आमतौर पर लोग मानते हैं कि वैक्सीनेशन सिर्फ बच्चों का ही होता है, जबकि इसकी जरूरत हर उम्र में हो सकती है। दरअसल, उम्र बढ़ने के साथ शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी कम होने लगती है, ऐसे में कई बार इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। इस वजह से कई बार डॉक्टर लोगों को वैक्सीनेशन की सलाह भी देते हैं। ऐसे में लोग जानना चाहते हैं कि 30 की उम्र पार करने के बाद कौन से वैक्सीनेशन लगवाए जा सकते हैं? इस बारे में जानने के लिए हमने Dr. Vineeta Singh Tandon, Senior Consultant, Internal Medicine, ISIC Hospital, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि 30 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को अपनी लाइफस्टाइल, मेडिकल हिस्ट्री, पहले लग चुके टीकों और किसी पुरानी बीमारी को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए कि उसे कौन-सी वैक्सीन की जरूरत है।
30 की उम्र के बाद वैक्सीन क्यों जरूरी है?
Dr. Vineeta Singh Tandon कहती हैं, “बचपन में लगने वाली कई वैक्सीन लंबे समय तक सुरक्षा देती हैं, लेकिन कुछ टीकों का असर समय के साथ कम हो सकता है। इसलिए कुछ मामलों में बूस्टर डोज की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा, आजकल की खराब लाइफस्टाइल, अनहेल्दी डाइट, स्ट्रेस, नींद की कमी, प्रदूषण और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या मोटापे के मामले काफी ज्यादा बढ़ गए हैं। इससे गंभीर बीमारियों का रिस्क बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इसलिए ऐसे में सही समय पर वैक्सीन लगवाना गंभीर बीमारियों से बचाव का आसान और प्रभावी तरीका हो सकता है।”
30 साल की उम्र के कौन से वैक्सीन लगवाने चाहिए?
Dr. Vineeta Singh Tandon ने 30 साल की उम्र के बाद लोगों को ये वैक्सीन लगाने की सलाह दी है।
1. फ्लू वैक्सीन
Indian Journal of Nephrology के अनुसार, मौसम में बदलाव के साथ खासतौर पर अक्टूबर से नवंबर के महीने में हर साल वैक्सीन लगवाना चाहिए, क्योंकि वायरस का रूप बदलता रहता है। जिन लोगों को हार्ट की बीमारियां, फेफड़ों की बीमारियां, डायबिटीज, किडनी, लिवर और प्रेग्नेंट महिलाओं को फ्लू वैक्सीन लगवाना चाहिए।
Dr. Vineeta Singh Tandon ने बताया कि हर साल फ्लू के मामले बढ़ जाते हैं और इसमें गर्भवती महिलाओं और पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों में फ्लू गंभीर रूप ले सकता है। जो अस्थमा, डायबिटीज, हार्ट डिजीज, किडनी से जुड़ी बीमारी या कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को हर साल फ्लू वैक्सीन लगवाने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
2. Tdap या टिटनेस बूस्टर
Dr. Vineeta Singh Tandon का कहना है, “अक्सर लोग सोचते हैं कि टिटनेस का वैक्सीन सिर्फ तभी लगाया जाता है, जब जंग लगी कील या जगह से चोट लगती है, लेकिन किसी गहरे घाव या जख्म से भी इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बचपन में लगने वाले टीकों के बाद समय-समय पर टिटनेस बूस्टर की जरूरत पड़ सकती है। Tdap वैक्सीन टिटनेस के साथ-साथ डिप्थीरिया और काली खांसी से बचाती है। यह खासतौर पर प्रेग्नेंट महिला के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस वैक्सीन से मां और नवजात दोनों की सुरक्षा होती है।”

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3. हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हेपेटाइटिस लिवर में वायरस या बहुत ज्यादा शराब पीने के कारण होने वाली सूजन है। हेपेटाइटिस पांच तरह की बीमारी है, जिसमें हेपेटाइटिस B और C ज्यादा लंबे समय तक शरीर में बने रहकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकते हैं। अगर यह बीमारी लंबे समय तक रहे, तो लिवर सिरोसिस से लेकर लिवर कैंसर तक की समस्या कर सकती है। दनिया भर के 187 देशों के आंकड़ों के अनुसार, क्रोनिक हेपेटाइटिस B और C के कारण साल 2022 में 13 लाख लोगों की मृत्यु हुई थी। इस बीमारी की गंभीरता इस बात से समझ आती है कि दुनिया भर में हर दिन करीब 6 हजार लोग नए वायरल हेपेटाइटिस से संक्रमित होते हैं।
