Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Rajeev Chowdry , General Physician & Internal Medicine Specialist, Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad | 23 Years of Clinical Experience

बीमार नहीं फ‍िर भी उल्टी आ रही है? हो सकते हैं ये 6 गंभीर कारण, जानें डॉक्‍टर से कब करें संपर्क

अक्‍सर उल्‍टी आना क‍िसी न क‍िसी बीमारी का संकेत माना जाता है, लेक‍िन कुछ लोगों को बीमारी के बगैर भी उल्‍टी आती है। आख‍िर इसके पीछे क्‍या कारण हो सकते हैं? डॉक्‍टर से जानते हैं।

उल्‍टी को बीमारी का लक्षण माना जाता है, लेक‍िन जब बीमारी के बगैर ही उल्‍टी आ जाए, तो इसके पीछे क्‍या कारण हो सकते हैं? कुछ कॉमन कारणों की बात करें, तो जब हम कुछ ज्‍यादा खा लेते हैं या खराब या बासी भोजन कर लेते हैं, तो भी उल्‍टी आ सकती है। कोई चीज जो ठीक से पचती न हो, उसे खाकर भी उल्‍टी आ सकती है। ये सभी कॉमन वजह हैं, हालांक‍ि इसके पीछे और भी कई गंभीर कारण हो सकते हैं। इस लेख में हम जानेंगे बीमारी के बगैर उल्‍टी क्‍यों होती है और कि‍न लक्षणों के नजर आने पर डॉक्‍टर से संपर्क करना चाह‍िए? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Rajeev Chowdry, Internal Medicine Specialist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

उल्‍टी आने के कुछ कॉमन कारण

  • कभी-कभी यात्रा के दौरान मोशन स‍िकनेस के कारण उल्‍टी या मतली जैसे लक्षण महसूस होते हैं।
  • माइग्रेन के कारण भी कुछ मरीजों को तेज स‍िर दर्द के साथ मतली और उल्‍टी भी होती है।
  • प्रेग्‍नेंसी में हार्मोनल बदलाव के कारण उल्‍टी या जी म‍िचलाना जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।
  • कुछ ऐसी चीज को खा लेने के कारण उल्‍टी आती है ज‍िसे पेट पचा नहीं पाता है, जैसे कुछ लोगों को दूध से एलर्जी होती है और म‍िल्‍क प्रोडक्‍ट्स का सेवन करने की वजह से उल्‍टी आ सकती है।
  • एंटीबायोट‍िक्‍स, दर्द न‍िवारक दवाएं, कीमोथेरेपी वगैरह में भी उल्‍टी आ सकती है।
  • अगर बहुत ज्‍यादा गर्मी है या आप बहुत अध‍िक तनाव में हैं, तो भी पाचन तंत्र प्रभाव‍ित हो सकता है और उल्‍टी जैसा महसूस हो सकता है।
  • जरूरत से ज्‍यादा खा लेना या पेट में बार-बार एस‍िड बनने की स्‍थ‍ित‍ि (एसिड रिफ्लक्स) में जलन, मतली और उल्‍टी भी हो सकती है।

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उल्‍टी आने के गंभीर कारण

Mayo Clinic के मुताबि‍क, उल्‍टी आने के पीछे कुछ गंभीर बीमार‍ियां या कंडीशन हो सकती हैं जैसे- जनरल एनेस्थीसिया की स्‍थि‍त‍ि में उल्‍टी आ सकती है, आंतों में रुकावट, रोटावायरस, एक्यूट लिवर फेलियर, ईट‍िंग ड‍िसऑर्डर, अपेंडिसाइटिस, ब्रेन ट्यूमर, साइक्लिक वोमिटिंग सिंड्रोम, डिप्रेशन, फूड पॉइजनिंग, पित्त की पथरी, हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर, हेपेटाइटिस, थायराइड, पैंक्रियाटिक कैंसर, टॉक्सिक हेपेटाइटिस वगैरह। इन बीमार‍ियों के हर मरीज को उल्‍टी आए, ऐसा जरूरी नहीं है, लेक‍िन उल्‍टी का एक कारण इनमें से कोई भी हो सकता है।

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अन्‍य कारण

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1. पैंक्रियाटाइटिस

पैंक्रियाटाइटिस यानी अग्न्याशय में सूजन के कारण उल्‍टी आ सकती है। उल्‍टी के साथ-साथ पेट के ऊपरी ह‍िस्‍से में दर्द और जलन, बुखार, पेट में सूजन जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं।

2. क‍िडनी स्‍टोन

पथरी के कारण मतली या उल्‍टी जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। अन्‍य लक्षणों की बात करें, तो पथरी होने पर पेट या कमर के ह‍िस्‍से में तेज दर्द, पेशाब में खून, बार-बार पेशाब आने जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।

