Mon Oct 12, 2026 | 09:19 AM IST

Medically Reviewed by Dr Gopal Agrawal , Clinical Director – Paediatrics & Neonatology

बच्चों के लिए सिर्फ पोलियो ड्रॉप्स नहीं, पोलियो वैक्सीन भी है जरूरी, डॉक्टर से जानें कारण

पोलियो की बीमारी से बचाव के लिए पोलियो वैक्सीन और ड्रॉप्स दोनों ही दिए जाते हैं, लेकिन लोगों को पोलियो ड्रॉप्स के बारे में ही ज्यादा पता है। इस लेख में डॉक्टर ने पोलियो वैक्सीन और ड्रॉप्स के अंतर को समझाया है और इसे देने के कारणों के बारे में भी विस्तार से बताया है।
बच्चों के लिए सिर्फ पोलियो ड्रॉप्स नहीं, पोलियो वैक्सीन भी है जरूरी, डॉक्टर से जानें कारणबच्चों के लिए सिर्फ पोलियो ड्रॉप्स नहीं, पोलियो वैक्सीन भी है जरूरी, डॉक्टर से जानें कारण

भारत मार्च 2014 में आधिकारिक तौर पर पोलियो मुक्त हो चुका है, लेकिन दुनिया भर के दूसरे देशों में पोलियो के मामले सामने आते हैं। इसलिए बच्चों के वैक्सीनेशन में अभी भी पोलियो वैक्सीन और ड्रॉप्स दी जाती है। पोलियो की बीमारी में बच्चे की नसों पर अटैक होता है, जिस कारण बच्चे लकवे का शिकार हो जाते हैं। कई पेरेंट्स का सवाल होता है कि जब बच्चे को पल्स पोलियो अभियान के दौरान पोलियो की बूंदें (OPV) पिलाई जाती हैं, तो फिर इंजेक्शन वाली पोलियो वैक्सीन (IPV) क्यों लगाई जाती है? क्या दोनों में से कोई एक ही काफी नहीं है? इस बारे में जानने के लिए हमने Dr. Rajat Grover, Paediatrician and Neonatologist और Dr. Gopal Agrawal, Paediatrics & Neonatology, Cloudnine Group of Hospitals, Delhi & Gurugram से बात की।

ओरल पोलियो वैक्सीन और IPV में क्या अंतर है?

Dr. Rajat Grover ने बताया कि ओरल पोलियो (OPV) और वैक्सीन से दिए जाने वाले पोलियो (IPV) में अंतर को समझना जरूरी है, क्योंकि पेरेंट्स कई बार इसमें कन्फ्यूज हो जाते हैं।

 

ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV)

इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन (IPV)

देने का तरीका

मुंह से ड्रॉप्स के जरिए देना 

इंजेक्शन के जरिए देना

वायरस का रूप

इसमें पोलियो वायरस का कमजोर रूप होना 

इसमें पोलियो वायरस का निष्क्रिय/मृत रूप होना 

सुरक्षा का तरीका

आंतों में वायरस को बढ़ने से रोकना

शरीर के अंदर मजबूत एंटीबॉडी बनाना 

मुख्य लाभ

लोगों में इंफेक्शन फैलने का खतरा कम होना 

लकवे जैसी गंभीर जटिलताओं से बेहतर व्यक्तिगत सुरक्षा देती है।

अभियान

भारत के पल्स पोलियो अभियान और रेगुलर टीकाकरण में शामिल 

राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल

ओरल पोलियो कैसे काम करता है?

Dr. Rajat Grover कहते हैं, “ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) को मुंह में ड्रॉप्स दी जाती है। इसमें पोलियो वायरस का कमजोर रूप होता है, जो इम्यून सिस्टम को वायरस से लड़ने के लिए तैयार करता है। ओरल वैक्सीन की सबसे बड़ी खासयित है कि यह आंतों में वायरस को बढ़ने से रोकने में मदद करती है। इससे न सिर्फ बच्चे की सुरक्षा होती है, बल्कि वायरस के दूसरे लोगों तक फैलने की संभावना भी कम हो जाती है। इसलिए पल्स पोलियो अभियान में OPV का इस्तेमाल किया जाता है।”

वैक्सीन से दी जाने वाली IPV क्या है?

Dr. Gopal Agrawal कहते हैं, “IPV यानी Inactivated Polio Vaccine इंजेक्शन के जरिए दी जाती है। इसमें वायरस का निष्क्रिय रूप होता है, इसलिए इससे पोलियो होने का कोई खतरा नहीं रहता। IPV शरीर के अंदर मजबूत एंटीबॉडी बनाती है, जो बच्चे को पोलियो वायरस से गंभीर बीमारी और लकवे से बचाने में मदद करती है। यही कारण है कि रेगुलर वैक्सीनेशन IPV को भी शामिल किया गया है।”

polio vaccine and drop differencepolio vaccine and drop difference

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क्या बच्चे को पोलियो ओरल और वैक्सीन दोनों देना जरूरी है?

Dr. Rajat Grover ने बताया कि पेरेंट्स को पोलियो के दोनों ही रूप में देना चाहिए। OPV और IPV दोनों अलग-अलग तरीके से काम करती है, इसलिए सिर्फ एक पर ही निर्भर न रहें। OPV जहां वायरस के समुदाय में फैलने की संभावना कम करती है, वहीं IPV बच्चे को मजबूत इम्यूनिटी देती है। दोनों मिलकर पोलियो से बेहतर और लंबे समय तक बचाव प्रदान करती हैं। कई बार पेरेंट्स OPV में पोलियो ड्रॉप्स देना ही काफी मानते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। बच्चे के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में जब भी पोलियो ड्रॉप या वैक्सीन का निधार्रित डोज समय हो, उसे जरूर दें।

अगर पोलियो वैक्सीन की कोई डोज छूट जाए तो क्या करें?

Dr. Rajat Grover ने कहा, “अगर किसी कारण से पोलियो वैक्सीन की कोई डोज समय पर नहीं लग पाई है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। डॉक्टर बच्चे की उम्र और पहले लगी डोज के आधार पर कैच-अप वैक्सीनेशन की सलाह देते हैं।

निष्कर्ष

पोलियो एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज नहीं है, लेकिन समय पर वैक्सीनेशन से इससे पूरी तरह बचाव संभव है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि OPV और IPV दोनों की अपनी अलग भूमिका है। सिर्फ पोलियो की बूंदें या केवल इंजेक्शन पर निर्भर रहना सही नहीं है। डॉक्टर ने जो भी वैक्सीनेशन का शैड्यूल दिया है, उसी के अनुसार बच्चे को पोलियो का वैक्सीन दिलाएं।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  •  क्या IPV का टीका लगने के बाद पोलियो ड्रॉप्स (OPV) पिलाना बंद कर देना चाहिए?

    जब भी पल्स पोलियो अभियान या रूटीन इम्यूनाइजेशन में ओरल पोलियो की खुराक दी जाए, तो बच्चे को दो बूंद जरूर पिलानी चाहिए। दोनों अलग-अलग तरीके से काम करती हैं।
  • क्या IPV इंजेक्शन से बच्चे को तेज दर्द या बुखार होता है?

    IPV बहुत ही सुरक्षित वैक्सीन है। इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का लालपन या दर्द हो सकता है, लेकिन इससे तेज बुखार या कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं होता।  

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 31, 2026 20:39 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Gopal Agrawal