Wed Oct 7, 2026 | 06:42 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग होने पर कौन से टेस्ट किए जाते हैं? जानें डॉक्टर से

प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग होने पर इस स्थिति को कभी भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। ऐसा क्यों हो रहा है, इसकी जानकारी के लिए कुछ आवश्यक टेस्ट करवाए जाते हैं। आइए, डाॅक्टर से जानते हैं इनके बारे में।
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अगर किसी को प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग हो जाए, तो ज्यादातर महिलाएं डर जाती हैं। ऐसा होना लाजिमी भी है, क्योंकि प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग को अक्सर गर्भपात से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, प्रेग्नेंसी में हो रही ब्लीडिंग हर बार गर्भपात हो, यह जरूरी नहीं है, लेकिन इसे इग्नोर भी नहीं किया जाना चाहिए। प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग क्यों हो रही है, इसे कंफर्म करने के लिए तरह-तरह के टेस्ट किए जाते हैं। यहां हम आपको ब्लड टेस्ट के बारे में बताएंगे, जो प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग होने पर किए जाते हैं। इस बारे में जानने के लिए हमने वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF And Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से बात की।

गर्भावस्था में ब्लीडिंग होने पर किए जाने वाले जरूरी टेस्ट

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1. पेल्विक अल्ट्रासाउंड

यह बहुत ही जरूरी और सबसे पहला टेस्ट है, जो कि प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग होने के कारण किया जाता है। इस टेस्ट के जरिए डॉक्टर भ्रूण की स्थिति, दिल की धड़कन और प्लेसेंटा (गर्भनाल) की जांच करते हैं। इसी टेस्ट के जरिए पता चलता है कि कहीं प्रेग्नेंसी एक्टोपिक तो नहीं है या ब्लीडिंग मिसकैरेज के कारण तो नहीं हो रही है।

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2. Serum Beta hCG Test टेस्ट

यह भी एक तरह का ब्लड टेस्ट है, जो शरीर में ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन हार्मोन के स्तर को मापता है। स्वस्थ गर्भावस्था में शुरुआती दिनों में इस हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ता है। यदि ब्लीडिंग के साथ इसका स्तर घट रहा हो, तो यह मिसकैरेज का संकेत हो सकता है।

3. प्रोजेस्टेरोन टेस्ट

प्रेग्नेंसी के लिए प्रोजेस्टेरोन एक मुख्य हार्मोन है। यह हार्मोन गर्भावस्था को बनाए रखने में मदद करता है। खून में इसका स्तर कम होने पर ब्लीडिंग हो सकती है और मिसकैरेज का जोखिम भी बढ़ जाता है। प्रोजेस्टेरोन टेस्ट के जरिए इसकी कमी का पता लगाया जाता है। अगर रिपोर्ट में इसके स्तर में कमी आती है, तो डाॅक्टर मरीज को जरूरत अनुसार दवा दे सकते हैं।

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4. कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC)

CBC टेस्ट के जरिए गर्भवती महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन और प्लेटलेट्स के स्तर की जांच की जाती है। ध्यान रखें कि प्रेग्नेंसी में शरीर में हीमोग्लोबिन और प्लेटलेट्स के स्तर संतुलित होना बहुत जरूरी है। सीबीसी के जरिए एनीमिया (खून की कमी) है या नहीं, इसका पता चलता है। आपको बता दें कि एनीमिया होने पर शरीर में ब्लड सप्लाई बाधित होती है, जो शिशु के विकास को रोक सकती है।

5. ब्लड ग्रुप और आरएच फैक्टर टेस्ट

डाॅ. शोभा गुप्ता बताती हैं कि यह भी एक जरूरी टेस्ट है। अगर गर्भवती महिला का ब्लड ग्रुप Rh-Negative है और पिता का Rh-Positive है, तो ब्लीडिंग होने पर मां के शरीर में एंटीबॉडीज बनने का खतरा बना रहता है। इसी कंडीशन को रोकने के लिए डॉक्टर आरएच फैक्टर टेस्ट करते हैं। अगर जरूरत महसूस हो, तो महिला को तुरंत एंटी-डी (Anti-D) इंजेक्शन लगाया जाता है।

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निष्कर्ष

गर्भावस्था में ब्लीडिंग होना गंभीर चिंता का विषय होता है। हालांकि, हर बार इसे मिसकैरेज से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। ऐसा क्यों हो रहा है, इसकी जाानकारी के लिए प्राॅपर ब्लड टेस्ट किया जाना जरूरी होता है। अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट की मदद से डॉक्टर ब्लीडिंग के सही कारण को पहचानकर समय पर इलाज शुरू कर सकते हैं। इससे गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु दोनों को सेफ रखा जा सकता है।

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FAQ

  • क्या गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में हल्की ब्लीडिंग सामान्य है?

    हां, प्रेग्नेंसी के शुरुआती 1-2 हफ्तों में इंप्लांटेशन ब्लीडिंग होती है। ऐसे में महिला को हल्की स्पॉटिंग हो सकती है, जो कि सामान्य है। हालांकि, प्रेग्नेंसी के बाद जरा सी स्पॉटिंग होने पर भी डाॅक्टर के पास जाना चाहिए।
  • प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग के साथ पेट में तेज दर्द होना किस बात का संकेत है?

    यह मिसकैरेज (गर्भपात) या एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का गंभीर संकेत हो सकता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी होती है।
  • क्या ब्लीडिंग होने के बाद भी गर्भवती महिला स्वस्थ शिशु का जन्म दे सकती है?

    बिल्कुल। समय पर सही टेस्ट और डॉक्टर द्वारा सही ट्रीटमेंट मिलने से ब्लीडिंग के बाद भी गर्भावस्था सुरक्षित रूप से पूरी हो सकती है और एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया जा सकता है।

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Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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