Dr. Vineeta Singh Tandon ने कहा, “इन आंकड़ों को देखते हुए हेपेटाइटिस के वायरल से बचाव का रास्ता वैक्सीनेशन है। जो लोग बहुत ज्यादा शराब पीते हैं या फिर लिवर से जुड़ी बीमारी की हिस्ट्री है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर हेपेटाइटिस B वैक्सीन जरूर लेना चाहिए।
4. HPV वैक्सीन
National Cancer Institute के मुताबिक, HPV (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव में मदद करता है। वैसे तो HPV वैक्सीन 11 से 12 साल की उम्र में लगाने की सलाह दी जाती है, लेकिन 26 साल की उम्र तक कैच-अप वैक्सीन लगाया जा सकता है, जिन्हें बचपन में यह वैक्सीन नहीं लगा था या अधूरा रह गया था। हालांकि, FDA ने इस वैक्सीन को 45 साल तक की उम्र के लोगों को लगाने की मंजूरी दी है, लेकिन डॉक्टर की सलाह पर इस वैक्सीन को लिया जा सकता है।
Dr. Vineeta Singh Tandon भी इस बात से इत्तेफाक रखती है कि यह वैक्सीन कम उम्र में ज्यादा असरदार होता है, लेकिन 30 की उम्र के लोगों को डॉक्टर की सलाह पर इस वैक्सीन को लेना चाहिए, क्योंकि इससे सर्वाइकल कैंसर से रोकथाम में मदद मिल सकती है।
5. अन्य वैक्सीन
Dr. Vineeta Singh Tandon कहती हैं, “हर व्यक्ति की उम्र, हेल्थ कंडीशन और ट्रेवल को देखते हुए ही वैक्सीन की सलाह दी जाती है। इसमें न्यूमोकोकल वैक्सीन, शिंगल्स वैक्सीन, हेपेटाइटिस-ए वैक्सीन, MMR (मीजल्स, मम्प्स, रूबेला) और चिकनपॉक्स वैक्सीन शामिल है। किसी भी वैक्सीन को लगवाने से पहले डॉक्टर की सलाह बहुत जरूरी है।”
बीमारियों से बचाव के लिए सभी को वैक्सीन लगवाना चाहिए?
Dr. Vineeta Singh Tandon का कहना है, “हर व्यक्ति के लिए वैक्सीनेशन प्लान अलग होता है। यह कई बातों पर निर्भर करता है। इसमें उम्र, पहले लग चुके टीके, क्रोनिक बीमारियां, प्रेग्नेंसी, नौकरी किस सेक्टर में है, ट्रेवल कहां करते हैं और कमजोर इम्यूनिटी शामिल है। इसलिए मैं लोगों को यही सलाह दूंगी कि सिर्फ इंटरनेट पर देखकर वैक्सीन न लगवाएं, बल्कि डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर वैक्सीन या बूस्टर की सलाह दे सकते हैं।”
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निष्कर्ष
Dr. Vineeta Singh Tandon लोगों को सलाह देती हैं कि 30 की उम्र के बाद लोगों को डॉक्टर से मिलकर वैक्सीनेशन की सलाह जरूर लेनी चाहिए, ताकि भविष्य में गंभीर बीमारियों से बचाव हो सके। इसके अलावा, लोग अक्सर वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर भी सवाल करते हैं, तो सभी वैक्सीन WHO और भारत की हेल्थ एजेंसियों से स्वीकृत होते हैं, इसलिए इन्हें लेना बिल्कुल सुरक्षित होता है। हालांकि, कई लोगों को वैक्सीनेशन के बाद हल्का बुखार, इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द या सूजन हो सकती है, लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। इस बात का ध्यान रखें कि वैक्सीनेशन लेने से पहले डॉक्टर को अपनी पूरी मेडिकल हिस्ट्री जरूर बताए ताकि सही समय पर सही वैक्सीनेशन हो सके।
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FAQ
क्या 30 की उम्र के बाद वैक्सीन लेने से कोई गंभीर साइड इफेक्ट्स होते हैं?
वयस्कों में वैक्सीनेशन पूरी तरह सुरक्षित हैं। हालांकि, कुछ मामलों में वैक्सीन लगने की जगह पर हल्का दर्द, लाली या एक से दो दिन हल्का बुखार आना सामान्य है। इसका यह संकेत है कि आपका इम्यून सिस्टम एंटीबॉडीज बना रहा है।यदि 30 की उम्र के बाद हेपेटाइटिस B का कोई डोज छूट जाए, तो क्या कोर्स दोबारा शुरू करना पड़ता है?
अगर किसी की दूसरी या तीसरी डोज छूट जाए, तो पूरा डोज दोबारा शुरू करने की जरुरत नहीं होती। जहां से कोर्स छूटा था, वहीं से अगली डोज लगवा सकते हैं।
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Jul 24, 2026 20:16 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Vineeta Singh Tandon