरों में पहले स्थान पर था। वहीं, महिलाओं में इसके 35 हजार से भी ज्यादा मामले सामने आए और यह महिलाओं में चौथे स्थान पर रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में ओरल कैंसर कितनी तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, देश में तंबाकू या गुटखा चबाना और सिगरेट या बीड़ी पीना तो इन मामलों में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी और मुख्य वजह है ही, लेकिन इसके साथ ही एक और बड़ा कारण लोगों द्वारा इसके शुरुआती लक्षणों को न पहचान पाना और जांच में देरी होना भी है। देरी से पता चलने के कारणों के बारे में हमने Dr. Vishnu Hari, Associate Director & Head- Medical Oncology, Haematology & BMT, Sarvodaya Hospital, Sector-8, Faridabad से बात की। उन्होंने बताया कि मुंह के कैंसर की शुरुआत अक्सर छोटे और सामान्य दिखने वाले लक्षणों से होती है। यही कारण है कि लोग इसे गंभीर बीमारी नहीं मानते और जांच में देरी हो जाती है।
मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान में देरी का कारण
Dr. Vishnu Hari कहते हैं, “मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षण कई बार मुंह के छालों या दांतों के दर्द जैसे हो सकते हैं। कई लोग इसे मामूली दर्द समझकर घरेलू उपाय या मेडिकल स्टोर से दवा लेकर इलाज करने की कोशिश करते हैं। इस वजह से बीमारी अंदर ही अंदर बढ़ती रहती है। इस लापरवाही के कारण यह आगे चलकर गंभीर बीमारी में बदल सकते हैं। जो लोग तंबाकू, गुटखा, पान मसाला, बीड़ी और सिगरेट पीते हैं, अगर उनके मुंह में जलन, सफेद या लाल धब्बे और छोटे घाव दिखाई दें, तो इसे इग्नोर न करें, क्योंकि ये धीरे-धीरे कैंसर का रूप ले सकते हैं।”
जागरूकता की कमी
Dr. Vishnu Hari के मुताबिक, “भारत की एक बड़ी आबादी गांव या छोटे कस्बों या शहरों में रहती है, जहां लोग रेगुलर डेंटल चेकअप नहीं कराते। कई बार मरीज शर्म या डर की वजह से भी डॉक्टर के पास जाने से बचते हैं। अक्सर मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बोलने, खाने या मुंह खोलने में परेशानी शुरू हो जाती है। इस समय तक बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है, जिससे इलाज मुश्किल हो सकता है। इसलिए लोगों को ओरल कैंसर के लक्षणों के प्रति जागरूक कराना बहुत जरूरी है।”
ओरल कैंसर का देर से पता चलने पर स्टडी क्या कहती है?
Science Direct में प्रकाशित 2024 की स्टडी में बताया गया है कि ओरल कैंसर की पहचान करने में देरी के कई कारण हैं। इसमें कैंसर से जुड़े रोगियों की मेडिकल शीट्स और बातचीत के आधार पर शोध किया गया। स्टडी के अनुसार, मरीज को लक्षण दिखने के बाद औसतन 90 दिन देरी से पहुंचा। वहीं सेकेंडरी देरी में औसतन करीब 11 दिन की थी और कुल मिलाकर औसतन 106 दिनों की देरी देखी गई। जो मरीज एडवांस स्टेज और नोडल सेकेंडरीज में थे, उन्होंने चेकअप के लिए आने में काफी ज्यादा समय लिया था। इसके अलावा, मरीज जब पहली बार किसी डॉक्टर से मिला, तो उस समय फैसले लेने में देरी होने के कारण भी मरीज कैंसर विशेषज्ञ के पास देरी से पहुंचा। हालांकि, इसमें पाया गया कि जो मरीज पढ़े लिखे थे, वे अपने लक्षणों को लेकर काफी पहले ही डॉक्टर के पास पहुंच गए थे।

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ओरल कैंसर के लक्षण
Dr. Vishnu Hari ने बताया कि लोगों को मुंह के कैंसर के इन लक्षणों को बिल्कुल भी इग्नोर नहीं करना चाहिए। अगर इनमें से कोई भी लक्षण दो या तीन हफ्तों से ज्यादा समय तक बना रहे, तो तुरंत डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
- मुंह में लंबे समय तक रहने वाला छाला
- जीभ, मसूड़ों या गाल के अंदर सफेद या लाल धब्बे
- मुंह में गांठ या सूजन महसूस होना
- खाना निगलने में दर्द या परेशानी
- बोलने में बदलाव या आवाज भारी होना
- मुंह खोलने में दिक्कत होना
- बिना कारण दांत हिलना
- लगातार मुंह से खून आना
- कान में लगातार दर्द बने रहना
- अचानक वजन कम होना
निष्कर्ष
Dr. Vishnu Hari सलाह देते हैं कि जो लोग लंबे समय से तंबाकू, गुटखा, पान मसाला, बीड़ी या सिगरेट का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनमें मुंह के कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए ऐसे लोगों को रेगुलर चेकअप कराते रहना चाहिए। इसके अलावा, लोगों को अपने मुंह के हाइजीन का ध्यान रखना चाहिए और अगर किसी भी तरह का कोई भी लक्षण महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
FAQ
क्या तंबाकू या सिगरेट न पीने वाले लोगों को भी ओरल कैंसर हो सकता है?
हालांकि, 80% से 90% ओरल कैंसर के मामलों के पीछे तंबाकू ही मुख्य कारण है, लेकिन जो लोग तंबाकू नहीं छूते, उनमें खराब और नुकीले दांत जो लगातार गाल या जीभ को अंदर से छीलते रहते हैं, क्रोनिक इन्फ्लेमेशन पैदा करके कैंसर की वजह बन सकते हैं। इसके अलावा, ह्यूमन पैपिलोमा वायरस भी इसका एक बड़ा कारण है।डॉक्टर ओरल कैंसर की पुष्टि करने के लिए कौन से टेस्ट करते हैं?
अगर डॉक्टर को मुंह के अंदर कोई छाला या पैच दिखता है, तो वे सबसे पहले बायोप्सी टेस्ट करते हैं। इसमें छाले का एक बहुत छोटा सा टुकड़ा निकालकर लैब में जांच के लिए भेजा जाता है। बायोप्सी की रिपोर्ट ही तय करती है कि बीमारी कैंसर है या नहीं। इसके बाद कैंसर की स्टेज जानने के लिए चेहरे और गर्दन का सीटी स्कैन या एमआरआई किया जाता है।
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May 26, 2026 16:30 IST
Modified By : Aneesh Rawat May 26, 2026 16:30 IST
Modified By : Aneesh RawatMay 26, 2026 16:30 IST
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Reviewed By : Dr Vishnu HariMay 26, 2026 16:30 IST
Published By : Aneesh Rawat