अस्थमा, एलर्जी और सीओपीडी के मरीज अपनी स्थिति को संभालने के लिए लोग इनहेलर का इस्तेमाल करते हैं। इनहेलर अस्थमा और सीओपीडी जैसी सांस से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए एक बेहतरीन गैजेट होता है। यह मरीज की दवा को सीधे उनके फेफड़ों तक पहुंचाता है, जिससे सांस फूलने या खांसी जैसी समस्याओं से तुरंत राहत मिलती है। हालांकि, इनहेलर के फायदे तभी मिलते हैं जब इसका सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए। कई लोगों को इनहेलर का इस्तेमाल करने के नाम पर ही डर लगने लगता है कि कहीं उन्हें इसकी आदत न पड़ जाए। इसलिए, आइए इस लेख में Dr. Deepak Prajapat, Pulmonologist, Metro Heart Institute, Noida से जानते हैं कि इनहेलर का इस्तेमाल करने के फायदे, नुकसान और उपयोग करने का सही तरीका क्या है?
इनहेलर क्या होता है?
इनहेलर एक खास डिवाइस है, जिसके जरिए अस्थमा के मरीजों के लिए दवा सीधे फेफड़ों तक पहुंचाई जाती है। इनहेलर से सीधे दवा प्रभावित हिस्से तक जाती है, इसलिए कम मात्रा में दवा देकर भी मरीज को बेहतर नतीजे मिलते हैं और पूरे शरीर पर दवा का असर कम पड़ता है। इसी कारण दुनिया भर की मेडिकल संस्थाएं अस्थमा और कई सांस से जुड़ी बीमारियों के लिए इनहेलर को फर्स्ट लाइन थेरेपी मानती हैं।
इनहेलर के प्रमुख फायदे
साल 2023 में Journal of Taibah University Medical Sciences के इस रिसर्च के अनुसार, इनहेलर का फायदा अस्थमा और सीओपीडी जैसी सांस से जुड़ी बीमारियों का इलाज करना है। जब एक मरीज सही तकनीक के साथ इनहेलर का इस्तेमाल करता है तो यह उनके ट्रीटमेंट को बेहतर बनाने में मदद करता है, जिससे बीमारी को मैनेज करना ज्यादा प्रभावी हो जाता है। इनहेलर का इस्तेमाल करना कई तरह से फायदेमंद होता है, जैसे-
- इनहेलर का इस्तेमाल करने से दवा सीधे मरीज के प्रभावित श्वसन नलिकाओं तक पहुंचती है, जिससे समस्या से तेजी से राहत मिलती है।
- इनहेलर का इस्तेमाल करने से दवा सीधे फेफड़ों तक जाती है, इसलिए इसकी मात्रा बहुत कम होती है और शरीर के अन्य अंगों पर दवा का प्रभाव कम पड़ सकता है।
- इनहेलर का इस्तेमाल करने से सांस लेने में आसानी होती है, क्योंकि यह वायुमार्ग को खोलने में मदद करता है, जिससे सांस लेना आसान हो जाता है।
- नियमित रूप से कंट्रोलर इनहेलर लेने से अस्थमा के गंभीर अटैक, अस्पताल में भर्ती होने की संभावना और एमरजेंसी ट्रीटमेंट की जरूरत कम हो सकती है।
- सही ट्रीटमेंट लेने के साथ इनहेलर का इस्तेमाल करने से मरीज नॉर्मल लाइफ, एक्सरसाइज और रोजमर्रा की गतिविधियां आसानी से कर सकते हैं।
इसे भी पढ़ें: बार-बार सांस फूलना अस्थमा है या सिर्फ एंग्जायटी? डॉक्टर से जानें कैसे करें पहचान
क्या इनहेलर से किसी तरह का कोई नुकसान भी है?
Dr. Deepak Prajapat बताते हैं कि हर दवा की तरह इनहेलर के भी कुछ साइड इफेक्ट्स हैं, लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल करने पर इससे नुकसान बहुत कम होते हैं। स्टेरॉयड इनहेलर का इस्तेमाल करने के बाद अगर कुल्ला न किया जाए तो मुंह में फंगल इंफेक्शन हो सकता है। इसके अलावा, गले में खराश, आवाज बैठना, कुछ रिलीवर इनहेलर से हल्का हाथ कांपना या दिल की धड़कन तेज महसूस होने जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। ये साइड इफेक्ट्स आमतौर पर अस्थायी होते हैं और डॉक्टर के दिए सुझावों का पालन करने से आसानी से कंट्रोल किए जा सकते हैं।
इनहेलर का सही तरीका क्या है?
