Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Gopal Agrawal , Clinical Director – Paediatrics & Neonatology

बच्चे की MMR वैक्सीन छूट गई है? डॉक्टर से जानें कब और कैसे लगवाएं अगली डोज

आमतौर पर पेरेंट्स समय पर ही शिशु को वैक्सीन लगवा देते हैं, लेकिन कई बार वैक्सीन डोज छूट भी सकती है। ऐसे में पेरेंट्स घबरा जाते हैं, लेकिन MMR वैक्सीन को तय समय सीमा पर न लग पाए, तो क्या करना चाहिए? इस बारे में डॉक्टर ने विस्तार से बताया है।

MMR वैक्सीन के जरिए शिशु को खसरा, मम्प्स और रुबेला जैसी गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है। अगर MMR का डोज न मिले, तो शिशु को निमोनिया, ब्रेन में सूजन, अंधापन, बहरापना और मृत्यु जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए डॉक्टर MMR का वैक्सीन समय पर लगवाने की सलाह देते हैं, लेकिन कई बार किसी भी वजह से MMR का वैक्सीन तय समय पर नहीं लग पाती, तो पेरेंट्स का बड़ा सवाल यह होता है कि क्या पूरा वैक्सीनेशन दोबारा शुरू करना पड़ेगा और क्या देर से वैक्सीन लगवाने पर इसका फायदा बच्चे को मिलेगा? इन सवालों के जवाब के लिए हमने Dr. Rajat Grover, Paediatrician and Neonatologist और Dr. Gopal Agrawal, Paediatrics & Neonatology, Cloudnine Group of Hospitals, Delhi & Gurugram से बात की। Dr. Rajat Grover ने बताया कि MMR वैक्सीन की डोज छूट भी जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेकर कैच-अप वैक्सीनेशन कराया जा सकता है।

MMR वैक्सीन क्यों जरूरी है?

Dr. Rajat Grover ने बताया कि MMR वैक्सीन तीन अलग-अलग टीकों को मिलाकर एक ही शॉट में दिया जाता है।

खसरा - खसरा सिर्फ स्किन पर दाने आने वाली बीमारी नहीं है। कई बच्चों में इससे निमोनिया, गंभीर डायरिया, दिमाग में सूजन और दुर्लभ मामलों में जानलेवा जटिलताएं भी हो सकती हैं।

मम्प्स - मम्प्स के कारण लार ग्रंथियों में सूजन, तेज बुखार और दर्द हो सकता है। कुछ मामलों में यह दिमाग, पैनक्रियाज और रिप्रोडेक्टिव अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।

रुबेला - बच्चों में यह इंफेक्शन अक्सर हल्का होता है, लेकिन अगर प्रेग्नेंट महिला को यह संक्रमण हो जाए, तो गर्भ में पल रहे शिशु में जन्मजात गंभीर बीमारी होने का खतरा बढ़ सकता है। इस वजह से MMR वैक्सीन शिशुओं को समय पर लगाना चाहिए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, खसरे के कारण हर साल देश में करीब 49,000 बच्चों की मौत हो जाती है, जबकि रुबेला की वजह से बच्चों में कभी न ठीक होने वाली जन्मजात बीमारी बन सकता है। इसलिए भारत में 9 महीने से 15 साल तक के बच्चों को वैक्सीन लगवाया जाता है। अगर किसी भी बच्चे की वैक्सीन छूट गई है, तो इसे सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं और चुनिंदा निजी केंद्रों पर जाकर MR वैक्सीन लगवाई जा सकती है।

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MMR की डोज छूटने पर पूरा कोर्स दोबारा शुरू करना पड़ता है?

Dr. Gopal Aggarwal कहते हैं, “अगर किसी वजह से MMR की एक या इससे ज्यादा डोज समय पर नहीं लग पाई, तो पूरी वैक्सीनेशन प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की जरूरत नहीं होती। ऐसे केस में मैं बच्चे की वर्तमान उम्र, पहले लगी डोज और राष्ट्रीय या IAP टीकाकरण शेड्यूल को देखते हुए कैच-अप वैक्सीनेशन प्लान करता हूं। इसलिए मैं लोगों को सलाह देता हूं कि अगर वैक्सीन छूट गया है, तो खुद से फैसला न लें, बल्कि डॉक्टर से सलाह लेकर ही वैक्सीन का डोज लें।”

MMR वैक्सीन कब लगवाएं?

Dr. Rajat Grover ने कहा, “अगर वैक्सीन तय समय से कुछ देर बाद भी लगती है, तब भी यह बच्चे की इम्यूनिटी सिस्टम को सक्रिय करके इंफेक्शन से बचाव में मदद करती है। हालांकि, जितनी ज्यादा देरी होगी, उतने लंबे समय तक बच्चे को संक्रमण का खतरा रह सकता है। इसिलए डोज छूटने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। आमतौर पर कैच-अप वैक्सीनेशन में शिशु को MMR वैक्सीन दिया जा सकता है। ”

क्या MMR वैक्सीन लगवाने पर क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं?

Cleveland Clinic के अनुसार, वैसे तो MMR वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है, लेकिन कुछ मामलों में बच्चों को ये लक्षण महसूस हो सकते हैं। सामान्य लक्षण तो एक या दो दिन में खुद-ब-खुद चले जाते हैं, लेकिन गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
सामान्य साइड इफेक्ट्स -

  1. इंजेक्शन लगने वाली जगह पर दर्द, खरोंच, लाली और सूजन होना
  2. हल्का रैश
  3. बुखार
  4. जोड़ों में अकड़न
  5. लिम्फ नोड्स सूजन
  6. दस्त
  7. थकान महसूस होना

दुर्लभ लेकिन गंभीर साइड इफेक्ट्स:

  1. गंभीर एलर्जिक रिएक्शन (Anaphylaxis)
  2. दौरे या झटके महसूस होना
  3. लगातार तेज बुखार रहना
  4. असामान्य ब्लीडिंग होना

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निष्कर्ष
Dr. Rajat Grover पेरेंट्स को सलाह देते हैं कि बच्चों का वैक्सीनेशन शैड्यूल को ध्यान में रखें और समय पर ही वैक्सीन लगवाएं। MMR वैक्सीन का डोज छूटने पर दोबारा कैच-अप वैक्सीन में लगाया जा सकता है, लेकिन इसमें देर न करें। MMR वैक्सीन बच्चों को तीन गंभीर वायरल बीमारियों से सुरक्षा देने में मदद करता है।

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FAQ

  • MMR की पहली और दूसरी डोज के बीच कम से कम कितना गैप होना चाहिए?

    अगर पहली डोज काफी लेट हो गई है, तो ध्यान रखें कि MMR की पहली और दूसरी डोज के बीच कम से कम 4 हफ्तों (28 दिन) का अंतर होना जरूरी है। इससे कम समय में दूसरी डोज नहीं दी जाती।
  • क्या MMR वैक्सीन को अन्य टीकों के साथ एक ही दिन दिया जा सकता है?

    अगर बच्चे के अन्य टीके (जैसे DPT बूस्टर या इंफ्लूएंजा) भी छूटे हुए हैं, तो MMR को उनके साथ ही शरीर के अलग हिस्से जैसे दूसरे हाथ या जांघ पर सुरक्षित रूप से लगाया जा सकता है।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 28, 2026 15:47 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Gopal Agrawal

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