Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr. Saurabh Singhal , Senior Consultant & Director - Centre for Liver- GI Diseases and Transplantation (CLDT)

लिवर की बीमारियों से बचाव के लिए हेपेटाइटिस A और B की वैक्सीन क्यों है जरूरी, डॉक्टर से जानें

जिन लोगों को लिवर से जुड़ी बीमारियां है, उन्हें खासतौर पर हेपेटाइटिस A और B वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए ताकि लिवर को गंभीर नुकसान से बचाया जा सके। हेपेटाइटिस A और B वैक्सीन कब लगवाना चाहिए और कितने डोज होते हैं? इसकी जानकारी डॉक्टर ने विस्तार से दी है।

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आजकल फैटी लिवर, लिवर सिरोसिस और लिवर से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अगर आंकड़ों की बात करें Journal of Hepatology के अनुसार, दुनियाभर में हर साल लिवर से जुड़ी बीमारियों के कारण करीब बीस लाख लोगों की मौत होती है। इस जर्नल में बताया गया कि दुनियाभर में होने वाली मौतों में से 4% मौतें अकेले लिवर की बीमारी की वजह से होती हैं। इसका मतलब है कि दुनिया भर में होने वाली हर 25 मौतों में से 1 मौत लिवर की खराबी से होती है। इसमें कुल मृत्यु में से करीब दो तिहाई मौतें पुरुषों की होती है।

जब बात लिवर की होती है, तो आमतौर पर लोग समझते हैं कि इस बीमारी का इलाज सिर्फ दवाओं और डाइट से हो सकता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ वैक्सीन भी लिवर को गंभीर नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इस बारे में हमने Dr. Saurabh Singhal, Senior Consultant & Director, Aakash Healthcare Super Speciality Hospital, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि जिन लोगों को पहले से लिवर की कोई बीमारी है, उनके लिए हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस B की वैक्सीन बहुत महत्वपूर्ण हो सकती है। ये वैक्सीन आगे होने वाले इंफेक्शन से बचाने में मदद करती है।

लिवर से पीड़ित मरीजों को इंफेक्शन का खतरा क्यों ज्यादा होता है?

Dr. Saurabh Singhal कहते हैं, “लिवर शरीर में फिल्टर का काम करता है और अगर लिवर में इंफेक्शन हो जाती है, तो इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। इससे हेपेटाइटिस में लिवर में सूजन आ जाती है और इसमें पांच तरह के हेपेटाइटिस होते हैं, जिन्हें A, B, C, D और E कहा जाता है। हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस B से बचाव के लिए वैक्सीन है, जबकि हेपेटाइटिस C के लिए फिलहाल कोई वैक्सीन नहीं है। दरअसल, लिवर की बीमारी में लिवर फंक्शन करना कम कर देता है, और ऐसे में अगर हेपेटाइटिस A या B इंफेक्शन हो जाए, तो स्थिति तेजी से गंभीर हो सकती है। इसलिए क्रोनिक लिवर डिजीज वाले मरीजों में समय रहते हेपेटाइटिस A और B के खिलाफ टीकाकरण की सलाह देती हैं।”

हेपेटाइटिस वैक्सीन किन लोगों को जरूर लगानी चाहिए?

Dr. Saurabh Singhal ने कहा कि हर इंसान को वैक्सीन की जरूरत नहीं होती, लेकिन जिन लोगों को लिवर से जुड़ी समस्याएं हैं या फिर ये दिक्कतें है, उन्हें हेपेटाइटिस वैक्सीन डॉक्टर की सलाह पर लगवाना चाहिए।

  1. नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) वाले मरीज
  2. लिवर सिरोसिस से पीड़ित लोग
  3. क्रोनिक लिवर डिजीज वाले मरीज
  4. शराब के कारण लिवर खराब होने वाले मरीज
  5. लिवर ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे मरीज
  6. लिवर ट्रांसप्लांट करा चुके मरीज

हेपेटाइटिस वैक्सीन शरीर को कैसे सुरक्षित रखता है?

Dr. Saurabh Singhal ने बताया कि जब वैक्सीन दिया जाता है, तो इम्यून सिस्टम वायरस की पहचान कर लेता है और शरीर में एंटीबॉडीज बन जाती है। अगर भविष्य में वायरस अटैक करता है, तो वैक्सीन से बने एंटीबॉडीज वायर को रोकने में मदद करते हैं। हेपेटाइटिस A वैक्सीन की आमतौर पर दो डोज दी जाती है और हेपेटाइटिस B वैक्सीन की तीन डोज लगाई जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हेपेटाइटिस B को वैक्सीन से बहुत ही प्रभावी तरीके से रोका जा सकता है। यह वैक्सीन वायरस के खिलाफ लगभग 100% सुरक्षा प्रदान करती है। हेपेटाइटिस B वैक्सीन बच्चे को जन्म के तुरंत बाद दिया जाता है और इसके बाद के हफ्तों में बूस्टर खुराकें दी जाती हैं।

vaccine for liver diseases

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क्या सभी लिवर के मरीजों को तुरंत वैक्सीन लगवाना चाहिए?

