मेनोपॉज होना महिलाओं में नेचुरल प्रोसेस है। करीब 50 की उम्र के आस-पास जब महिला को एक साल तक पीरियड्स नहीं होते, तो इसे मेनोपॉज मान लिया जाता है। इसके बाद ब्लीडिंग होना नॉर्मल नहीं है, इसलिए अगर किसी महिला को मेनोपॉज के बाद भी ब्लीडिंग होती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मेनोपॉज के बाद इस तरह की ब्लीडिंग किसी बीमारी का संकेत तो नहीं है? इस बारे में जानने के लिए हमने Dr. Latika Singh Sinsinwar, Obstetrician and Gynecologist, Cloudnine Group of Hospitals, Noida से बात की। उन्होंने बताया कि कई बार महिलाएं इसे उम्र से जुड़ा बदलाव मान लेती हैं या फिर कम ब्लीडिंग होना सोचकर डॉक्टर से चेकअप नहीं कराती। मेनोपॉज के बाद होने वाली ब्लीडिंग को पोस्टमेनोपॉजल ब्लीडिंग (Postmenopausal Bleeding) कहा जाता है।
मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग क्यों होती है?
Dr. Latika Singh Sinsinwar कहती हैं, “वैसे तो एक साल तक पीरियड्स न आएं हो, तो मेनोपॉज हो जाता है, लेकिन अगर किसी महिला को मेनोपॉज के बाद भी योनि से खून आने लगे, तो उसे पोस्टमेनोपॉजल ब्लीडिंग कहा जाता है। इसमें किसी महिला को सिर्फ कुछ बूंदें नजर आती हैं, तो किसी को गुलाबी या भूरे रंग का डिस्चार्ज दिख सकता है। कुछ मामलों में ब्लीडिंग पीरियड्स जैसी भी हो सकती है। इसके पीछे होने के कई कारण हो सकते हैं।"
1. एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी
Dr. Latika Singh Sinsinwar ने बताया कि मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। इससे योनि और गर्भाशय की अंदरूनी परत में बदलाव आ सकते हैं। ये टिश्यू पहले के मुकाबले और ज्यादा सेंसिटिव हो सकते हैं। ऐसे में योनि में सूखापन, जलन या सूजन के साथ कभी-कभी हल्की ब्लीडिंग भी हो सकती है।
2. गर्भाशय में पॉलिप होना
Dr. Latika Singh Sinsinwar ने कहा, “गर्भाशय या सर्विक्स में पॉलिप यानी टिश्यू की बढ़ोतरी होने पर भी ब्लीडिंग हो सकती है। कई पॉलिप कैंसर वाले नहीं होते, लेकिन अगर ब्लीडिंग हो रही है और लगातार है, तो इसके कारणों को जानना बहुत जरूरी है।”
3. गर्भाशय की अंदरूनी परत का मोटा होना
Dr. Latika Singh Sinsinwar के मुताबिक, कुछ महिलाओं में मेनोपॉज के बाद गर्भाशय की अंदरूनी परत असामान्य रूप से मोटी हो सकती है। इस कंडीशन को एंडोमेट्रियल हाइपरप्लासिया (Endometrial Hyperplasia) कहा जाता है। इस तरह के मामलों में भविष्य में कैंसर होने का रिस्क बढ़ सकता है। इसलिए मेनोपॉज के बाद अगर ब्लीडिंग हो रही है, तो इस कंडीशन के होने की भी जांच की जाती है।
bleeding after menopause
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4. गर्भाशय की अंदरूनी परत का कैंसर (एंडोमेट्रियल कैंसर)
Dr. Latika Singh Sinsinwar कहती हैं, “मेनोपॉज के बाद होने वाली ब्लीडिंग कभी-कभी एंडोमेट्रियल कैंसर यानी गर्भाशय की अंदरूनी परत के कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि ब्लीडिंग होने पर महिला को कैंसर ही है। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं होती। कई बार इसका कारण कैंसर नहीं होता है, लेकिन समय पर इसकी जांच कराना बहुत जरूरी है।”
5. हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी
Cleveland Clinic के मुताबिक, अगर महिलाएं हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी लेने के बाद बंद कर देती है या कुछ बदलाव करती हैं, तो इससे भी मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग होने का रिस्क रहता है। इसलिए हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी लेने से पहले डॉक्टर से पूरी जानकारी लें और इसे खुद से ही बंद न करें।
पीरियड्स बंद होने के बाद ब्लीडिंग होने के अन्य कारण
