Tue Oct 20, 2026 | 03:31 AM IST

Medically Reviewed by Dr Kanishka Kumar , Senior Consultant – Pulmonary & Critical Care Metro Centre for Respiratory Diseases, Metro Hospitals, Noida & Delhi

लंग बायोप्सी क्या है? डॉक्टर से जानें इसकी प्रक्रिया क्या है और जरूरत कब पड़ती है?

लंग बायोप्सी फेफड़ों में गांठ या असामान्यता का कारण जानने के लिए एक जरूरी जांच है, जो कैंसर, इंफेक्शन या अन्य बीमारियों का पता लगाती है। यह प्रक्रिया फेफड़ों के प्रभावित टिश्यू का सैंपल लेकर की जाती है और इसके कई तरीके हैं।
लंग बायोप्सी क्या है? डॉक्टर से जानें इसकी प्रक्रिया क्या है और जरूरत कब पड़ती है?लंग बायोप्सी क्या है? डॉक्टर से जानें इसकी प्रक्रिया क्या है और जरूरत कब पड़ती है?

जब सीने के एक्स-रे या सीटी स्कैन में फेफड़ों से जुड़ी कोई गांठ, छवि या असामान्यता दिखाई देती है, तो डॉक्टर के लिए सही बीमारी का पता लगाना बहुत जरूरी हो जाता है। ऐसी स्थिति में लंग बायोप्सी एक बहुत जरूरी मेडिकल टेस्ट है। लंग बायोप्सी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें फेफड़ों के प्रभावित टिश्यू या सेल्स का एक छोटा-सा सैंपल निकालकर उसकी लैब में जांच की जाती है। इस टेस्ट से यह पता चलता है कि फेफड़ों में मौजूद गांठ कैंसर से जुड़ी है या कोई नॉर्मल इंफेक्शन है। Dr. Kanishka Kumar, Senior Consultant- Pulmonary & Critical Care, Metro Centre for Respiratory Diseases, Metro Hospitals, Noida & Delhi बताते हैं कि फेफड़ों की बायोप्सी की मदद से डॉक्टर फेफड़ों के इंफेक्शन के बीच साफ अंतर समझ पाते हैं, ताकि सही समय पर सही इलाज शुरू किया जा सके। इसलिए, आइए इस लेख में हम विस्तार से लंग बायोप्सी के बारे में जानते हैं।

लंग बायोप्सी कब जरूरी होती है?

Cleveland Clinic के अनुसार, "डॉक्टर अक्सर लंग बायोप्सी करवाने की सलाह तब देते हैं, जब स्क्रीनिंग टेस्ट या किसी दूसरे कारण से किए गए इमेजिंग टेस्ट में फेफड़ों में कोई गांठ दिखाई देती है। आमतौर पर इसका इस्तेमाल लंग कैंसर का पता लगाने और उसकी स्टेज जानने के लिए करते हैं। लेकिन वे फेफड़ों की दूसरी बीमारियों जैसे सारकोइडोसिस, पल्मोनरी फाइब्रोसिस और बहुत कम मामलों में निमोनिया का पता लगाने के लिए भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।"

Dr. Kanishka Kumar बताते हैं कि हर मरीज को लंग बायोप्सी की जरूरत नहीं होती है। डॉक्टर इसे तब करवाने की सलाह देते हैं जब फेफड़ों में कोई ऐसी समस्या दिखाई दे, जिसका कारण साफ न हो, जैसे-

  • फेफड़े में कोई गांठ दिखाई देना
  • सीटी स्कैन में कोई संदिग्ध जगह दिखाई देना
  • कैंसर होने का शक होना
  • फेफड़ों में लंबे समय से सूजन या दूसरे बदलाव होना
  • फेफड़ों की कुछ ऐसी बीमारियों का पता लगाना जिनकी पहचान सिर्फ स्कैन से नहीं हो पाती।
  • कुछ इंफेक्शन या फेफड़ों में जख्म या फाइब्रोसिस का कारण जानना

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बायोप्सी से क्या पता चलता है?

Dr. Kanishka Kumar के अनुसार, लंग बायोप्सी में टिश्यू की जांच करके डॉक्टर यह पता लगा सकते हैं कि-

  • गांठ कैंसर की है या नहीं
  • अगर कैंसर है तो वह किस तरह का है
  • फेफड़ों में इंफेक्शन है या नहीं
  • सूजन या दूसरी बीमारी के संकेत हैं या नहीं
  • फेफड़ों के टिश्यू में फाइब्रोसिस यानी ज्यादा निशान बनने की समस्या है या नहीं

अगर बायोप्सी की रिपोर्ट आने के बाद कैंसर मिलता है तो कभी-कभी टिश्यू पर कुछ और जांच भी की जाती है। इनसे कैंसर का सही प्रकार पता लगाने और कौन-सा इलाज ज्यादा उपयोगी हो सकता है, इस बारे में तय करने में मदद मिलती है।

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लंग बायोप्सी कैसे होती है?

