डेंगू ज्यादातर लोगों में बिना गंभीरता के ठीक हो जाता है, बस समय पर इसका इलाज होना जरूरी है, लेकिन प्रेग्नेंसी में डेंगू होने पर सावधानी बरतने की जरूरत होती है। अगर किसी प्रेग्नेंट महिला को डेंगू के लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे सामान्य वायरल फीवर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। दरअसल, प्रेग्नेंसी में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो डेंगू को गंभीर बना सकते हैं। प्रेग्नेंट महिला को डेंगू होने पर क्या असर पड़ सकता है? यह जानने के लिए हमने Dr. Chetna Jain, Director, Department of Obstetrics & Gynecology, Cloudnine Group of Hospitals, Sector 14, Gurugram से बात की।
प्रेग्नेंसी में डेंगू होने पर क्या खतरा हो सकता है?
Dr. Chetna Jain कहती हैं, “अगर प्रेग्नेंट महिला को बुखार के साथ प्लेटलेट्स कम होने लगें, उल्टी, पेट दर्द, कमजोरी या ब्लीडिंग जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाना चाहिए। इस दौरान मां और गर्भ में पल रहे बच्चे, दोनों की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होता है। इससे कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं।”
- प्रेग्नेंसी में फ्लूड लीक होने पर गंभीर स्थिति में शॉक का खतरा बढ़ सकता है।
- गर्भवती महिला के लिए ब्लीडिंग चिंता का कारण हो सकती है। अगर डिलीवरी के आस-पास डेंगू हो, तो प्रसव के समय या उसके बाद ज्यादा रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है।
PubMed में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, प्रेग्नेंसी में डेंगू होने पर समय से पहले डिलीवरी का खतरा रहता है और डिलीवरी के समय बहुत ज्यादा ब्लीडिंग का रिस्क बढ़ सकता है। कुछ महिलाओं में गंभीर डेंगू और डेंगू शॉक भी देखा गया है।
गंभीर डेंगू में सांस लेने में परेशानी, लगातार उल्टी, तेज पेट दर्द, बहुत ज्यादा कमजोरी, चक्कर, शरीर ठंडा पड़ना या ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा कम होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
डेंगू से शिशु पर क्या असर पड़ सकता है?
Dr. Chetna Jain ने कहा, “प्रेग्नेंसी में मां को डेंगू होने पर बच्चे की सेहत पर भी नजर रखना जरूरी होता है। कुछ मामलों में देखा गया है कि शिशु का जन्म समय से पहले होने के कारण उसका वजन कम हो सकता है। कुछ मामलों में मृतजन्म या नवजात मृत्यु भी हो सकती है, लेकिन अगर मां डेंगू का समय पर इलाज शुरू करा दे, तो काफी हद तक डेंगू के खतरे को कम किया जा सकता है।”
PubMed में प्रकाशित स्टडी में 36 अध्ययनों का डेटा लिया गया है। इसमें 39,632 DENV-संक्रमित गर्भवती महिलाएं शामिल थीं। स्टडी में पाया गया कि मातृ मृत्यु दर का रिस्क बिना डेंगू वाली गर्भवती महिलाओं के मुकाबले 4 गुना ज्यादा था। वहीं, नवजात मृत्यु का जोखिम 3 गुना अधिक था।
क्या डेंगू मां से बच्चे में भी पहुंच सकता है?
Dr. Chetna Jain कहती हैं, “आमतौर पर कई महिलाएं यह सवाल करती हैं, तो मेरा जवाब होता है कि हां, प्रेग्नेंसी में मां से शिशु तक डेंगू वायरस पहुंचने की संभावना हो सकती है, लेकिन इसके साथ यह देखना भी जरूरी है कि महिला को प्रेग्नेंसी के किस स्टेज में डेंगू हुआ है। अगर डिलीवरी के आस-पास इंफेक्शन हुआ है, तो विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। ऐसी कंडीशन में नवजात पर भी रेगुलर नजर रखी जाती है।”
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क्या डेंगू और प्रेग्नेंसी के लक्षण एक जैसे हो सकते हैं?
