Fri Oct 16, 2026 | 08:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Chetna Jain , Gynecologist

50 की उम्र के बाद पीरियड्स में हो रहे हैं बदलाव, डॉक्टर से जानें मेनोपॉज आने में कितना समय लग सकता है?

50 की उम्र के बाद महिलाओं में तेजी से हार्मोन बदलने लगते हैं, क्योंकि इस उम्र में महिलाओं को मेनोपॉज आने का समय होता है। ऐसे में महिलाओं का सवाल होता है कि मेनोपॉज कब होगा? इस लेख में डॉक्टर ने मेनोपॉज से जुड़े बदलावों को विस्तार से समझाया है।
50 की उम्र के बाद पीरियड्स में हो रहे हैं बदलाव, डॉक्टर से जानें मेनोपॉज आने में कितना समय लग सकता है?50 की उम्र के बाद पीरियड्स में हो रहे हैं बदलाव, डॉक्टर से जानें मेनोपॉज आने में कितना समय लग सकता है?

50 की उम्र के बाद महिलाओं के पीरियड्स में कई बदलाव होते हैं। इस दौरान महिलाओं को पीरियड्स कभी आते हैं, तो कभी मिस हो जाते हैं। ऐसे में दो पीरियड के बीच का अंतर बढ़ जाता है। पीरियड्स में बदलाव होने के कारण कुछ महिलाओं को रात में पसीना आने लगता है, नींद ठीक से नहीं आती या छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन महसूस होता है। कई बार इन बदलावों को उम्र बढ़ने का असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन ये पेरिमेनोपॉज के संकेत भी हो सकते हैं। इस बारे में गुरुग्राम के Cloudnine Group of Hospitals के Obstetrics & Gynecology विभाग की Director Dr. Chetna Jain कहती हैं कि मेनोपॉज की शुरुआती स्टेज को पेरिमेनोपॉज कहा जाता है। इसमें महिला का शरीर धीरे-धीरे मेनोपॉज की ओर बढ़ रहा होता है। ऐसे में 50 साल के पार की महिलाओं को अगर शारीरिक बदलाव नजर आते हैं, तो मेनोपॉज होने के चांस ज्यादा होते हैं।

पेरिमेनोपॉज होने के बाद कितने समय में आता है मेनोपॉज?

Dr. Chetna Jain कहती हैं, “भारत के परिपेक्ष में देखेंगे, तो पेरिमेनोपॉज की शुरुआत 40 साल की उम्र के आसपास हो सकती है। हालांकि, हर महिला में इसका समय अलग-अलग हो सकता है। कुछ महिलाओं को इसके लक्षण बहुत ज्यादा और तेजी से दिखने लगते हैं, तो कुछ महिलाओं को यह बदलाव देरी से महसूस होता है। आमतौर पर पेरिमेनोपॉज स्टेज औसतन करीब चार साल तक रह सकती है, लेकिन कुछ महिलाओं में ये आठ साल या इससे भी ज्यादा हो सकती है। इसलिए यह तय कर पाना मुश्किल है कि किसी महिला को पेरिमेनोपॉज शुरू होने के कितने महीने या साल बाद मेनोपॉज होगा। अगर 50 साल की उम्र के बाद पीरियड्स अनियमित होने लगें या पेरिमेनोपॉज से जुड़े दूसरे लक्षण दिखाई दें, तो मेनोपॉज कुछ महीनों के भीतर भी हो सकता है।”

मेनोपॉज होने के समय पर रिसर्च क्या कहती है?

PubMed के मुताबिक, साल 2009 से लेकर 2020 के दौरान मेनोपॉज की उम्र पर कुल 202 स्टडी का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि भारत में मेनोपॉज की औसत आयु 46.6 साल है। इसके अलावा, पहले पीरियड शुरू होने की उम्र का मेनोपॉज से कोई खास प्रभाव नहीं होता।

Cleveland Clinic के अनुसार, महिलाओं को औसतन 52 साल की उम्र में मेनोपॉज हो सकता है। जब लगातार 12 महीने तक प्राकृतिक रूप से पीरियड्स न आए हों और इसके पीछे कोई दूसरा कारण न हो, तो यह मेनोपॉज हो चुका है। हालांकि, कुछ मामलों में पीरियड्स न आने का मतलब यह नहीं है कि मेनोपॉज हो चुका है। इसलिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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मेनोपॉज से पहले शरीर में कौन से बदलाव होते हैं?

