Sun Oct 18, 2026 | 03:31 AM IST

Medically Reviewed by Dr Gopal Agrawal , Clinical Director – Paediatrics & Neonatology

जन्म से 5 साल तक बच्चों के लिए कौन-कौन सी वैक्सीन जरूरी हैं? डॉक्टर से जानें पूरा वैक्सीनेशन चार्ट

शिशु के जन्म के साथ ही वैक्सीनेशन लगवाना बहुत जरूरी हो जाता है, क्योंकि जन्म के समय शिशु की इम्यूनिटी बहुत ज्यादा कम होती है। ऐसे में वैक्सीनेशन संक्रमणों से बचाव में मदद करते हैं। इस लेख में डॉक्टर ने जन्म से लेकर पांच साल तक के शिशुओं का पूरा वैक्सीनेशन चार्ट बताया है।
जन्म से 5 साल तक बच्चों के लिए कौन-कौन सी वैक्सीन जरूरी हैं? डॉक्टर से जानें पूरा वैक्सीनेशन चार्टजन्म से 5 साल तक बच्चों के लिए कौन-कौन सी वैक्सीन जरूरी हैं? डॉक्टर से जानें पूरा वैक्सीनेशन चार्ट

वैक्सीनेशन शिशु के जन्म के साथ ही शुरू हो जाते हैं, ताकि बच्चे को संक्रमण से बचाया जा सके। जन्म से लेकर पांच साल के बीच शिशुओं की इम्यूनिटी विकसित होती है। ऐसे में अगर समय पर वैक्सीनेशन भी लगवा दिए जाएं, तो बच्चे को पोलियो, डिप्थीरिया, काली खांसी, खसरा, निमोनिया और हेपेटाइटिस-बी जैसी कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद मिलती है। जन्म से लेकर पांच साल तक के शिशुओं को कौन से वैक्सीनेशन लगाए जा सकते हैं? यह जानने के लिए हमने Dr. Gopal Agrawal, Paediatrics & Neonatology, Cloudnine Group of Hospitals, Gurugram और Dr. Harshit Kumar, Paediatrics & Neonatology, Cloudnine Group of Hospitals, Jalandhar से बात की।

वैक्सीनेशन क्यों जरूरी है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, साल 2025 में दुनिया भर में 1.35 करोड़ शिशु ऐसे थे, जिन्हें कोई भी टीका नहीं लगा था। इसे जीरो डोज कहा जाता है। हालांकि, इसी साल डिप्थीरिया, टिटनेस और काली खांसी से बचाने वाली वैक्सीन की तीसरी डोज (DTP3) का कवरेज 85% था। इसके साथ ही खसरे की पहली डोज पाने वाले बच्चे 84% थे। WHO का मानना है कि बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए समय पर वैक्सीनेशन बहुत जरूरी है। हालांकि, Dr. Harshit Kumar कहते हैं कि अगर कोई डोज छूट जाए, तो पेरेंट्स घबराएं नहीं, बल्कि डॉक्टर की सलाह लेकर कैच-अप वैक्सीन लगवा लें।

जन्म से लेकर पांच साल तक के बच्चों के वैक्सीनेशन

नेशनल हेल्थ मिशन(NHM) के अनुसार, भारत में शिशुओं को जन्म से लेकर पांच साल तक की उम्र में ये वैक्सीन लगाना महत्वपूर्ण है। ये सभी वैक्सीन सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में आसानी से लगाए जा सकते हैं।

उम्र 

दिए जाने वाले टीके 

जन्म के समय

बेसिलस कैलमेट गुएरिन (BCG), ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV)-0 खुराक, हेपेटाइटिस B जन्म खुराक (Hepatitis B birth dose)

6 हफ्ते

OPV-1, पेंटावेलेंट-1 (Pentavalent-1), रोटावायरस वैक्सीन (RVV)-1, इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन की आंशिक खुराक (fIPV)-1, न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (PCV)-1*

10 हफ्ते 

OPV-2, पेंटावेलेंट-2, RVV-2

14 हफ्ते

OPV-3, पेंटावेलेंट-3, fIPV-2, RVV-3, PCV-2*

9 से 12 महीने 

खसरा और रुबेला (MR)-1, जेई (JE)-1**, PCV-बूस्टर (PCV-Booster)*

16 से 24 महीने

MR-2, JE-2**, डिप्थीरिया, परटुसिस और टिटनेस (DPT)-बूस्टर-1, OPV बूस्टर

5 से 6 साल 

DPT-बूस्टर-2

* PCV केवल चुनिंदा राज्यों/जिलों में- बिहार, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश (चुनिंदा जिले) और राज्य की पहल के रूप में हरियाणा में।
JE केवल स्थानिक (Endemic) जिलों में दिए जाते हैं।
*** अगर पिछले 3 सालों के अंदर पहले से ही टीकाकरण हुआ हो, तो एक खुराक।
birth to five year vaccinationbirth to five year vaccination

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जन्म से लेकर 9 महीने तक वैक्सीन को लेकर डॉक्टर की सलाह

