फेफड़ों का कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसके शुरुआती चरणों में कई बार कोई साफ लक्षण नजर नहीं आते हैं। यही कारण है कि इसके संकेतों को पहचानना काफी मुश्किल हो सकता है। फेफड़ों के कैंसर की पहचान शुरुआत में ही कर लेने से इसे बढ़ने से रोका जा सकता है और सही इलाज में मदद मिल सकती है। Dr. Mandeep Singh Malhotra, Oncologist, Art of Healing Cancer, Delhi का कहना है कि जब फेफड़ों के कैंसर के लक्षण सामने आते हैं, तो वे कई बार नॉर्मल सांस या फेफड़ों की समस्याओं जैसे लग सकते हैं। हालांकि, शरीर में कोई नया, लगातार बना रहने वाला या धीरे-धीरे बढ़ता बदलाव हो तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।
फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती संकेत
BMJ Open जर्नल में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षण निदान होने से 6 से 12 महीने पहले दिखाई देने लग सकते हैं। इन संकेतों में बलगम में खून आना, हड्डियों में दर्द और वजन कम होना शामिल हैं।
Dr. Mandeep Singh Malhotra का कहना है कि खांसी के अलावा फेफड़ों के कैंसर के कई ऐसे शुरुआती संकेत हैं, जिन्हें आप समय रहते पहचान सकते हैं, जिनमें शामिल हैं-
1. सांस फूलना या सांस लेने में परेशानी
रोजमर्रा की सामान्य गतिविधियां करने के दौरान पहले की तुलना में जल्दी सांस फूलना, लगातार सांस लेने में परेशानी या सांस लेने की क्षमता में बदलाव भी फेफड़ों के कैंसर से जुड़ा संकेत हो सकता है। हालांकि, सांस फूलना, अस्थमा, इंफेक्शन, दिल से जुड़ी बीमारियों और दूसरी स्वास्थ्य स्थितियों के कारण भी हो सकता है।
2. सीने में दर्द या असहजता
सीने में लगातार दर्द, प्रेशर या सांस लेने और खांसने पर तकलीफ महसूस होने की समस्या को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सीने में दर्द और ये समस्याएं अन्य कई कारणों से हो सकते हैं, लेकिन अगर यह खांसी के साथ बहुत ज्यादा और लगातार बढ़ रहा है तो लंग कैंसर का संकेत हो सकता है।
इसे भी पढ़ें: लंग कैंसर की कौन-सी स्टेज है सबसे ज्यादा खतरनाक? जानें हर स्टेज के लक्षण और खतरे
3. आवाज में लगातार भारीपन या बदलाव
आवाज का लंबे समय तक भारी रहना या कर्कश रहना भी एक ऐसा बदलाव है, जिस पर ध्यान देना जरूरी है। लगातार बनी रहने वाली आवाज में बदलाव कई कारणों से हो सकता है, लेकिन फेफड़ों के कैंसर में भी यह लक्षण देखा जा सकता है।
4. सांस लेते समय घरघराहट
अगर सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आने लगे या पहले से अलग तरह की घरघराहट महसूस हो तो इसके कारण की जांच कराना सही है। घरघराहट हमेशा कैंसर का संकेत नहीं होती है, लेकिन फिर भी अगर सांस लेते समय घरघराहट की आवाज बढ़ती जाए तो यह लंग कैंसर का संकेत हो सकता है।

5. बलगम में खून आना
बलगम में खून आना एक ऐसा लक्षण है, जिसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। बलगम से खून आना फेफड़ों के कैंसर का गंभीर संकेत हो सकता है, जिसे नजरअंदाज करना जानलेवा भी हो सकता है।
6. बिना कारण वजन कम होना और भूख कम होना
बिना कोशिश किए वजन कम होना, भूख में कमी और लगातार कमजोरी या थकान सिर्फ पाचन या तनाव से जुड़ी समस्या नहीं मानी जानी चाहिए, खासकर जब ये लक्षण दूसरे सांस से जुड़े बदलावों के साथ मौजूद हों। ये लक्षण कई बीमारियों में नजर आ सकते हैं, लेकिन फेफड़ों के कैंसर से भी जुड़ा लक्षण हो सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
किन लोगों को सतर्क रहना ज्यादा जरूरी है?
Dr. Mandeep Singh Malhotra का कहना है कि खांसी के अलावा इन लक्षणों के नजर आने पर फेफड़े के कैंसर का संकेत हो सकता है। इन लक्षणों के नजर आने पर खासकर ऐसे लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए, जिनमें लंग कैंसर के जोखिम कारक मौजूद हैं। जैसे लंबे समय तक स्मोकिंग करना या तंबाकू के धुएं के संपर्क में रहना। हालांकि, स्मोकिंग न करने वाले लोगों में भी लंग कैंसर हो सकता है।
इसे भी पढ़ें: क्या बिना स्मोकिंग के भी हो सकता है फेफड़ों का कैंसर? जानें क्या कहते हैं डॉक्टर
डॉक्टर से जांच करवाना कब जरूरी है?
Dr. Mandeep Singh Malhotra कहते हैं कि अगर ऊपर बताए गए लक्षण कई दिनों तक बने हुए हैं और उनमें सुधार नहीं हो रहा है, बार-बार वापस हो रहे हैं या धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं तो उसे नॉर्मल मानकर टालने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। समय पर जांच से लक्षणों के सही कारणों की पहचान की जा सकती है और जरूरत होने पर आगे की जांच और सही इलाज समय पर शुरू हो सकता है।
निष्कर्ष
Dr. Mandeep Singh Malhotra का कहना है कि सबसे जरूरी बात यह है कि खांसी के अलावा फेफड़ों के इन लक्षणों को पहचानना जरूरी है। हालांकि, खांसी और इन लक्षणों का होना अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का भी संकेत हो सकता है, लेकिन उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर लक्षणों की सही पहचान करके बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है और सही इलाज मिल सकता है।
Image Credit: Freepik
FAQ
फेफड़ों के कैंसर से बचने के क्या उपाय हैं?
फेफड़ों के कैंसर से बचने का सबसे अच्छा उपाय है कि आप स्मोकिंग और तंबाकू से दूर रहें, प्रदूषित हवा और हानिकारक केमिकल से अपना बचाव करें और हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो करें।फेफड़ों का कैंसर क्यों होता है?
फेफड़ों का कैंसर तब होता है जब फेफड़ों के सेल्स असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर बनाती हैं। इसका सबसे बड़ा और मुख्य कारण सिगरेट या तंबाकू की स्मोकिंग करना है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Aug 30, 2026 22:33 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Mandeep Singh Malhotra