Thu Oct 15, 2026 | 01:50 AM IST

Medically Reviewed by Dr Vineeta Singh Tandon , Sr. Consultant – Internal Medicine

वैक्सीन बूस्टर डोज क्यों है जरूरी? डॉक्टर से समझें किन लोगों को लगवाने की जरूरत

आमतौर पर वैक्सीन पूरे होने के बाद भी एक ऐसा वैक्सीन दिया जाता है, जो शरीर के इम्यून सिस्टम को और ज्यादा मजबूत कर देता है। इसे वैक्सीन बूस्टर डोज कहा जाता है। इस लेख में डॉक्टर ने लोगों के वैक्सीन बूस्टर डोज की जरूरत को विस्तार से समझाया है।
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कोविड की बीमारी से बचाव के लिए वैक्सीन के बाद बूस्टर डोज लगाने की सलाह दी गई थी और लोगों को लगता था कि वैक्सीन बूस्टर डोज सिर्फ कोविड में ही लगा है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई बीमारियों जैसे टिटनेस, डिप्थीरिया, काली खांसी और फ्लू जैसी बीमारियों से बचाव के लिए भी समय-समय पर डॉक्टर वैक्सीन बूस्टर डोज लगाने की सलाह देते हैं। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि अगर एक बार वैक्सीन लग चुकी है, तो दोबारा इसकी जरूरत क्यों पड़ती है? इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए हमने Dr. Vineeta Singh Tandon, Senior Consultant, Internal Medicine, ISIC Hospital, Delhi से बात की।

बूस्टर डोज की जरूरत क्यों होती है?

Dr. Vineeta Singh कहती हैं, “बूस्टर डोज वैक्सीन की अतिरिक्त खुराक होती है, जिसे शुरुआती वैक्सीनेशन पूरा होने के कुछ समय बाद लगाया जाता है। यह वैक्सीन सुनिश्चित करती है कि व्यक्ति का इम्यून सिस्टम दोबारा मजबूत हो सके। दरअसल, जब पहली बार वैक्सीन लगती है, तो शरीर वायरस या बैक्टीरिया को पहचानना सीखकर उस बीमारी के खिलाफ एंटीबॉडी व मेमोरी सेल्स बना लेता है। समय बीतने के साथ इन एंटीबॉडीज की संख्या कम हो सकती है, क्योंकि हर वैक्सीन जीवनभर सुरक्षा नहीं दे सकती। ऐसे में शरीर की सुरक्षा को दोबारा मजबूत करने के लिए बूस्टर डोज दी जाती है। यह इम्यून सिस्टम को फिर से एक्टिव करती है, ताकि भविष्य में इंफेक्शन से बचाव हो सके।”

क्या कहती है स्टडी?

Science Direct में प्रकाशित जर्नल के अनुसार, जो लोग लंबे समय तक सफर करते हैं, जूलोजिस्ट या पशु चिकित्सक जैसे हाई रिस्क ग्रुप के लोग लगातार वायरस या बैक्टीरिया के संपर्क में रहने के कारण बूस्टर खुराक की जरूरत हो सकती है। बूस्टर डोज शरीर में न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी का लेवल 0.50 IU/mL या उससे ज्यादा बनाए रखना है। इस जर्नल में बताया गया है कि जो लोग लगातार हाई रिस्क में रहते हैं, उन्हें छह महीने में और थोड़ा कम रिस्क वाले लोगों को एक से दो साल के अंतराल में ब्लड का चेकअप कराना चाहिए। अगर ब्लड में एंटीबॉडी का स्तर कम हो रहा है, तो बूस्टर डोज दिया जाना चाहिए।

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वैक्सीन बूस्टर डोज की जरूरत किन लोगों को ज्यादा होती है?

Dr. Vineeta Singh के मुताबिक, “यह समझना भी जरूरी है कि सभी वैक्सीनों के साथ बूस्टर डोज की जरूरत नहीं होती, लेकिन कुछ लोगों को बूस्टर डोज लेना चाहिए। किस व्यक्ति को कौन-सी वैक्सीन और कब लगनी चाहिए, इसका फैसला डॉक्टर व्यक्ति की उम्र, मेडिकल कंडीशन और रिस्क फैक्टर्स को देखकर लेते हैं। कुछ लोगों को बूस्टर डोज की सलाह दी जा सकती है।”

  1. 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्ग
  2. डायबिटीज, हार्ट की बीमारियों, किडनी, फेफड़ों या कैंसर जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीज
  3. कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग, जिन लोगों का ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुआ है
  4. जो लोग लंबे समय से दवाएं ले रहे हैं।
  5. डॉक्टर, नर्स और मेडिकल सेक्टर से जुड़े लोग
  6. प्रेग्नेंट महिलाएं
  7. बच्चे या टीनएजर्स

वैक्सीन बूस्टर डोज लगाने से पहले किन बातों का ध्यान रखा चाहिए?

