Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Chandni Jain Gupta , Dermatologist

धूप में नहीं जाते फिर भी स्किन होती जा रही है डार्क? एक्‍सपर्ट से जानें कारण

कई लोग धूप में नहीं जाते, लेक‍िन फ‍िर भी उनकी त्‍वचा डार्क नजर आती है। सन एक्‍सपोजर के बगैर भी कई कारण हैं जो त्‍वचा के रंग में बदलाव ला सकते हैं। डर्मेटोलॉज‍िस्‍ट से जानें ऐसे 5 कारण। 

जब भी क‍िसी का रंग गहरा होता है, तो हम समझते हैं क‍ि वो व्‍यक्‍त‍ि धूप में ज्‍यादा देर रहता होगा, लेक‍िन त्‍वचा का गहरा रंग केवल यूवी रेज के कारण नहीं, बल्‍क‍ि अन्‍य कारणों से भी हो सकता है। एकेन्थोसिस नाइग्रिकन्स एक त्‍वचा व‍िकार है ज‍िसके कारण त्‍वचा का रंग गहरा हो सकता है। इस कंडीशन में त्‍वचा पर गहरे रंग के मोटे पैच बन जाते हैं। ये अक्‍सर गर्दन, बगल और जांघों के बीच होते हैं। इसके पीछे मोटापा, हार्मोनल समस्‍याएं, इंसुल‍िन रेजि‍स्‍टेंस, पीएमओएस जैसे कारण हो सकते हैं। डायब‍िटीज में भी इसके लक्षण नजर आ सकते हैं। हालांक‍ि, त्‍वचा का रंग गहरा होने के पीछे और भी कई कारण हो सकते हैं ज‍िनके बारे में जानने के ल‍िए हमने Dr. Chandni Jain, Dermatologist, Cosmetologist And Hair Transplant Surgeon At Elantis Healthcare, New Delhi से बात की।

1. दवाओं का असर

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कुछ दवाएं ऐसी होती हैं ज‍िससे स्‍क‍िन प‍िग्‍मेंटेशन की श‍िकायत हो सकती है जैसे एंटीबॉयोट‍िक्‍स, दौरे को रोकने वाली दवाएं, कीमोथेरेपी। इन दवाओं के कारण चेहरे या शरीर पर पैच नजर आ सकते हैं। अगर क‍िसी दवा के सेवन के बाद त्‍वचा में क‍िसी तरह का बदलाव नजर आए, तो डॉक्‍टर से संपर्क करना न भूलें।

क्‍या कहती है स्‍टडी?

साल 2023 में Molecules नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, त्‍वचा का रंग जेनेट‍िक्‍स, यूवी क‍िरणों से संपर्क और कुछ खास दवाओं पर नि‍र्भर करता है। साथ ही स्‍टडी में बताया गया है क‍ि प‍िग्‍मेंटेशन शारीर‍िक और मानस‍िक सेहत को काफी हद तक प्रभाव‍ित करती है। इलाज के ल‍िए एंटीइंफ्लेमेटरी दवाएं, एंटीऑक्‍सीडेंट्स वगैरह द‍िए जाते हैं।

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2. उम्र बढ़ना

बढ़ती उम्र में भी त्‍वचा का रंग गहरा हो सकता है। जैसे-जैसे हमारी त्‍वचा बूढ़ी होती है, वैसे-वैसे त्‍वचा के ठीक होने की प्रक्र‍िया भी धीमी हो जाती है। इस वजह से त्‍वचा पर काले धब्‍बे नजर आ सकते हैं। चेहरे, हाथ, बाहों पर एज‍िंग का असर ज्‍यादा देखने को म‍िलता है।

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3. प्रदूषण और पर्यावरण

जो लोग धूप से बच जाते हैं वे सोचते हैं क‍ि हमारी रंगत गहरी नहीं होगी, लेक‍िन प्रदूषण, धूल और सूक्ष्‍म कणों के संपर्क में आने के कारण त्‍वचा को नुकसान होता है। फ्री रेड‍िकल्‍स त्‍वचा को नुकसान पहुंचाते हैं और मेलेन‍िन के उत्‍पादन को बढ़ा सकते हैं। इस वजह से समय के साथ त्‍वचा बेजान नजर आने लगती है।