Dr. Chetna Jain ने कहा कि महिलाओं को मेनोपॉज से पहले हार्मोन के लेवल में उतार-चढ़ाव होने के कारण ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, जरूरी नहीं है कि ये लक्षण सभी महिलाओं में ही दिखाई दें।

  • पीरियड्स के पैटर्न में बदलाव नजर आ सकता है। किसी महीने ब्लीडिंग कम हो सकती है, तो किसी महीने ज्यादा हो सकती है।
  • पीरियड्स पहले की तुलना में जल्दी या देर से भी आ सकते हैं।
  • कुछ महिलाओं को अचानक शरीर में गर्मी महसूस होती है।
  • रात में पसीना आने से नींद टूट सकती है या सोने में परेशानी हो सकती है।
  • मूड में बदलाव, चिड़चिड़ापन, बेचैनी और किसी काम पर ध्यान लगाने में मुश्किल भी हो सकती है।
  • योनि में सूखापन भी महसूस होने वाला एक लक्षण है।

50 की उम्र के बाद किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

Dr. Chetna Jain का कहना है कि मेनोपॉज से पहले पीरियड्स का अनियमित होना आम बात हो सकती है, लेकिन हर तरह की ब्लीडिंग को हार्मोनल बदलाव नहीं मानना चाहिए। अगर महिलाओं की उम्र 50 साल से ज्यादा हो चुकी है, तो ये लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

  • अगर पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो रही है, कई दिनों तक रक्तस्राव बंद नहीं हो रहा या दो पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लें।
  • सेक्शुअल इंटरकोर्स के बाद ब्लीडिंग होने की भी जांच करानी चाहिए।
  • ब्लीडिंग के साथ चक्कर आना या बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होना भी इग्नोर नहीं करना चाहिए।
  • जिन महिलाओं को थायराइड, PCOS, एंडोमेट्रियोसिस या यूटरस में फाइब्रॉयड्स की समस्या है, तो किसी भी बदलाव होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

मेनोपॉज से पहले सेहत का ख्याल कैसे रखें?

Dr. Chetna Jain के मुताबिक, मेनोपॉज से पहले महिलाओं को कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • बैलेंस्ड डाइट लें। हड्डियों को सेहतमंद रखने के लिए कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर आहार लेना चाहिए।
  • रोजाना रेगुलर एक्सरसाइज या वॉक जरूर करें।
  • स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए योग या मेडिटेशन किया जा सकता है।
  • जरूरत के अनुसार डॉक्टर हार्मोनल थेरेपी की सलाह दे सकते हैं, लेकिन यह डॉक्टर महिला की कंडीशन को देखते हुए ही फैसला लेते हैं।
  • अगर गर्मी लगने, रात में पसीना आने, नींद की परेशानी, मूड में बदलाव या योनि में सूखापन जैसे लक्षण रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहे हैं, तो डॉक्टर से बात करें।

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निष्कर्ष
50 की उम्र के बाद मेनोपॉज होना महिलाओं के लिए बहुत ही नेचुरल प्रोसेस है। कुछ महिलाओं को मेनोपॉज 45 की उम्र के बाद भी हो सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि मेनोपॉज कोई बीमारी या डिसऑर्डर नहीं है। हालांकि, अगर मेनोपॉज से जुड़े लक्षण दिखाई देते हैं और ये रोजाना के कामों में परेशानी पैदा कर रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

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FAQ

  • क्या पेरिमेनोपॉज की स्थिति में भी महिला प्रेग्नेंट हो सकती है?

    हां, महिला प्रेग्नेंट हो सकती है। जब तक लगातार पूरे 12 महीनों तक पीरियड्स पूरी तरह बंद न हो जाएं, तब तक ओव्यूलेशन अनिश्चित रूप से हो सकता है। इसलिए जब तक मेनोपॉज कंफर्म न हो जाए, तब तक अनचाहे गर्भ से बचने के लिए सुरक्षा के उपाय अपनाना जरूरी है।
  • मेनोपॉज के बाद महिलाओं में दिल की बीमारियों का खतरा क्यों बढ़ जाता है?

    एस्ट्रोजन हार्मोन महिलाओं की धमनियों को लचीला और स्वस्थ रखने में मदद करता है। मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर तेजी से कम होने लगता है, जिससे खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है और दिल का दौरा व हाई ब्लड प्रेशर का रिस्क बढ़ सकता है। 

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 16, 2026 19:26 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Chetna Jain