Dr. Harshit Kumar ने कहा, “पेरेंट्स को ध्यान रखना चाहिए कि जन्म के तुरंत बाद तीन महत्वपूर्ण वैक्सीन देना जरूरी है। इसमें टीबी जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए BCG, पोलियो से सुरक्षा के लिए ओरल पोलियो वैक्सीन और लिवर से जुड़ी बीमारियों व हेपेटाइटिस B से बचाव के लिए हेपेटाइटिस B की बर्थ डोज दी जाती है। इसके बाद करीब डेढ़ महीने बाद डिप्थीरिया, टिटनेस, काली खांसी, पोलियो, मेनिन्जाइटिस, निमोनिया और गंभीर डायरिया जैसी बीमारियों से सुरक्षा के लिए DTP/DTaP, IPV (इंजेक्शन वाली पोलियो वैक्सीन), Hib, हेपेटाइटिस B, रोटावायरस और न्यूमोकोकल (PCV) वैक्सीन दी जाती है।”

Dr. Gopal Aggarwal कहते हैं, “इसके बाद 10वें हफ्ते में ज्यादातर वैक्सीन की दूसरी डोज दी जाती है, ताकि शरीर में इम्यूनिटी मजबूत हो सके। इसके बाद 14वें हफ्ते में तीसरी डोज के जरिए इम्यूनिटी को पहले के मुकाबले और बेहतर किया जाता है। इसके बाद 6 से 9 महीने की उम्र के बीच डॉक्टर इन्फ्लुएंजा (Flu) वैक्सीन शुरू करने की सलाह दे सकते हैं। हर साल लगने वाली फ्लू वैक्सीन मौसमी वायरल संक्रमण से बचाने में मदद करती है।”

9 से लेकर 18 महीने तक लगाए जाने वाले वैक्सीन

Dr. Harshit Kumar के अनुसार, “खसरा, मम्प्स और रुबेला जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए MR या MMR वैक्सीन और OPV वैक्सीन दिए जाते हैं और फिर 9 से 12 महीने में डॉक्टर की सलाह पर कुछ अतिरिक्त वैक्सीन जैसे टायफॉयड कंजुगेट वैक्सीन (TCV) और हेपेटाइटिस-ए वैक्सीन दिए जा सकते हैं। इसके बाद एक साल से लेकर डेढ़ साल के बीच बच्चों को महत्वपूर्ण बूस्टर और नई वैक्सीन लगाई जाती हैं। इसमें MMR की अगली डोज, चिकनपॉक्स और PCV बूस्टर शामिल है। आमतौर पर 15 से 18 महीने के बच्चे को बूस्टर डोज जैसे DTP Booster, IPV Booster और Hib Booster दिया जाता है, ताकि इम्यूनिटी मजबूत रहे।”

18 महीने से 5 साल तक के वैक्सीन

Dr. Harshit Kumar ने बताया कि कुछ बच्चों को डॉक्टर की सलाह पर 18 महीने में हेपेटाइटिस-ए की दूसरी डोज दी जा सकती है। इसके बाद चार से पांच साल की उम्र में स्कूल शुरू होने से पहले DTP Booster, OPV/IPV Booster, MMR Booster, Varicella की दूसरी डोज दी जाती है। इससे बच्चों को संक्रमण से बचाव में मदद मिलती है।

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निष्कर्ष
Dr. Harshit Kumar पेरेंट्स को सलाह देते हैं कि बच्चों को सभी वैक्सीन समय पर जरूर लगवाएं। कई पेरेंट्स को लगता है कि एक साथ कई वैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए और इसी वजह से बच्चों का वैक्सीन में देरी कर देते हैं। पेरेंट्स को किसी भी तरह की कन्फ्यूजन हो, तो अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। अगर किसी शिशु का कोई वैक्सीन छूट जाए, तो कैच-अप वैक्सीन लग सकता है, लेकिन समय पर डॉक्टर के पास जाएं। किसी भी वैक्सीन के डोज को अधूरा न छोड़ें, क्योंकि इससे बच्चे को भविष्य में बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

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FAQ

  • क्या पेनलेस वैक्सीन में दर्द बिल्कुल नहीं होता और क्या यह सामान्य वैक्सीन से बेहतर है?

    सूई चुभने का दर्द दोनों में होता है। अंतर सिर्फ इतना है कि पेनलेस (DTaP) वैक्सीन लगने के बाद बच्चे को तेज बुखार और सूजन आने की संभावना काफी कम होती है। हालांकि, लंबे समय की इम्यूनिटी के मामले में दोनों समान रूप से असरदार मानी जाती हैं।
  • क्या विटामिन A की खुराक भी टीकों के साथ देनी जरूरी है?

    9 महीने की उम्र से शुरू करके 5 साल की उम्र तक हर 6 महीने में विटामिन A की कुल 9 खुराक दी जाती हैं। यह बच्चों की आंखों की रोशनी, त्वचा और संक्रमण से लड़ने की क्षमता के लिए बेहद जरूरी है।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 28, 2026 14:15 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Gopal Agrawal