Fri Oct 9, 2026 | 07:46 PM IST

Medically Reviewed by Dr Abhishek Chopra , Pediatrician and Neonatologist

जन्म के तुरंत बाद शिशु को कौन-कौन से वैक्सीन लगते हैं? डॉक्टर से जानें किन बीमारियों से होता है बचाव

शिशु के जन्म के तुरंत बाद ही वैक्सीनेशन शुरू हो जाते हैं, लेकिन कई बार पेरेंट्स को पता ही नहीं होता कि जन्म के तुरंत बाद कौन से वैक्सीनेशन लगवाना जरूरी होता है। इसलिए इस लेख में डॉक्टर ने जन्म के तुरंत बाद के तीन वैक्सीनेशन के बारे में विस्तार से बताया है।
जन्म के तुरंत बाद शिशु को कौन-कौन से वैक्सीन लगते हैं? डॉक्टर से जानें किन बीमारियों से होता है बचावजन्म के तुरंत बाद शिशु को कौन-कौन से वैक्सीन लगते हैं? डॉक्टर से जानें किन बीमारियों से होता है बचाव

जैसे ही शिशु का जन्म होता है, तो उसे बीमारियों और इंफेक्शन से बचाव के लिए वैक्सीनेशन लगाया जाता है, क्योंकि जन्म के समय शिशु की इम्यूनिटी पूरी तरह से विकसित नहीं होती है। इस वजह से डॉक्टर जन्म के तुरंत बाद कुछ जरूरी वैक्सीन लगाने की सलाह देते हैं। जन्म के समय जो वैक्सीन लगाने महत्वपूर्ण है, उनके बारे में जानने के लिए हमने Dr. Abhishek Chopra, Consultant and Dr. Rajat Grover, Senior Consultant, Pediatrician and Neonatologist, Cloudnine Group of Hospitals, New Delhi से बात की।

जन्म के समय कौन-कौन से टीके लगाए जाते हैं?

Dr. Rajat Grover कहते हैं, “जन्म के समय लगने वाले वैक्सीन शिशु की पहली सुरक्षा होती है। इसलिए इन्हें तय समय पर ही लगवाना चाहिए। भारत सरकार के यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) के अनुसार जन्म के समय मुख्य रूप से तीन वैक्सीन लगाई जाती हैं।” 

BCG वैक्सीन

BCG वैक्सीन बच्चे को ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) के गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद मिलती है। खासकर यह टीबी मेनिन्जाइटिस और मिलियरी टीबी जैसी जानलेवा कंडीशन का खतरा कम करती है। Dr. Abhishek Chopra ने बताया कि आमतौर पर यह टीका जन्म के तुरंत बाद या जीवन के पहले कुछ हफ्ते के अंदर ही लगाया जाता है। कई बच्चों के हाथ पर इस वैक्सीन के बाद छोटा-सा निशान बन जाता है। इससे डरने या घबराने की जरूरत नहीं होती।

ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV-0)

Dr. Rajat Grover ने कहा, “इसे पोलियो की जीरो डोज कहा जाता है। यह शिशु को पोलियो वायरस के खिलाफ शुरुआती सुरक्षा देती है और आगे लगने वाली पोलियो वैक्सीन के लिए शरीर की इम्यूनिटी सिस्टम को तैयार करती है। हालांकि अब भारत पोलियो मुक्त घोषित हो चुका है, लेकिन दुनिया के कुछ हिस्सों में अभी भी पोलियो वायरस मौजूद है। ऐसे में जन्म के समय OPV देना बच्चे की सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जाता है।”

vaccination after birthvaccination after birth

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हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन

Dr. Rajat Grover ने बताया कि हेपेटाइटिस-बी एक वायरल संक्रमण है, जो लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। अगर मां इस वायरस से संक्रमित है, तो जन्म के दौरान यह इंफेक्शन शिशु तक भी पहुंच सकता है। इसी वजह से डॉक्टर इस वैक्सीन को जन्म के 24 घंटे के भीतर लगाने की सलाह देते हैं। समय पर लगाया गया यह वैक्सीन बच्चे को भविष्य में हेपेटाइटिस-बी इंफेक्शन और उससे जुड़ी गंभीरताओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जन्म के तुरंत बाद वैक्सीनेशन क्यों जरूरी होता है?