Dr. Saurabh Singhal कहते हैं, “ऐसा नहीं है, क्योंकि लिवर की बीमारी कई तरह की होती है और हर मरीज की मेडिकल कंडीशन अलग होती है, इसलिए हेपेटाइटिस A या B की वैक्सीन लगवाने का फैसला हमेशा डॉक्टर ही दे सकते हैं। कई मामलों में पहले मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, ब्लड टेस्ट और यह चेक किया जाता है कि शरीर में पहले से हेपेटाइटिस A या B के खिलाफ इम्युनिटी तो मौजूद नहीं है। इस जांच के आधार पर ही तय किया जाता है कि मरीज को वैक्सीन की जरूरत है या नहीं और अगर है, तो कौन-सी वैक्सीन और कितनी डोज दी जानी चाहिए।”

लिवर के किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करें?

Cleveland Clinic के अनुसार, लोगों को लिवर की बीमारियों के लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।

  1. स्किन या आंखों के सफेद हिस्से का पीला होना
  2. पेशाब या मल का रंग गहरा होना और मल का रंग मिट्टी जैसा होना
  3. भोजन पचाने में दिक्कत होना
  4. बिना कारण वजन कम होना
  5. सांस में बदबू आना
  6. स्किन में खुजली होना
  7. बहुत ज्यादा थकान महसूस होना
  8. मतली या उल्टी होना
  9. उलझन या भूलने जैसी स्थिति होना

लिवर की बीमारियों से बचाव के लिए क्या करें?

Dr. Saurabh Singhal ने कहा कि लिवर की बीमारियों से बचाव के लिए लोगों को कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  1. हेपेटाइटिस A से बचाव के लिए साफ पानी पिएं और बाहर का खुले में बनने वाले खाने से बचकर रहें।
  2. खाना खाने से पहले और शौच जाने के बाद हाथों को साबुन से साफ करें।
  3. हेपेटाइटिस B इंफेक्शन वाले खून से भी फैल सकता है। इसलिए कभी भी इस्तेमाल की हुई सुई, सिरिंज या रेजर साझा न करें।
  4. असुरक्षित सेक्शुअल रिलेशन बनाने से हेपेटाइटिस B का रिस्क हो सकता है।
  5. अगर लिवर पहले से कमजोर है, तो शराब पीने से नुकसान पहुंच सकता है।
  6. लिवर की बीमारी वाले मरीजों को समय-समय पर लिवर फंक्शन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और डॉक्टर द्वारा बताई गई चेकअप कराते रहना चाहिए।

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निष्कर्ष
Dr. Saurabh Singhal लोगों को सलाह देते हैं कि लिवर से जुड़ी बीमारियों और वैक्सीन को लेकर फैली गलतफहमियों से बचना चाहिए। कई लोग सोचते हैं कि वैक्सीन सिर्फ बच्चों के लिए ही है, लेकिन हेपेटाइटिस A और B वयस्कों को भी लगाया जाता है। इसलिए जिन लोगों को लिवर से जुड़ी बीमारियों का रिस्क है, उन्हें डॉक्टर से सलाह लेकर वैक्सीन लगवाना चाहिए।

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FAQ

  • क्या वयस्क भी ये दोनों वैक्सीन लगवा सकते हैं?

    जिन वयस्कों को बचपन में यह वैक्सीन नहीं लगी है, वे कभी भी डॉक्टर की सलाह पर इसे लगवा सकते हैं। इस वैक्सीन को खासतौर पर मेडिकल स्टाफ, बार-बार सफर करने वाले लोगों, लिवर की अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों और हाई-रिस्क ग्रुप वाले लोगों को जरूर लगवा लेनी चाहिए।
  • क्या इन दोनों बीमारियों का कोई परमानेंट इलाज उपलब्ध है?

    हेपेटाइटिस A का कोई खास इलाज नहीं है। यह बीमारी शरीर को आराम देने और सही डाइट से खुद ही ठीक हो जाती है। वहीं, हेपेटाइटिस B अगर क्रोनिक बन जाए, तो इसे दवाओं से सिर्फ कंट्रोल किया जा सकता है। इसे पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 17, 2026 20:35 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr. Saurabh Singhal

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