Thu Oct 15, 2026 | 10:31 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

क्या प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग का मतलब मिसकैरेज होता है? जानें डॉक्टर से सच्चाई

प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग का मतलब सिर्फ मिसकैरेज नहीं होता है। कई अन्य समस्याओं में भी ऐसा हो सकता है, जैसे एक्टोपिक प्रेग्नेंसी आदि।
क्या प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग का मतलब मिसकैरेज होता है? जानें डॉक्टर से सच्चाईक्या प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग का मतलब मिसकैरेज होता है? जानें डॉक्टर से सच्चाई

प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लीडिंग या स्पाॅटिंग होते ही महिलाएं काफी परेशान हो जाती हैं। वे इसे मिसकैरेज या गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य से जोड़कर देखती हैं। तो क्या वाकई प्रेग्नेंसी में हो रही ब्लीडिंग का मतलब हर बार मिसकैरेज होता है या ऐसा किसी अन्य कारणों से भी हो सकता है। प्रेग्नेंसी में हो रही ब्लीडिंग की स्थिति को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। इस संबंध में जानकारी रखकर महिलाएं समय पर अपना ट्रीटमेंट करवा सकती हैं। इस लेख की पुष्टि के लिए हमने Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से बात की है।

क्या प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग का मतलब मिसकैरेज होता है?

does bleeding during pregnancy mean miscarriage 2 (3)does bleeding during pregnancy mean miscarriage 2 (3)

प्रेग्नेंसी में हो रही ब्लीडिंग का मतलब हर बार मिसकैरेज नहीं होता है। ऐसा कई कारणों से हो सकता है, जैसे हार्मोनल बदलाव या इंप्लांटेशन ब्लीडिंग। इस संबंध में डाॅ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "प्रेग्नेंसी के अलग-अलग चरण होते हैं। आमतौर पर प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में हो रही ब्लीडिंग के कई कारण हो सकते हैं इंप्लांटेशन ब्लीडिंग, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी और सर्वाइकल में बदलाव होने पर भी ऐसा होता है। इसी तरह, दूसरी तिमाही में ब्लीडिंग होने की आशंका कम होती है, लेकिन प्लेसेंटा प्रीविया या प्रीटर्म लेबर होने की स्थिति में ऐसा हो सकता है।" डाॅ. शोभा गुप्ता आगे सलाह देती हैं कि प्रेग्नेंसी की किसी भी तिमाही में ब्लीडिंग हो, तो तुरंत डाॅक्टर से अपनी जांच करवाएं।

इसे भी पढें: क्या प्रेग्नेंसी में खीरा खाना सही है? न्यूट्रीशनिस्ट से जानें इसे खाने के फायदे और नुकसान

प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग होने के कारण

  1. इंप्लांटेशन ब्लीडिंगः यह स्थिति तब होती है, जब निषेचित अंडा गर्भाशय की दीवार में इंप्लांट हो जाता है। इससे ब्लीडिंग होने लगती है।
  2. हार्मोनल बदलावः प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में कई तरह के हार्मोन बदलाव होते हैं। एसी कंडीशन में भी कभी-कभी स्पॉटिंग (धब्बे आना) हो सकती है।
  3. सर्विक्स में बदलावः प्रेग्नेंसी के दौरान सर्विक्स बहुत ज्यादा सेंसिटिव हो जाती है, क्योंकि यह गर्भावस्था के लिए तैयार हो रही है। इस दौरान हो रहे बदलाव के कारण से ब्लीडिंग हो सकती है।
  4. एक्टोपिक प्रेग्नेंसीः अगर गर्भ गर्भाशय के बाहर (जैसे कि फैलोपियन ट्यूब में) ठहर जाता है, तो यह प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग का कारण बन सकता है। यह जानलेवा स्थिति है।
  5. संक्रमणः प्रेग्नेंसी के दौरान क्लैमिडिया, गोनोरिया और अन्य सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (STI) हो जाता है, तो इनकी वजह से ब्लीडिंग हो सकती है। 
  6. मिसकैरेजः आमतौर पर मिसकैरेज होने पर हल्की ब्लीडिंग से शुरू हो जाती है, जो कि धीरे-धीरे हैवी हो सकती है। ज्यादातर महिलाओं को मिसकैरेज होने पर पेट में तेज ऐंठन का एहसास होता है।

इसे भी पढ़ें : गर्भावस्था के दौरान पहली तिमाही में सामान्‍य समस्‍या है रक्तस्राव

निष्कर्ष

प्रेग्नेंसी के दौरान हो रही ब्लीडिंग को कभी भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। ऐसा न सिर्फ मिसकैरेज के कारण होता है, बल्कि कई अन्य कंडीशन भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती हैं, जिसका जिक्र हमने इस लेख में ऊपर किया है। अगर किसी भी महिला के साथ ऐसी दिक्कत हो, तो उन्हें तुरंत डाॅक्टर से संपर्क करना चाहिए।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • क्या प्रेग्नेंसी में हल्की ब्लीडिंग होना सामान्य है?

    हां, शुरुआती हफ्तों में इंप्लांटेशन के कारण हल्की ब्लीडिंग या स्पॉटिंग हो सकती है।
  • मिसकैरेज और सामान्य ब्लीडिंग में क्या अंतर है? 

    मिसकैरेज में ब्लीडिंग के साथ पेट में तेज ऐंठन और खून के थक्के (clots) महसूस होते हैं, जबकि सामान्य स्पॉटिंग हल्की होती है।
  • प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग होने पर तुरंत क्या करना चाहिए?

    प्रेग्नेंसी के किसी भी चरण में ब्लीडिंग होने पर बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें और अल्ट्रासाउंड करवाएं।

Read Next

→ क्या मिसकैरेज बिना ब्लीडिंग के भी हो सकता है? डॉक्टर से जानें इसका कारण और बचाव के उपाय

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    May 05, 2026 09:01 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • May 05, 2026 09:01 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • May 05, 2026 09:01 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta