Mon Sep 28, 2026 | 08:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vighnesh Y , Sr. Consultant – General Medicine

फेफड़ों की गंभीर बीमारी 'पल्मोनरी फाइब्रोसिस' क्‍या है? डॉक्‍टर से जानें लक्षण, कारण और इलाज

फाइब्रोस‍िस का मतलब होता है क‍िसी भी चीज का स‍िकुड़ना। पल्‍मोनरी मतलब फेफड़े, तो पल्‍मोनरी फाइब्रोस‍िस का मतलब है फेफड़ों का स‍िकुड़ना। पल्मोनरी फाइब्रोसिस फेफड़ों से जुड़ी एक बीमारी है जो लंबे समय तक बनी रहती है।
फेफड़ों की गंभीर बीमारी 'पल्मोनरी फाइब्रोसिस' क्‍या है? डॉक्‍टर से जानें लक्षण, कारण और इलाजफेफड़ों की गंभीर बीमारी 'पल्मोनरी फाइब्रोसिस' क्‍या है? डॉक्‍टर से जानें लक्षण, कारण और इलाज

पल्मोनरी फाइब्रोसिस (Pulmonary Fibrosis) होने पर फेफड़ों के अंदर मौजूद ट‍िशूज धीरे-धीरे मोटे, सख्त और डैमेज होकर उनमें निशान बनने लगते हैं। इस प्रक्रिया को फाइब्रोसिस कहा जाता है। इसकी वजह से फेफड़ों का फैलना मुश्किल हो जाता है और वे ब्‍लड तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पाते। इसके कारण सांस लेने में परेशानी होती है और कोई भी फ‍िज‍िकल काम करने की क्षमता कम हो सकती है। आइए जानते हैं पल्‍मोनरी फाइब्रोस‍िस के लक्षण, कारण और इलाज। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Vighnesh Y, Sr. Consultant General Physician At Yashoda Hospitals, Secunderabad से बात की।

Mayo Clinic के मुताब‍िक, पल्मोनरी फाइब्रोसिस के कारण कुछ गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे-

  • ब्लड प्रेशर बढ़ना।
  • हार्ट फेलियर।
  • सांस लेने में गंभीर समस्या या रेस्पिरेटरी फेलियर।
  • फेफड़ों का कैंसर।

पल्‍मोनरी फाइब्रोस‍िस क्‍या है?

जब भी फेफड़ों में इंफेक्‍शन या बीमारी होती है, तो फेफड़ों का कुछ ह‍िस्‍सा डैमेज हो जाता है और डैमेज होने के कारण वो ह‍िस्‍सा स‍िकुड़ने लगता है। इसे ही पल्‍मोनरी फाइब्रोस‍िस कहा जाता है।

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मरीज को ऑक्‍सीजन की जरूरत पड़ सकती है

जब पल्‍मोनरी फाइब्रोस‍िस बढ़ जाता है, तो शरीर में ऑक्‍सीजन का स्‍तर कम हो सकता है और फ‍िर मरीज को ऑक्‍सीजन मशीन की मदद से ऑक्‍सीजन लेने की जरूरत पड़ सकती है।

कोव‍िड के बाद पल्‍मोनरी फाइब्रोस‍िस

कोव‍िड के बाद लोगों के मन में इस बीमारी को जानने की बेचैनी देखी गई क्‍योंक‍ि कोव‍िड काल में कई लोगों के फेफड़े जब डैमेज हो गए थे, तब कई लोगों में पल्‍मोनरी फाइब्रोस‍िस के मामले देखे गए थे।

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पल्मोनरी फाइब्रोसिस के लक्षण क्‍या हैं?

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पल्मोनरी फाइब्रोसिस होने पर लगातार सूखी खांसी, थकान, सांस फूलना, खासकर चलने या एक्सरसाइज करने पर, शामिल हैं। कुछ लोगों का वजन बिना कोशिश के कम हो सकता है या उंगलियों के सिरों का आकार बदलकर फूल सकता है, जिसे क्लबिंग कहा जाता है।

पल्मोनरी फाइब्रोसिस के कारण क्‍या हैं?