Dr. Deepak Prajapat का कहना है कि कई मरीज दवा तो सही लेते हैं, लेकिन इनहेलर का इस्तेमाल गलत तरीके से करते हैं, जिससे उन्हें इसका सही फायदा नहीं मिल पाता है। इनहेलर का सही तरह से इस्तेमाल करने के लिए हमेशा डॉक्टर द्वारा बताए गए इनहेलर का इस्तेमाल करें। इनहेलर का उपयोग करने से पहले इसका इस्तेमाल करने की तकनीक अच्छी तरह सीखें। ज्यादा मात्रा से में दवा खुद से लेने से बचें, समय-समय पर डॉक्टर से अपने इनहेलर लेने के तरीके को चेक करवाएं। इसके साथ ही डॉक्टर की बिना सलाह के इनहेलर का इस्तेमाल अचानक लेना बंद न करें।
क्या इनहेलर की आदत पड़ जाती है?
Dr. Deepak Prajapat बताते हैं कि इनहेलर का लगातार इस्तेमाल करने के बाद भी इसकी आदत नहीं पड़ती है। यह एक बड़ा मिथक है, क्योंकि इनहेलर में ऐसी कोई दवा नहीं होती है जो नशे या लत का कारण बने। कई मरीज यह महसूस करते हैं कि इनहेलर लेने से उन्हें अस्थमा से तुरंत आराम मिलता है। इसलिए, उन्हें लगता है कि अब वे इसके आदी हो गए हैं। जबकि ऐसा नहीं है, उनकी बीमारी कंट्रोल रखने के लिए दवा की जरूरत होती है न कि शरीर को इनहेलर की लत लग गई होती है। अस्थमा या सीओपीडी के मरीज को डॉक्टर की सलाह के अनुसार इनहेलर लेना पड़ सकता है।

किन मरीजों को इनहेलर की आवश्यकता पड़ती है?
Dr. Deepak Prajapat के अनुसार, इनहेलर कई तरह की सांस से जुड़ी बीमारियों में इस्तेमाल होता है, जैसे-
- अस्थमा
- सीओपीडी
- बार-बार घरघराहट होना
- एलर्जी के कारण लगातार खांसी होना
- एलर्जी से होने वाली सांस की तकलीफ
- क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस
- फेफड़ों की बीमारियों में
किन गलतियों से बचना चाहिए?
Dr. Deepak Prajapat के मुताबिक, इनहेलर का इस्तेमाल गलत तरीके से करने पर यह अपना असर कम कर देता है। इसलिए, आप इन गलतियों को करने से बचें-
- अपने आप इनहेलर शुरू या बंद करने से बचें।
- किसी दूसरे व्यक्ति को इनहेलर का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
- सिर्फ सांस फूलने पर ही दवा न लें, बल्कि नियमित रूप से तय समय पर कंट्रोलर इनहेलर का इस्तेमाल करना जरूरी है।
- खुद से यह सोचकर दवा लेना बंद कर देना कि आप अब ठीक हैं।
- डॉक्टर से फॉलो-अप लेना छोड़ देना।
इसे भी पढ़ें: अस्थमा के मरीज भूलकर भी न खाएं तला-भुना, हो सकते हैं ये 4 बड़े नुकसान
कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए?
Dr. Deepak Prajapat का कहना है कि इनहेलर का इस्तेमाल आपके लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इन स्थितियों में डॉक्टर से मिलना जरूरी है-
- इनहेलर का इस्तेमाल करने के बाद भी सांस फूलने की समस्या होना।
- रिलीवर इनहेलर की जरूरत बार-बार पड़ रही हो।
- रात में सांस की समस्या होने पर बार-बार नींद टूट रही हो।
- सांस की समस्या होने पर सीने में लगातार जकड़न बनी रहे।
- खांसी की समस्या कई हफ्तों तक बनी रहे।
निष्कर्ष
Dr. Deepak Prajapat का कहना है कि मरीजों को इनहेलर का इस्तेमाल करने से डरने की नहीं, बल्कि इसके सही तरह से इस्तेमाल करना सीखने की जरूरत है। आपको किसी भी तरह से इनहेलर का इस्तेमाल करने पर इसकी लत नहीं लगती है। यह एक सुरक्षित और प्रभावी ट्रीटमेंट है, जो अस्थमा, एलर्जी और अन्य सांस से जुड़ी बीमारियों को कंट्रोल रखने में अहम भूमिका निभाता है।
Image Credit: Freepik
FAQ
इनहेलर कब लेना चाहिए?
इनहेलर मुख्य रूप से जब सांस लेने में मुश्किल हो तब और बीमारी को कंट्रोल में रखने के लिए लेना चाहिए।इनहेलर दिन में कितनी बार लेना चाहिए?
इनहेलर दिन में कितनी बार लेना है, यह बात पूरी तरह आपकी दवा के टाइप और बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करती है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jul 19, 2026 15:25 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Deepak Prajapat