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4. एक्‍ने और सूजन

एक स्‍क‍िन कंडीशन है ज‍िसे पोस्‍ट इंफ्लेमेटरी हाइपरप‍िग्‍मेंटेशन कहते हैं। यानी एक्‍ने ठीक होने के बाद न‍िशान छोड़ते हैं। ये न‍िशान आगे चलकर प‍िग्‍मेंटेशन का रूप ले लेते हैं। अगर आपको भी अक्‍सर एक्‍ने और त्‍वचा में सूजन की श‍िकायत रहती है, तो त्‍वचा का रंग गहरा हो सकता है।

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5. हार्मोनल बदलाव

प्रेग्‍नेंसी, बर्थ कंट्रोल प‍िल के इस्‍तेमाल, पीएमओएस जैसी स्‍थि‍ति‍यों में हार्मोनल बदलाव होते हैं। हार्मोन्‍स के उतार-चढ़ाव का असर त्‍वचा पर भी होता ळै। इससे अक्‍सर गालों, माथे, ऊपरी होंठ पर धब्‍बे नजर आने लगते हैं। जरूरी नहीं है क‍ि ऐसा घर से बाहर जाने के कारण हो। जो लोग पूरे द‍िन घर पर रहते हैं और सन एक्‍सपोजर से दूर रहते हैं, उनमें भी यह समस्‍या हो सकती है।

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त्‍वचा के रंग को गहरा होने से कैसे बचाएं?

त्‍वचा का रंग गहरा हो रहा है, तो घरेलू उपायों में समय देकर इंतजार न करें, इससे समस्‍या बढ़ सकती है। त्‍वचा का गहरा रंग डॉक्‍टर द्वारा द‍िए गए इलाज और दवाओं से ही ठीक हो सकता है इसल‍िए समय रहते डॉक्‍टर से संपर्क करें। हालांक‍ि, हेल्‍दी स्‍क‍िन केयर रूटीन को फॉलो करके स्‍क‍िन प‍िग्‍मेंटेशन से बचने में मदद म‍िल सकती है-

  • सुबह के समय सल्‍फेट फ्री जेंटल क्‍लींजर का इस्‍तेमाल करें।
  • इसके बाद टोनर लगाएं।
  • प‍िग्‍मेंटेशन से बचने के ल‍िए व‍िटाम‍िन सी युक्‍त सीरम लगा सकते हैं।
  • इसके बाद मॉइश्चराइजर अप्‍लाई करें। फ‍िर सनसक्रीन अप्‍लाई कर सकते हैं।
  • रात को सोने से पहले फेस वॉश करें।
  • लैक्‍ट‍िक एस‍िड या नियासिनमाइड युक्‍त टोनर का इस्‍तेमाल करें।
  • स्‍क‍िन डार्कनेस कम करने के ल‍िए एंटीऑक्‍सीडेंट्स युक्‍त मॉइश्चराइजर लगाएं।

नि‍ष्‍कर्ष:

अगर आप धूप में नहीं जाते हैं और फ‍िर भी त्‍वचा का रंग गहरा हो रहा है, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे दवाओं का असर, उम्र बढ़ना, प्रदूषण और पर्यावरण, एक्‍ने और सूजन, हार्मोनल बदलाव वगैरह। त्‍वचा का रंग गहरा हो रहा है, तो इसे घर बैठे ठीक नहीं क‍िया जा सकता, इसके ल‍िए डॉक्‍टर से संपर्क करें, कारण का पता लगाएं और इलाज करें। बचाव के ल‍िए हेल्‍दी स्‍क‍िन केयर रूटीन को फॉलो कर सकते हैं।

FAQ

  • एक्‍ने के कारण त्‍वचा का रंग गहरा हो सकता है?

    हां, मुंहासों के कारण पोस्‍ट इंफ्लेमेटरी हाइपरप‍िग्‍मेंटेशन होता है ज‍िससे त्‍वचा का रंग ज्‍यादा गहरा नजर आ सकता है। 
  • स्किन व्हाइटनिंग क्रीम से त्‍वचा का रंग हल्‍का कर सकते हैं?

    नहीं, बाजार में म‍िलने वाली स्किन व्हाइटनिंग क्रीम से त्‍वचा के रंग पर कोई असर नहीं होता। त्‍वचा को डार्कनेस से बचाने के ल‍िए व‍िटाम‍िन सी और नियासिनामाइड युक्‍त प्रोडक्‍ट्स का इस्‍तेमाल डॉक्‍टर की सलाह पर क‍िया जा सकता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 14, 2026 20:14 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Chandni Jain Gupta

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