  • पल्मोनरी फाइब्रोसिस के कई कारण हो सकते हैं जैसे लंबे समय तक धूल या कुछ केम‍िकल्‍स के संपर्क में रहना, कुछ दवाएं, रेडिएशन थेरेपी, ऑटोइम्यून बीमारियां और पहले हो चुके फेफड़ों के संक्रमण इसके कुछ कारण हो सकते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में इसका कोई स्पष्ट कारण पता नहीं चल पाता है।
  • कि‍सी को टीबी हो जाए और कोई ह‍िस्‍सा डैमेज हो जाए, तो फाइब्रोस‍िस हो सकता है।
  • कोव‍िड जैसे वायरल इंफेक्‍शन के कारण यह हो सकता है।
  • कुछ हार्ट और थायराइड की दवाओं के कारण फाइब्रोस‍िस हो सकता है।
  • पल्‍मोनरी फाइब्रोस‍िस कई बार जेनेट‍िक फैक्‍टर के कारण भी हो सकता है।
  • धूम्रपान, प्रदूषण के कारण भी यह बीमारी हो सकती है।

पल्मोनरी फाइब्रोसिस की पुष्टि‍ कैसे होती है?

इस बीमारी की जांच के लिए डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री देखते हैं और लंग फंक्शन टेस्ट कर सकते हैं। फेफड़ों की स्थिति को करीब से देखने के लिए हाई-रेजॉल्यूशन CT स्कैन भी किया जा सकता है।

पल्मोनरी फाइब्रोसिस का इलाज क्‍या है?

  • ज्यादातर मामलों में इसका कोई स्‍थायी इलाज नहीं है। हालांकि, एंटीफाइब्रोटिक दवाएं, ऑक्सीजन थेरेपी और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन जैसी उपचार, बीमारी की रफ्तार को धीमा करने में मदद कर सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में लंग ट्रांसप्लांट का विकल्प भी देखा जा सकता है।
  • पल्‍मोनरी फाइब्रोस‍िस के कारण डैमेज हुए फेफड़े को दोबारा नॉर्मल करना लगभग नामुमक‍िन होता है। हालांक‍ि, इसे बढ़ने से रोका जा सकता है।
  • अगर मरीज को सांस की तकलीफ हो रही है, तो इनहेलर दे सकते हैं।
  • खांसी में नेबुलाइजर का प्रयोग क‍िया जा सकता है।
  • कुछ मरीजों में इलाज के ल‍िए स्‍टेरॉइड्स की मदद ली जाती है।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

अगर लगातार सांस फूलना या सूखी खांसी जैसे लक्षण हैं, तो समय पर फेफड़ों के विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। जल्दी जांच होने से बीमारी को समझने और इलाज शुरू करने में मदद मिल सकती है।

न‍िष्‍कर्ष:

पल्मोनरी फाइब्रोसिस होने पर लगातार सूखी खांसी, थकान, सांस फूलना जैसे लक्षण नजर आते हैं। लंबे समय तक धूल या कुछ केम‍िकल्‍स के संपर्क में रहना, कुछ दवाएं, रेडिएशन थेरेपी, ऑटोइम्यून बीमारियां और पहले हो चुके फेफड़ों के संक्रमण इसके कारण हो सकते हैं। टीबी, वायरल इंफेक्‍शन जैसे कोव‍िड, हार्ट और थायराइड की दवाएं, जेनेट‍िक फैक्‍टर, धूम्रपान और प्रदूषण के कारण भी यह बीमारी हो सकती है।लंग फंक्शन टेस्ट और सीटी स्‍कैन से इस बीमारी का पता चलता है। इस बीमारी का कोई स्‍थायी इलाज नहीं है। इलाज में एंटीफाइब्रोटिक दवाएं, ऑक्सीजन थेरेपी और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन की मदद ली जाती है। लक्षण कंट्रोल करने के ल‍िए इनहेलर, नेबुलाइजर, स्‍टेरॉइड्स की मदद ली जाती है। लगातार सांस फूलना या सूखी खांसी हो, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें।

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FAQ

  • पल्मोनरी फाइब्रोसिस से कैसे बचें?

    हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल फॉलो करें, अल्‍कोहल, धूम्रपान, प्रदूषण से बचें। धूल-म‍ि‍ट्टी वाले कामों से बचें। वायरल इंफेक्‍शन से बचें और क‍िसी भी दवा के सेवन से पहले डॉक्‍टर की सलाह लें।
  • क्या पल्मोनरी फाइब्रोसिस संक्रामक बीमारी है?

    नहीं। पल्मोनरी फाइब्रोसिस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने वाली संक्रामक बीमारी नहीं है।

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Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 28, 2026 19:22 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Vighnesh Y