Dr. Rajat Grover ने कहा, “जन्म के समय शिशु का इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता। इसलिए शरीर इंफेक्शन प्रभावी ढंग से लड़ नहीं पाता। इसके साथ वैक्सीन शरीर को सेफ्टी के साथ यह भी सिखाता है कि किसी खास वायरस या बैक्टीरिया के शरीर में प्रवेश करने पर उससे कैसे मुकाबला करना है। यही कारण है कि शुरुआती वैक्सीनेशन शिशु को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करता है। समय पर वैक्सीन लगवाने से शिशु के अस्पताल में भर्ती होने और बीमारी के गंभीर रूप लेने की संभावना भी कम हो जाती है।”

क्या जन्म के समय लगे टीके ही काफी हैं?

Dr. Abhishek Chopra के अनुसार, जन्म के समय लगाए गए वैक्सीन टीकाकरण की शुरुआत होते हैं। इसके बाद 6, 10 और 14 हफ्ते, फिर 9 महीने, 12 महीने और आगे भी राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार कई जरूरी वैक्सीन लगाई जाती हैं। इसलिए पूरे वैक्सीनेशन शेड्यूल के अनुसार ही वैक्सीनेशन लगवाना चाहिए।

क्या वैक्सीन लगने के बाद बुखार आना सामान्य है?

Dr. Rajat Grover कहते हैं, “कई बार वैक्सीनेशन के बाद बच्चे को हल्का बुखार, इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द या सूजन, चिड़चिड़ापन और सामान्य से ज्यादा नींद आना दिखाई दे सकता है। कई बार पेरेंट्स यह देखकर घबरा जाते हैं, लेकिन ये लक्षण आमतौर पर 24 से 48 घंटे के अंदर अपने आप ठीक हो जाते हैं। हालांकि, अगर शिशु को तेज बुखार, लगातार रोने या सांस लेने में परेशानी हो, तो डॉक्टर को तुरंत दिखाएं।”

पेरेंट्स को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

Dr. Rajat Grover ने बताया कि पेरेंट्स को वैक्सीनेशन शैड्यूल का ध्यान रखना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी परेशानी से बचा जा सके।

  1. बच्चे का वैक्सीनेशन कार्ड संभालकर रखें।
  2. अगली वैक्सीन की तारीख पहले से नोट कर लें।
  3. किसी भी वैक्सीनेशन डोज में देरी न करें।
  4. अगर कोई डोज छूट जाए, तो डॉक्टर से मिलकर कैच-अप वैक्सीनेशन की बात करें।
  5. वैक्सीन से जुड़ी किसी भी जानकारी के बारे सिर्फ डॉक्टर से ही लें। सोशल मीडिया या इंटरनेट से ली जानकारी के आधार पर वैक्सीनेशन को न टालें।

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निष्कर्ष
Dr. Rajat Grover ने बताया कि शिशु के जन्म के समय BCG, ओरल पोलियो (OPV-0) और हेपेटाइटिस-बी के वैक्सीन जरूर लगवाने चाहिए। ये वैक्सीन शिशुओं को गंभीर और जानलेवा बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए पेरेंट्स को जन्म के समय के वैक्सीन के बारे में डॉक्टर से जानकारी लेनी चाहिए।

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FAQ

  • क्या इन टीकों का बच्चे पर कोई साइड इफेक्ट होता है?

    ये टीके पूरी तरह सुरक्षित हैं। हल्का बुखार आना, चिड़चिड़ापन या जांघ पर सुई वाली जगह हल्का दर्द या सूजन होना सामान्य है। यह संकेत है कि बच्चे का शरीर इम्युनिटी बना रहा है। दर्द या बुखार होने पर डॉक्टर की सलाह से पेरासिटामोल ड्रॉप्स दी जा सकती हैं।
  • क्या जन्म के समय ही विटामिन K का इंजेक्शन भी लगाया जाता है?

    हालांकि, यह कोई वैक्सीन नहीं है, लेकिन जन्म के तुरंत बाद सभी नवजात शिशुओं को विटामिन K का एक इंजेक्शन दिया जाता है। यह बच्चे में गंभीर इंटरनल ब्लीडिंग को रोकने में मदद करता है।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 23, 2026 16:25 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Abhishek Chopra