3. गॉलब्‍लैडर ड‍िजीज

पित्त की थैली में पथरी या सूजन के कारण उल्‍टी आती है और तेज दर्द हो सकता है। अन्‍य लक्षणों में बुखार, पेट फूलना जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं।

4. आंतों में रुकावट

आंत में भोजन या तरल पदार्थ के कारण रुकावट आ सकती है ज‍िसके कारण उल्‍टी भी हो सकती है। आंतों में रुकावट आने पर पेट फूलना, पेट दर्द, गैस, मल न न‍िकलना या कब्‍ज जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।

5. पेप्टिक अल्सर

पेप्टिक अल्सर के कारण पेट में जलन, खाली पेट दर्द और गंभीर मामलों में खून की उल्‍टी हो सकती है। अल्‍सर में छोटी आंत या पेट में घाव होने के कारण मतली या उल्‍टी होती है।

6. गैस्ट्राइटिस

पेट की अंदरूनी परत में सूजन के कारण उल्‍टी या मतली हो सकती है, इसके अलावा, पेट में जलन, ऊपरी पेट में दर्द, अपच, भूख कम लगना जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।

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उल्‍टी से बचने के ल‍िए ये ट‍िप्‍स काम आएंगे

अक्‍सर उल्‍टी आती है, तो यह पाचन संबंध‍ित समस्‍या हो सकती है। इससे बचने के ल‍िए-

  • छोटे मील्‍स लें। एक साथ ज्‍यादा खाने से बचें।
  • साथ ही ज्‍यादा म‍िर्च-मसाले वाली चीजें, तला-भुना या बासी भोजन खाने से बचें।
  • अल्‍कोहल का सेवन भी कम करें। कुछ लोगों को अल्‍कोहल का अध‍िक सेवन करने के कारण भी उल्‍टी आ सकती है। खाने के तुरंत बाद लेटने से बचें, इससे खाना ठीक से पच नहीं पाता है और उल्‍टी आ सकती है।
  • अगर यात्रा कर रहे हैं, तो मोशन सि‍कनेस की दवा लें।

उल्‍टी आने पर डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • अगर उल्‍टी के साथ तेज बुखार हो।
  • उल्‍टी लगातार 24 घंटे से ज्‍यादा समय से हो रही हो।
  • खून की उल्‍टी होना।
  • गंभीर ड‍िहाइड्रेशन के मामले में।
  • उल्‍टी के साथ लगातार पेट में दर्द होना।
  • उल्‍टी के साथ लगातार वजन कम होना।
  • कुछ भी न‍िगलने में परेशानी होना।

न‍िष्‍कर्ष:

यात्रा के दौरान मोशन स‍िकनेस, माइग्रेन, प्रेग्‍नेंसी, एलर्जी फूड्स, अध‍िक खा लेना, दवाओं का सेवन, कीमोथेरेपी, ज्‍यादा गर्मी जैसे कारणों से उल्‍टी आ सकती है। उल्‍टी आने के पीछे कुछ गंभीर कारण हो सकते हैं जैसे पैंक्रियाटाइटिस, क‍िडनी स्‍टोन, गॉलब्‍लेडर ड‍िजीज, आंतों में रुकावट, पेप्टिक अल्सर, गैस्ट्राइटिस वगैरह। खून की उल्‍टी हो या 24 घंटे से ज्‍यादा समय के ल‍िए उल्‍टी की समस्‍या बनी रहे, तो डॉक्‍टर से संपर्क करना न भूलें।

FAQ

  • उल्‍टी आने के बाद क्‍या खाएं?

    उल्‍टी आने के बाद जल्‍दी पचने वाला भोजन, सादा चावल, केला, टोस्‍ट, ख‍िचड़ी और दही वगैरह का सेवन कर सकते हैं।
  • बच्‍चों को उल्‍टी होने पर क्‍या करें?

    थोड़ी -थोड़ी देर में तरल पदार्थ दें। अगर बार-बार उल्‍टी हो या पेशाब कम आए, तो डॉक्‍टर से सलाह लें। 
  • उल्‍टी रोकने की दवा कब लें?

    अगर बार-बार उल्‍टी हो रही है या उल्‍टी आने का कारण पता नहीं है, तो डॉक्‍टर की सलाह पर दवा ले सकते हैं। ध्‍यान रखें क‍ि उल्‍टी में खुद से दवा नहीं लेना चाह‍िए। पहले उल्‍टी के कारण का पता लगाना जरूरी है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 14, 2026 16:35 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Rajeev Chowdry

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