Dr. Chetna Jain ने बताया कि आमतौर पर प्रेग्नेंसी में थकान, कमजोरी, मतली या उल्टी जैसी समस्याएं पहले से हो सकती हैं। इसलिए डेंगू के शुरुआती लक्षणों को पहचानना कभी-कभी मुश्किल हो सकता है। अगर गर्भवती महिला को तेज बुखार, तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, उल्टी या त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण हो, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। अगर प्रेग्नेंट महिला का बुखार कम हो गया हो, तो इसे पूरी तरह से ठीक मान लेना सही नहीं है, क्योंकि डेंगू का क्रिटिकल फेज अक्सर शुरुआती दिनों में बुखार उतरने के आस-पास ही शुरू होता है। इसलिए डॉक्टर से लगातार चेकअप कराते रहें और सलाह लेते रहें।
प्रेग्नेंसी में डेंगू होने पर क्या करना चाहिए?
Dr. Chetna Jain ने प्रेग्नेंट महिलाओं को खास सलाह दी है।
- गर्भवती महिलाएं खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह पर ही दवा लें।
- डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट, प्लेटलेट काउंट, शरीर में फ्लूड की स्थिति की जांच और अन्य चेकअप की सलाह दे सकते हैं।
- प्रेग्नेंसी कितने हफ्तों की है और इंफेक्शन कितना गंभीर है, इसके आधार पर मां और शिशु का इलाज किया जाता है।
- डेंगू में बुखार या दर्द के लिए कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह से ही लें।
- किसी भी तरह की पेनकिलर दवा खुद से न लें, क्योंकि इससे ब्लीडिंग का रिस्क बढ़ सकता है।
डॉक्टर की सलाह
Dr. Chetna Jain कहती हैं कि अगर प्रेग्नेंट महिला को ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत अस्पताल जाकर इलाज शुरू कराएं।
- तेज या लगातार पेट दर्द
- बार-बार उल्टी
- मसूड़ों या नाक से खून आना
- खून की उल्टी या मल में खून
- सांस लेने में परेशानी
- बहुत ज्यादा कमजोरी या बेचैनी महसूस होना
- चक्कर या बेहोशी
- स्किन का पीला, बहुत फीका या ठंडा पड़ना
- पेशाब कम होना
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निष्कर्ष
Dr. Chetna Jain कहती हैं कि प्रेग्नेंसी में डेंगू का मतलब यह नहीं है कि मां या शिशु को निश्चित रूप से गंभीर नुकसान होगा, लेकिन प्रेग्नेंसी में डेंगू को हाई रिस्क कंडीशन मानकर ही इलाज किया जाता है। अगर महिला में डेंगू के लक्षण गंभीर दिखाई देते हैं, तो तुरंत इलाज कराना जरूरी है। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं को मच्छरों से बचाव करना जरूरी है, ताकि डेंगू जैसी बीमारी के रिस्क को कम किया जा सके।
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FAQ
प्रेग्नेंसी में डेंगू होने पर प्लाज्मा लीकेज क्यों ज्यादा खतरनाक होता है?
प्लाज्मा लीकेज से मां का ब्लड प्रेशर में अचानक लो हो सकता है, जिससे डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS) का खतरा बढ़ जाता है। इससे भ्रूण तक ऑक्सीजन और ब्लड की सप्लाई प्रभावित होती है।प्रेग्नेंसी के दौरान डेंगू के मरीजों को अस्पताल में भर्ती कब हो जाना चाहिए?
अगर गर्भवती महिला को बार-बार उल्टी हो, पेट में तेज दर्द, मसूड़ों या नाक से खून आना, प्लेटलेट्स लगातार गिरना या सांस लेने में तकलीफ हो, तो तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना जरूरी हो जाता है।
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Aug 17, 2026 19:02 IST
Modified By : Aneesh Rawat Aug 17, 2026 19:02 IST
Modified By : Aneesh RawatAug 17, 2026 19:02 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Chetna Jain
