Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr Gopal Agrawal , Clinical Director – Paediatrics & Neonatology

बच्चे के कौन से वैक्सीन तय उम्र के बाद नहीं लग सकते? डॉक्टर से समझें पूरी बात

कई बार शिशु का वैक्सीन छूट जाता है, तो पेरेंट्स घबरा जाते हैं। हालांकि, कई वैक्सीन तो समय निकलने के बाद लगवाएं जा सकते हैं, लेकिन कुछ वैक्सीन दोबारा लगवाना मुश्किल हो जाता है। इस लेख में डॉक्टर ने ऐसे वैक्सीन के बारे में विस्तार से बताया है।

बच्चों का समय पर वैक्सीनेशन उन्हें कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है, लेकिन कई बार पेरेंट्स शिशु को वैक्सीनेशन समय पर नहीं लगवा पाते हैं। इसका कारण वैक्सीनेशन याद न रहना या फिर वैक्सीनेशन कार्ड का गुम हो जाना हो। ऐसे में पेरेंट्स का सवाल यही होता है कि क्या वैक्सीन दोबारा लगवाई जा सकती है या नहीं? इस बारे में हमने Dr. Gopal Agrawal, Paediatrics & Neonatology, Cloudnine Group of Hospitals, Gurugram से बात की। उन्होंने बताया कि हर वैक्सीन के लिए एक जैसा नियम नहीं होता। कुछ वैक्सीन सिर्फ एक बार लगाए जाते हैं, जबकि कुछ वैक्सीन की कई डोज निर्धारित होती हैं। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के दोबारा टीका लगवाने का फैसला नहीं करना चाहिए।

कौन से वैक्सीन दोबारा नहीं लगाए जा सकते?

Dr. Gopal Agrawal कहते हैं, “हर वैक्सीन का अपना अलग शेड्यूल होता है। कुछ वैक्सीन जिंदगी में सिर्फ एक बार दी जाती हैं, जबकि कुछ की कई डोज या बूस्टर लगते हैं। इसलिए अगर रिकॉर्ड न हो या फिर वैक्सीन लगवाया हो, तो मैं बच्चे की उम्र, पहले लगे टीकों की संभावना और राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के आधार पर ही आगे के वैक्सीन न प्लान करता हूं। वैक्सीनेशन शैड्यूल में अगर कुछ वैक्सीन छूट गए हैं, तो उसे दोबारा नहीं लगाया जा सकता।”
Delhi State Health Mission के अनुसार, BCG वैक्सीन जीवन में सिर्फ एक बार ही लगता है और अगर बच्चे की उम्र एक साल से ज्यादा हो गई और BCG नहीं लगी, तो राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) में इसे बाद में नहीं दिया जाता।

हेपेटाइटिस बी बर्थ डोज

भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, हेपेटाइटिस B का वैक्सीन हर नवजात को जन्म के तुरंत बाद या 24 घंटे के अंदर देना जरूरी होता है। हेपेटाइटिस B वैक्सीन बाईं जांघ के बाहरी हिस्से में लगाया जाता है और इसका रिकॉर्ड रखना बहुत जरूरी होता है। अगर शिशु NICU में है, तो डॉक्टर की सलाह पर ही वैक्सीन दिया जाता है। Delhi State Health Mission के अनुसार, हेपेटाइटिस-बी की बर्थ डोज का जन्म के समय नहीं लग पाता, तो इसे बर्थ डोज नहीं माना जाता है। हालांकि, बाद में रेगुलर डोज डॉक्टर शेड्यूल के अनुसार दी जाती हैं, लेकिन छूटी हुई बर्थ डोज का वही फायदा बाद में नहीं मिल सकता।

रोटावायरस वैक्सीन

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, भारत में बच्चों में गंभीर से मध्यम दस्त के लगभग 40% मामलों के लिए रोटावायरस जिम्मेदार होता है। इसलिए रोटावायरस के बचाव के लिए वैक्सीनेशन बहुत महत्वपूर्ण है। इसकी खुराक मुंह से दी जाती है, लेकिन अगर शिशु को पहली डोज एक साल से पहले नहीं दी, तो इसे दोबारा नहीं दिया जा सकता है। इसलिए अगर पहली एक साल से पहले मिल जाए, तो अगली खुराकें कम से कम चार हफ्ते के अंतर से दी जा सकती हैं। इसकी कोई बूस्टर खुराक नहीं दी जाती है।

vaccine not after due date

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पेंटावैलेंट वैक्सीन (Pentavalent Vaccine)