Dr. Kanishka Kumar बताते हैं कि बायोप्सी करने के कई तरीके हैं। कौन-सा तरीका इस्तेमाल होगा, यह फेफड़े की समस्या की जगह और आकार पर निर्भर करता है।

1. सुई से बायोप्सी

इसमें डॉक्टर सीटी स्कैन की मदद से एक पतली सुई को फेफड़े की प्रभावित जगह तक पहुंचाते हैं। सुई से थोड़ा टिश्यू निकाल लिया जाता है। जहां सुई लगाई जाती है, उस जगह को पहले सुन्न किया जाता है, इसलिए आमतौर पर ज्यादा दर्द नहीं होता है।

2. ब्रोंकोस्कोपी से बायोप्सी

इसमें डॉक्टर एक पतली ट्यूब, जिसमें कैमरा लगा होता है, मुंह या नाक के रास्ते फेफड़ों तक ले जाते हैं। इसके जरिए फेफड़े के अंदर की जगह देखकर छोटा-सा टिश्यू लिया जाता है।

3. ऑपरेशन से बायोप्सी

अगर ऊपर के तरीकों से जांच के लिए पर्याप्त टिश्यू नहीं मिल पाता है तो डॉक्टर छोटे ऑपरेशन के जरिए बायोप्सी कर सकते हैं। इसे VATS जैसी तकनीक से किया जा सकता है।

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क्या लंग बायोप्सी सुरक्षित है?

Dr. Kanishka Kumar के अनुसार, लंग बायोप्सी आमतौर पर सुरक्षित होती है, लेकिन हर मेडिकल प्रक्रिया की तरह इसमें भी कुछ जोखिम हो सकते हैं, जैसे-

  • सुई से बायोप्सी के बाद थोड़ी खांसी या हल्का खून आ सकता है। कभी-कभी फेफड़े में हवा बाहर निकलकर न्यूमोथोरैक्स यानी फेफड़े का सिकुड़ना हो सकता है। इस स्थिति में कई बार ट्रीटमेंट की जरूर पड़ सकती है।
  • ब्रोंकोस्कोपी के बाद भी कई मरीजों के गले में खराश, खांसी या थोड़ा खून आ सकता है।
  • बायोप्सी के बाद अचानक सांस लेने में परेशानी, सीने में तेज दर्द, ज्यादा खून आना या तेज बुखार हो सकता है, जिस कारण तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है।

रिपोर्ट आने में कितना समय लगता है और इसे कैसे समझें?

नॉर्मल बायोप्सी की रिपोर्ट कुछ दिनों में आ सकती है। अगर कोई और टेस्ट करना पड़े तो ज्यादा समय लग सकता है। कैंसर की स्थिति में कुछ खास जांचों के नतीजे आने में और समय लग सकता है। इसके साथ ही, बायोप्सी रिपोर्ट का सबसे जरूरी हिस्सा आमतौर पर “फाइनल डायग्नोसिस” या “डायग्नोसिस” होता है। इसमें पैथोलॉजिस्ट मुख्य निष्कर्ष लिखता है।

निष्कर्ष

Dr. Kanishka Kumar का कहना है कि लंग बायोप्सी सिर्फ फेफड़ों के कैंसर से जुड़ी नहीं है। बायोप्सी फेफड़े में होने वाले इंफेक्शन, कैंसर या अन्य किसी भी समस्या के बारे में पता लगाने का एक बेहतर तरीका है। इसलिए, लंग बायोप्सी की सलाह मिलने का मतलब यह नहीं है कि मरीज को कैंसर है। इसका मकसद सिर्फ फेफड़े में दिखाई दे रही समस्या का सही कारण पता करना है। रिपोर्ट को सीटी स्कैन, लक्षण और दूसरी जांचों के साथ देखकर ही डॉक्टर अंतिम निर्णय लेते हैं।
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FAQ

  • अगर बायोप्सी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो क्या होगा?

    बायोप्सी की रिपोर्ट पॉजिटिव आने का मतलब है कि टेस्ट में असामान्य या बीमारी पैदा करने वाले सेल्स मिले हैं। इसका अर्थ हमेशा यह नहीं होता कि मरीज को जानलेवा बीमारी है।
  • बायोप्सी के बाद क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

    बायोप्सी के बाद इंफेक्शन और खून बहने से बचने के लिए घाव को साफ और सूखा रखें, भारी सामान न उठाएं और डॉक्टर की सलाह के बिना खून पतला करने वाली दवाएं न लें।

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Sep 03, 2026 13:00 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Kanishka Kumar