जैसे ही शिशु का जन्म होता है, तो उसे बीमारियों और इंफेक्शन से बचाव के लिए वैक्सीनेशन लगाया जाता है, क्योंकि जन्म के समय शिशु की इम्यूनिटी पूरी तरह से विकसित नहीं होती है। इस वजह से डॉक्टर जन्म के तुरंत बाद कुछ जरूरी वैक्सीन लगाने की सलाह देते हैं। जन्म के समय जो वैक्सीन लगाने महत्वपूर्ण है, उनके बारे में जानने के लिए हमने Dr. Abhishek Chopra, Consultant and Dr. Rajat Grover, Senior Consultant, Pediatrician and Neonatologist, Cloudnine Group of Hospitals, New Delhi से बात की।
जन्म के समय कौन-कौन से टीके लगाए जाते हैं?
Dr. Rajat Grover कहते हैं, “जन्म के समय लगने वाले वैक्सीन शिशु की पहली सुरक्षा होती है। इसलिए इन्हें तय समय पर ही लगवाना चाहिए। भारत सरकार के यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) के अनुसार जन्म के समय मुख्य रूप से तीन वैक्सीन लगाई जाती हैं।”
BCG वैक्सीन
BCG वैक्सीन बच्चे को ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) के गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद मिलती है। खासकर यह टीबी मेनिन्जाइटिस और मिलियरी टीबी जैसी जानलेवा कंडीशन का खतरा कम करती है। Dr. Abhishek Chopra ने बताया कि आमतौर पर यह टीका जन्म के तुरंत बाद या जीवन के पहले कुछ हफ्ते के अंदर ही लगाया जाता है। कई बच्चों के हाथ पर इस वैक्सीन के बाद छोटा-सा निशान बन जाता है। इससे डरने या घबराने की जरूरत नहीं होती।
ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV-0)
Dr. Rajat Grover ने कहा, “इसे पोलियो की जीरो डोज कहा जाता है। यह शिशु को पोलियो वायरस के खिलाफ शुरुआती सुरक्षा देती है और आगे लगने वाली पोलियो वैक्सीन के लिए शरीर की इम्यूनिटी सिस्टम को तैयार करती है। हालांकि अब भारत पोलियो मुक्त घोषित हो चुका है, लेकिन दुनिया के कुछ हिस्सों में अभी भी पोलियो वायरस मौजूद है। ऐसे में जन्म के समय OPV देना बच्चे की सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जाता है।”

यह भी पढ़ें- NICU में भर्ती शिशुओं का वैक्सीनेशन कब शुरू होता है? डॉक्टर से जानें जरूरी बातें
हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन
Dr. Rajat Grover ने बताया कि हेपेटाइटिस-बी एक वायरल संक्रमण है, जो लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। अगर मां इस वायरस से संक्रमित है, तो जन्म के दौरान यह इंफेक्शन शिशु तक भी पहुंच सकता है। इसी वजह से डॉक्टर इस वैक्सीन को जन्म के 24 घंटे के भीतर लगाने की सलाह देते हैं। समय पर लगाया गया यह वैक्सीन बच्चे को भविष्य में हेपेटाइटिस-बी इंफेक्शन और उससे जुड़ी गंभीरताओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
जन्म के तुरंत बाद वैक्सीनेशन क्यों जरूरी होता है?
Dr. Rajat Grover ने कहा, “जन्म के समय शिशु का इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता। इसलिए शरीर इंफेक्शन प्रभावी ढंग से लड़ नहीं पाता। इसके साथ वैक्सीन शरीर को सेफ्टी के साथ यह भी सिखाता है कि किसी खास वायरस या बैक्टीरिया के शरीर में प्रवेश करने पर उससे कैसे मुकाबला करना है। यही कारण है कि शुरुआती वैक्सीनेशन शिशु को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करता है। समय पर वैक्सीन लगवाने से शिशु के अस्पताल में भर्ती होने और बीमारी के गंभीर रूप लेने की संभावना भी कम हो जाती है।”
क्या जन्म के समय लगे टीके ही काफी हैं?
Dr. Abhishek Chopra के अनुसार, जन्म के समय लगाए गए वैक्सीन टीकाकरण की शुरुआत होते हैं। इसके बाद 6, 10 और 14 हफ्ते, फिर 9 महीने, 12 महीने और आगे भी राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार कई जरूरी वैक्सीन लगाई जाती हैं। इसलिए पूरे वैक्सीनेशन शेड्यूल के अनुसार ही वैक्सीनेशन लगवाना चाहिए।
क्या वैक्सीन लगने के बाद बुखार आना सामान्य है?
Dr. Rajat Grover कहते हैं, “कई बार वैक्सीनेशन के बाद बच्चे को हल्का बुखार, इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द या सूजन, चिड़चिड़ापन और सामान्य से ज्यादा नींद आना दिखाई दे सकता है। कई बार पेरेंट्स यह देखकर घबरा जाते हैं, लेकिन ये लक्षण आमतौर पर 24 से 48 घंटे के अंदर अपने आप ठीक हो जाते हैं। हालांकि, अगर शिशु को तेज बुखार, लगातार रोने या सांस लेने में परेशानी हो, तो डॉक्टर को तुरंत दिखाएं।”
पेरेंट्स को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
Dr. Rajat Grover ने बताया कि पेरेंट्स को वैक्सीनेशन शैड्यूल का ध्यान रखना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी परेशानी से बचा जा सके।
- बच्चे का वैक्सीनेशन कार्ड संभालकर रखें।
- अगली वैक्सीन की तारीख पहले से नोट कर लें।
- किसी भी वैक्सीनेशन डोज में देरी न करें।
- अगर कोई डोज छूट जाए, तो डॉक्टर से मिलकर कैच-अप वैक्सीनेशन की बात करें।
- वैक्सीन से जुड़ी किसी भी जानकारी के बारे सिर्फ डॉक्टर से ही लें। सोशल मीडिया या इंटरनेट से ली जानकारी के आधार पर वैक्सीनेशन को न टालें।
यह भी पढ़ें- टीनएजर्स के लिए कौन से वैक्सीन लगवाना है जरूरी, जानें डॉक्टर से
निष्कर्ष
Dr. Rajat Grover ने बताया कि शिशु के जन्म के समय BCG, ओरल पोलियो (OPV-0) और हेपेटाइटिस-बी के वैक्सीन जरूर लगवाने चाहिए। ये वैक्सीन शिशुओं को गंभीर और जानलेवा बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए पेरेंट्स को जन्म के समय के वैक्सीन के बारे में डॉक्टर से जानकारी लेनी चाहिए।
All Image Credit: Magnific
FAQ
क्या इन टीकों का बच्चे पर कोई साइड इफेक्ट होता है?
ये टीके पूरी तरह सुरक्षित हैं। हल्का बुखार आना, चिड़चिड़ापन या जांघ पर सुई वाली जगह हल्का दर्द या सूजन होना सामान्य है। यह संकेत है कि बच्चे का शरीर इम्युनिटी बना रहा है। दर्द या बुखार होने पर डॉक्टर की सलाह से पेरासिटामोल ड्रॉप्स दी जा सकती हैं।क्या जन्म के समय ही विटामिन K का इंजेक्शन भी लगाया जाता है?
हालांकि, यह कोई वैक्सीन नहीं है, लेकिन जन्म के तुरंत बाद सभी नवजात शिशुओं को विटामिन K का एक इंजेक्शन दिया जाता है। यह बच्चे में गंभीर इंटरनल ब्लीडिंग को रोकने में मदद करता है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jul 23, 2026 16:25 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Abhishek Chopra