Delhi State Health Mission की इसी रिपोर्ट के अनुसार, अगर शिशु को पहले जन्मदिन से पहले पेंटावैलेंट वैक्सीन की कम से कम एक डोज मिल चुकी है, तो बाकी डोज पूरे किए जा सकते हैं, लेकिन अगर एक साल की उम्र के बाद पहली बार शिशु वैक्सीनेशन के लिए आता है, तो उसे पेंटावैलेंट वैक्सीन शुरू नहीं किया जा सकता है। इसकी जगह उम्र के अनुसार कैच-अप वैक्सीन शैड्यूल अपनाया जा सकता है।

Dr. Gopal Agrawal ने कहा, “कैच-अप वैक्सीनेशन उन बच्चों के लिए बनाया गया है जिनकी किसी भी वजह से एक या इससे ज्यादा वैक्सीन समय पर नहीं लग पाई है। इसमें शिशु की वर्तमान उम्र, पहले लग चुके टीकों और राष्ट्रीय टीकाकरण शेड्यूल को ध्यान में रखते हुए आगे का प्लान तैयार किया जाता है। अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की जरूरत नहीं पड़ती।”

क्या बिना डॉक्टर की सलाह वैक्सीनेशन दोबारा लगवाना सही है?

Dr. Gopal Agrawal ने बताया कि पेरेंट्स को बिना डॉक्टर की सलाह के दोबारा वैक्सीन नहीं लगवाना चाहिए। हालांकि, ज्यादातर वैक्सीन गलती से दोबारा लग जाने पर गंभीर नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें बिना जरूरत दोहराया जाए। अगर कोई भी वैक्सीन छूट गया है, तो डॉक्टर की सलाह लेकर उसे लगवाना चाहिए।

पेरेंट्स के लिए जरूरी बातें

Dr. Gopal Agrawal ने वैक्सीनेशन को लेकर पेरेंट्स को खास सलाह दी है, क्योंकि शिशु के वैक्सीनेशन को लेकर कुछ छोटी-छोटी सावधानियां भविष्य में बड़ी परेशानी से बचा सकती हैं।

  1. वैक्सीनेशन कार्ड हमेशा सुरक्षित रखें।
  2. कार्ड की फोटो या स्कैन कॉपी मोबाइल और क्लाउड स्टोरेज में सेव करें।
  3. हर टीके के बाद अगली डोज की तारीख कैलेंडर में नोट करें।
  4. डॉक्टर द्वारा बताए गए वैक्सीनेशन शेड्यूल का पालन करें।
  5. कोई डोज छूट जाए या रिकॉर्ड खो जाए तो खुद फैसला लेने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करें।
  6. घबराकर खुद ही वैक्सीन दोबारा न लगवाएं।
  7. डॉक्टर बच्चे की उम्र, पहले लगी डोज और राष्ट्रीय टीकाकरण शेड्यूल के अनुसार कैच-अप वैक्सीनेशन प्लान बनाते हैं।
  8. ज्यादातर वैक्सीन में पूरा शेड्यूल दोबारा शुरू नहीं किया जाता, बल्कि जहां डोज छूटी है, वहीं से आगे बढ़ा जाता है।

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निष्कर्ष
स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, शिशु को वैक्सीनेशन समय पर देना बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे दुनिया भर में बच्चों की जान बचाई जा सकती है। यही कारण है कि डॉक्टर वैक्सीन की डोज पूरी करने के साथ-साथ सही समय पर सही वैक्सीन लगवाने पर भी जोर देते हैं। बीसीजी जैसे कुछ वैक्सीन सिर्फ एक बार ही लगाए जाते हैं। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी वैक्सीन दोबारा न लगवाएं।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  •  यदि बच्चे का कोई टीका तय तारीख पर छूट जाए, तो क्या सारा टीकाकरण दोबारा शुरू करना पड़ता है?

    बिल्कुल नहीं। अगर किसी कारणवश वैक्सीन की कोई डोज लेट हो जाती है, तो वैक्सीनेशन को शुरू से दोहराने की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर छूटी हुई डोज से ही शेड्यूल को आगे बढ़ाते हैं।
  • पांच साल की उम्र पूरी होने के बाद बच्चों को कौन सा बूस्टर टीका लगता है?

    5 से 6 साल की उम्र के बीच बच्चों को DPT का दूसरा बूस्टर (DTP Booster-2) और OPV (पोलियो ड्राप्स) दिए जाते हैं। इसके बाद 10 से 12 साल की उम्र में Tdap/Td का टीका लगाया जाता है।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 27, 2026 17:20 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Gopal Agrawal

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