बच्चे के जन्म के बाद पेरेंट्स वैक्सीनेशन को लेकर अलर्ट रहते हैं, क्योंकि वैक्सीनेशन से शिशु को संक्रमण से बचाव मिलता है। इसलिए पेरेंट्स शिशु को सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम के तहत उम्र के हिसाब से महत्वपूर्ण वैक्सीन लगवाते हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या बच्चे को सिर्फ सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल वैक्सीन ही लगवाना पर्याप्त है? इसका जवाब जानने के लिए हमने Dr. Abhishek Chopra, Consultant and Dr. Rajat Grover, Senior Consultant, Pediatrician and Neonatologist, Cloudnine Group of Hospitals, New Delhi से बात की।
उन्होंने बताया कि इसका जवाब सिर्फ हां या न में नहीं दिया जा सकता। राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अलावा कुछ वैक्सीन बच्चे की उम्र, हेल्थ कंडीशन और बीमारी के रिस्क को देखते हुए लगवाने की सलाह दी जा सकती है।
सरकारी वैक्सीन के अलावा अन्य वैक्सीन देना क्यों जरूरी?
Dr. Abhishek Chopra कहते हैं, “सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम के जरिए बच्चों को कई महत्वपूर्ण संक्रामक बीमारियों से सुरक्षा देना है। इसके अलावा, कुछ ऐसी वैक्सीन भी हैं, जो किसी बीमारी के रिस्क, आसपास के वातावरण, लाइफस्टाइल और ट्रेवल हिस्ट्री को देखते हुए लगवाने की सलाह दी जा सकती है। आमतौर पर पेरेंट्स के मन में सवाल होता है कि ऑप्शनल वैक्सीन क्यों लगवाएं, तो मेरा जवाब होता है कि कुछ बच्चों की मेडिकल कंडीशन को देखते हुए लगवाने की सलाह दी जा सकती है। जैसे टीनएजर्स को HPV वैक्सीन की सलाह दी जाती है, ताकि HPV से जुड़े इंफेक्शन से बच्चे को सुरक्षा मिल सके।”
किन बच्चों को अन्य वैक्सीन दिए जा सकते हैं?
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) के अनुसार, जिन बच्चों को जन्म से HIV, क्रोनिक हार्ट, फेफड़ों, हेमेटोलॉजिकल, किडनी और लिवर से जुड़ी बीमारियों का रिस्क है। इसके अलावा, जिन्हें डायबीटिज, कैंसर या सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूड के रिसाव का खतरा है, उन्हें कुछ वैक्सीन लगवाने की सलाह दी जा सकती है।
other vaccinations
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कई बार किसी बीमारी का प्रकोप बढ़ जाता है, बच्चे का दूसरे देशों में ट्रेवल है, घर में पालतू जानवर है या कुत्तों द्वारा काटे जाने का खतरा बहुत ज्यादा है, तो ऐसे कई रिस्क फैक्टर्स को देखते हुए ये वैक्सीन लगवाने की सलाह दी जा सकती हैं।
- इन्फ्लूएंजा वैक्सीन
- मेनिंगोकोकल वैक्सीन
- जापानी एन्सेफेलाइटिस वैक्सीन
- हैजा वैक्सीन
- रेबीज वैक्सीन
- येलो फीवर वैक्सीन
- न्यूमोकोकल पॉलीसैकेराइड वैक्सीन 23
बच्चे को एक साथ कई वैक्सीन लगना
Dr. Abhishek Chopra ने कहा, “कई बार पेरेंट्स को यह देखकर चिंता होने लगती है कि बच्चे को एक साथ कई वैक्सीन देने से नुकसान होगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता। हम ब्चचे की उम्र, वैक्सीनेशन हिस्ट्री और शैड्यूल को देखते हुए डोज और समय तय करते हैं। इसलिए अगर किसी वैक्सीन की एक से ज्यादा डोज की जरूरत है, तो डॉक्टर उसके बीच का सही अंतर भी बताते हैं। कई बार पेरेंट्स इंटरनेट या दूसरे लोगों का वैक्सीन शैड्यूल देखकर कंफ्यूज हो जाते हैं। इसलिए मैं हमेशा सलाह देता हूं कि खुद से वैक्सीन का शैड्यूल तय न करें, बल्कि डॉक्टर से सलाह लें और उनसे सवाल पूछें।”
वैक्सीनेशन को लेकर पेरेंट्स के क्या सवाल हो सकते हैं?
Dr. Abhishek Chopra के अनुसार, वैक्सीनेशन के दौरान माता-पिता के लिए सबसे आसान तरीका है कि वे डॉक्टर से सीधे अपने बच्चे की जरूरत के बारे में पूछें। इसमें कुछ सवाल ये हो सकते हैं।
- मेरे बच्चे की उम्र और हेल्थ के अनुसार कौन-से ऑप्शनल वैक्सीन लगवाने की सलाह दी जा सकती है?
- कौन-सी वैक्सीन किस बीमारी से बचाती है?
- फैमिली में बीमारी से जुड़ी कोई हिस्ट्री है, तो उसके बारे में बात करें।
- किस उम्र में कौन-सा वैक्सीन लगवाना जरूरी है?
- अगली डोज कब देनी है?
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निष्कर्ष
Dr. Abhishek Chopra कहते हैं कि अगर डॉक्टर ने किसी ऑप्शनल वैक्सीन लगवाने की सलाह देते हैं, तो डॉक्टर से इसकी जरूरत और कारण जानने के बाद वैक्सीन जरूर लगवाएं। Indian Academy of Pediatrics (IAP) भी बच्चों के टीकाकरण को लेकर अलग इम्युनाइजेशन गाइडेंस प्रकाशित करता है। इसमें राष्ट्रीय टीकाकरण प्रोग्राम के अलावा कुछ ऑप्शनल वैक्सीन की सिफारिश की है। इसका मतलब है कि बच्चों को उनकी उम्र और मेडिकल कंडीशन को देखते हुए वैक्सीन की जरूरत को समझना चाहिए।
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FAQ
पेनलेस और पेनफुल वैक्सीन में क्या अंतर होता है?
पेनलेस वैक्सीन में बैक्टीरिया का केवल एक हिस्सा इस्तेमाल होता है, जिससे बच्चे को बुखार या दर्द कम होता है। वहीं, पेनफुल सरकारी चार्ट में दी जाती है, जिससे थोड़ा बुखार और दर्द होता है लेकिन दोनों की सुरक्षा क्षमता बराबर होती है।क्या बच्चों को हैजा से बचाने के लिए भी कोई वैक्सीन आती है?
हां, बच्चों के लिए हैजा की ओरल वैक्सीन उपलब्ध है। यह विशेष रूप से मानसून के दौरान गंदे पानी और संक्रमण वाले क्षेत्रों में रहने वाले एक साल से बड़े बच्चों को डॉक्टरों की सलाह पर दी जाती है।
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Aug 13, 2026 18:48 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Abhishek Chopra