Dr. Vineeta Singh ने कहा, “कई बार देखा गया है कि कुछ वायरस समय के साथ बदल जाते हैं और इस वजह से इम्यून सिस्टम उस बीमारी के खिलाफ नहीं लड़ पाता या एंटीबॉडीज भी असरदार नहीं रहते। ऐसे मामलों में कुछ वैक्सीन के अपडेटेड बूस्टर तैयार किए जाते हैं, जो नए स्ट्रेन के खिलाफ बेहतर सुरक्षा देने में मदद करते हैं। अगर हालिया उदाहरण की बात करें, तो ऐसा ही कुछ कोविड में भी हुआ था। कोविड वायरस के बदलते स्वरूप के खिलाफ एंटीबॉडीज बनाने के लिए लोगों को वैक्सीन बूस्टर डोज लेने की सलाह दी गई थी। जब भी वैक्सीन बूस्टर डोज लगवाने जाए, इन बातों का खास ध्यान रखें।”

  1. बूस्टर डोज हमेशा डॉक्टर या सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही लगवानी चाहिए।
  2. सोशल मीडिया या किसी की सलाह पर वैक्सीन बूस्टर डोज नहीं लगवाना चाहिए।
  3. अगर पहले किसी वैक्सीन से गंभीर एलर्जी हुई हो, तेज बुखार हो या कोई गंभीर बीमारी चल रही हो, तो बूस्टर डोज से पहले डॉक्टर को जरूर बताए।
  4. पहले से जो भी वैक्सीन या बूस्टर डोज लगे हैं, तो उसकी जानकारी डॉक्टर को जरूर दें।

क्या बूस्टर डोज सुरक्षित होते हैं?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनिया भर के वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही बूस्टर डोज लगाने की सलाह दी जाती है। विभिन्न रिसर्च में साबित हो चुका है कि बूस्टर डोज बीमारी के खिलाफ सुरक्षा के स्तर को कई गुना बढ़ा देते हैं। जिन बीमारियों के महामारी के रूप में फैलने का रिस्क होता है, उनमें शरीर को लगातार सुरक्षित रखना जरूरी होता है और वैक्सीन बूस्टर डोज इसमें मदद कर सकता है।

Dr. Vineeta Singh ने बताया कि ज्यादातर लोगों के लिए बूस्टर डोज सुरक्षित होती है। हालांकि, इसे लगवाने के बाद इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, हल्का बुखार, थकान या शरीर दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो आमतौर पर एक या दो दिन में अपने आप ठीक हो जाती हैं। अगर सांस लेने में तकलीफ या कोई गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

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निष्कर्ष
Dr. Vineeta Singh लोगों को सलाह देती हैं कि अगर डॉक्टर ने बूस्टर डोज लगाने की सलाह दी है, तो उसे जरूर लगवाना चाहिए, क्योंकि बूस्टर डोज कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षा दे सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति को हर वैक्सीन का बूस्टर जरूरी नहीं होता। ऐसे में उम्र, मेडिकल कंडीशन और बीमारियों के रिस्क को देखते हुए ही वैक्सीन बूस्टर डोज की सलाह दी जाती है।

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FAQ

  • अगर किसी को हाल ही में संक्रमण हुआ हो, तो उसे बूस्टर डोज कब लेनी चाहिए?

    अगर कोई हाल ही में वायरस से संक्रमित हुआ है, तो ठीक होने के तुरंत बाद बूस्टर डोज न लें। इंफेक्शन के बाद शरीर में प्राकृतिक रूप से एंटीबॉडीज बन जाती हैं। इंफेक्शन ठीक होने के कम से कम तीन महीने बाद ही बूस्टर डोज लगवानी चाहिए।
  • क्या बूस्टर डोज लगवाने के बाद भी कोई संक्रमित हो सकता है?

    इसे ब्रेकथ्रू इंफेक्शन कहा जाता है। कोई भी वैक्सीन शत प्रतिशत इंफेक्शन नहीं रोक सकती, लेकिन बूस्टर डोज लेने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि संक्रमण होने पर लक्षण बहुत ही मामूली होते हैं और जान का खतरा बिल्कुल नहीं होता।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 20, 2026 18:37 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Jul 20, 2026 18:37 IST

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