Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Prof Dr Smriti Agrawal , Professor & Gynaecologist - Department of Obstetrics & Gynaecology

प्रेग्नेंसी में तेज धूप से हो सकते हैं कई नुकसान, डॉक्‍टर से जानें बचाव के लिए क्या करें

प्रेग्नेंसी में शरीर में कई बदलाव होते हैं और गर्मी के ज्‍यादा तापमान के कारण मह‍िलाएं सन एक्‍सपोजर का श‍िकार हो सकती हैं। तेज धूप में शरीर बीमार हो जाता है। जानें इस दौरान क‍िन ट‍िप्‍स की मदद से बचाव करें?

प्रेग्नेंसी में सन एक्सपोजर (धूप में अध‍िक समय ब‍िताना) के कारण शरीर थकान, ड‍िमेंहाइड्रेशन, चक्‍कर, स्‍क‍िन एलर्जी, शरीर में कमजोरी जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। कुछ मह‍िलाओं में धूप की वजह से प‍िगमेंटेशन भी हो सकता है। प्रेग्नेंसी में शारीर‍िक बदलावों के कारण शरीर का तापमान सामान्‍य से अध‍िक महसूस होता है और तेज धूप, गर्मी और उमस का असर जल्‍दी पड़ सकता है। थोड़ी सावधानी बरतकर मह‍िलाएं खुद को तेज धूप और गर्मी के दुष्‍प्रभावों से खुद को सुरक्ष‍ित रख सकती हैं। प्रेग्नेंसी में सन एक्सपोजर के उपाय जानने के लि‍ए हमने Dr. Smriti Agrawal, Professor & Gynaecologist At Department Of Obstetrics & Gynaecology, King George's Medical University, Lucknow से बात की।

1. हल्‍के और ढीले कॉटन कपड़े पहनें

गर्म‍ियों में हल्‍के और ढीले कॉटन कपड़े पहनें। इस तरह गर्मी और ज्‍यादा पसीने से बच सकते हैं। प्रेग्नेंसी में ढीले, हल्‍के और कॉटन के कपड़े पहनें। इससे त्‍वचा के तापमान को कुछ हद तक कंट्रोल क‍िया जा सकता है।

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2. घर के अंदर का वातावरण ठंडा रखें

प्रेग्नेंसी में शरीर को ज्‍यादा गर्म होने से बचाएं। पंखा, कूलर, AC की हवा से शरीर का तापमान संतुल‍ित क‍िया जा सकता है। कमरे में अच्‍छे वेंट‍िलेशन का ध्‍यान रखें ताक‍ि ताजी हवा अंदर आए।

3. सीधे धूप में बाहर जाने से बचें

प्रेग्नेंसी में सुबह नौ से शाम चार बजे तक तेज धूप में बाहर न जाएं। इस समय सूरज की क‍िरणें ज्‍यादा तेज होती हैं। अगर बाहर जाना जरूरी है, तो छाता, टोपी या स्‍कार्फ का इस्‍तेमाल करें।

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4. असामान्‍य लक्षणों पर गौर करें

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अगर धूप में जाने के बाद चक्‍कर, ज्‍यादा पसीना, सि‍रदर्द, कमजोरी या सांस लेने में परेशानी हो, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें। साथ ही ठंडी जगह पर रहें और आराम करें।

5. गर्मि‍यों में हेल्‍दी डाइट पर फोकस करें

गर्मि‍यों में ताजे फल और पानी से भरपूर चीजों के सेवन से शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद म‍िलती है। डाइट में खीरा, संतरा, तरबूज जैसी चीजों को शामि‍ल करें, इससे शरीर को ठंडा रखने में मदद मिलेगी। गर्मि‍यों में ज्‍यादा तला-भुना खाने से भी बचना चाह‍िए।

6. ड‍िहाइड्रेशन से बचें

प्रेग्नेंसी में ड‍िहाइड्रेशन के कारण कमजोरी, स‍िरदर्द और चक्‍कर जैसे कारण हो सकते हैं। द‍िनभर में थोड़ा-थोड़ा पानी प‍िएं। नार‍ियल पानी, नींबू पानी जैसे हेल्‍दी ड्र‍िंंक्‍स का सेवन करें।

न‍िष्‍कर्ष:

सीधे धूप में बाहर जाने से बचें, घर के अंंदर ठंडक रखें, हल्‍के और ढीले कॉटन के कपड़े पहनें, असामान्‍य लक्षणों पर गौर करें, ड‍िहाइड्रेशन से बचें और हेल्‍दी डाइट लें।

FAQ

  • सन एक्‍सपोजर क्‍या है?

    सन एक्‍सपोजर का मतलब है शरीर या त्‍वचा का सूरज की रोशनी के संपर्क में आना। जब कोई व्‍यक्‍त‍ि धूप में अध‍िक समय ब‍िताता है, तो उसे सन एक्‍सपोजर कहते हैं।
  • सन एक्‍सपोजर क्‍यों खतरनाक है?

    सूरज की क‍िरणों से त्‍वचा झुलस सकती है, सनबर्न हो सकता है, ड‍िहाइड्रेशन हो सकता है, चक्‍कर, कमजोरी या हीट एग्‍जॉशन जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। 

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 26, 2026 11:19 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 26, 2026 11:19 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Prof Dr Smriti Agrawal

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