Cleveland Clinic के अनुसार, मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग होने के कारणों में सर्वाइकल कैंसर, सर्विक्स में सूजन या इंफेक्शन होना, ब्लैडर या मलाशय के आस-पास के अंगों से ब्लीडिंग होना और योनि में चोट लगने या खरोंच से भी ब्लीडिंग हो सकती है। इसलिए असामान्य ब्लीडिंग होने पर घरेलू उपाय करने के बजाय डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।
मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग होने पर जांच
Dr. Latika Singh Sinsinwar ने कहा, “अगर मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग होती है, तो सबसे पहले डॉक्टर को जानकारी दें कि ब्लीडिंग कब शुरू हुई, कितने समय तक रही, कितनी ब्लीडिंग हुई। अगर ऐसा पहले भी हो चुका है, तो उसकी जानकारी भी दें। अगर मेनोपॉज के बाद हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी ली है, तो उसकी जानकारी देना भी बहुत जरूरी है। इसके बाद ही महिला की कंडीशन देखकर जांच की सलाह दी जा सकती है।”
- पेल्विक जांच - योनि, सर्विक्स और आसपास के हिस्सों की जांच की जा सकती है, ताकि ब्लीडिंग के कारणों का जाना जा सके।
- ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड - इसमें योनि के रास्ते अल्ट्रासाउंड करके गर्भाशय की अंदरूनी परत की मोटाई और गर्भाशय की स्थिति देखी जाती है।
- एंडोमेट्रियल बायोप्सी - जरूरत पड़ने पर गर्भाशय की अंदरूनी परत से टिश्यू का छोटा नमूना लेकर उसकी जांच की जाती है।
- हिस्टेरोस्कोपी - कुछ मामलों में एक पतले कैमरे की मदद से गर्भाशय के अंदर देखा जाता है। जरूरत होने पर टिश्यू का सैंपल भी लिया जा सकता है।
- पैप स्मीयर - पैप स्मीयर सर्विक्स की जांच का सबसे आम तरीका है। इसमें टिश्यू के असामान्य बदलावों की जांच की जाती है, जो भविष्य में कैंसर में बदल सकते हैं।
डॉक्टर की सलाह
Dr. Latika Singh Sinsinwar कहती हैं, “सबसे जरूरी है कि मेनोपॉज के बाद अगर महिला को ब्लीडिंग हो रही है, तो उसकी जांच के लिए तुरंत डॉक्टर से मिले। कई बार समय पर जांच कराने से महिला को गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है। कई महिलाएं चेकअप से डर जाती है, लेकिन मैं साफ कर दूं कि हर महिला को सभई तरही के चेकअप की जरूरत नहीं होती है। कई बार डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री, लक्षणों और शुरुआती जांच से ही महिला को ब्लीडिंग के कारण बता देते हैं।”
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निष्कर्ष
मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग का कारण योनि या गर्भाशय की परत का पतला होना भी हो सकता है, जिसका इलाज आसानी से किया जा सकता है। इसलिए अगर मेनोपॉज के बाद महिला को ब्लीडिंग होती है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर डॉक्टर की सलाह लेकर जरूरी जांच कराएं, ताकि शरीर में हो रहे बदलावों की पहचान की जा सके।
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FAQ
क्या मेनोपॉज के बाद यौन संबंध बनाने के बाद होने वाली ब्लीडिंग चिंताजनक है?
सेक्स के बाद ब्लीडिंग होना सर्विक्स में इंफेक्शन, सर्वाइकल पॉलिप या योनि के बहुत ज्यादा सूखेपन के कारण हो सकती है। इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत पेप स्मीयर टेस्ट करवाएं।क्या थायरॉयड या डायबिटीज जैसी बीमारियां पोस्ट-मेनोपॉजल ब्लीडिंग के खतरे को बढ़ाती हैं?
अनियंत्रित डायबिटीज, मोटापा और थायरॉयड की समस्या शरीर में एस्ट्रोजन के असंतुलन को बढ़ावा देती हैं। इससे गर्भाशय की अंदरूनी परत असामान्य रूप से मोटी होने लगती है, जिससे ब्लीडिंग का रिस्क बढ़ सकता है।
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Oct 20, 2026 17:12 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Latika Singh Sinsinwar
