मेनोपॉज में महिलाओं में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं। इस वजह से उन्हें कई तरह के फिजिकल और मेंटल परेशानियों से गुजरना पड़ सकता है। कई महिलाओं को गर्मी ज्यादा लगना, हॉट फ्लैश महसूस होना, रात में पसीने आना, मूड चिड़चिड़ा होना, थकान, एग्जायटी और वजाइनल ड्राइनेस की समस्या हो सकती है। ऐसे समय में कई महिलाएं आयुर्वेदिक तरीके भी अपनाना चाहती हैं, ताकि हार्मोनल बदलावों को मैनेज किया जा सके। इसमें अश्वगंधा और शतावरी का नाम सबसे ज्यादा आता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दोनों को मेनोपॉज के दौरान लिया जा सकता है? इस बारे में Dr. Chetan Sharma, Sr. Ayurveda Consultant, Sarvodaya Hospital, Faridabad कहते हैं कि मेनोपॉज के दौरान अश्वगंधा या शतावरी लेना काफी हद तक लक्षणों पर निर्भर करता है।
मेनोपॉज में अश्वगंधा कब लिया जा सकता है?
Dr. Chetan Sharma कहते हैं, “आयुर्वेद में अश्वगंधा को बल्य और रसायन द्रव्य माना जाता है। मेनोपॉज के दौरान जिन महिलाओं में स्ट्रेस, बेचैनी, थकान और नींद की समस्या ज्यादा होती है, उन्हें आयुर्वेदाचार्य की सलाह पर अश्वगंधा लेने की सलाह दी जा सकती है। हालांकि, अश्वगंधा के मेनोपॉज के लक्षणों को कम या मैनेज करने जैसे इलाज को लेकर ज्यादा स्टडी नहीं हुई है।”
Pharmacological Research में मेनोपॉज के दौरान लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए अश्वगंधा लेने के असर को चेक किया गया है। इसमें बताया गया कि रोजाना 125 से 600 मिलीग्राम अश्वगंधा लेने से कार्टिसोल हार्मोन का स्तर कम हुआ है। इससे स्ट्रेस और एग्जायटी की कमी आती है व नींद की क्वालिटी में सुधार होता है। इसके अलावा, हॉट फ्लैश कम होते हैं और एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ता है। इस रिसर्च में बताया गया है कि अश्वगंधा लेने से मेनोपॉज के दौरान महिलाओं की जिंदगी में सुधार होता है।
मेनोपॉज में शतावरी कब ली जा सकती है?
Dr. Chetan Sharma ने कहा, “आयुर्वेद में शतावरी का इस्तेमाल काफी लंबे समय से हो रहा है। जो महिलाएं पेरिमेनोपॉज से गुजर रही हैं, अगर वे वजाइनल ड्राइनेस, अनिद्रा और रात को पसीना आने जैसी समस्याओं से बचाव के लिए शतावरी लिया जा सकता है। हालांकि, इसे लेने से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें, क्योंकि बिना सलाह लेने के गंभीर नुकसान भी हो सकते हैं।”

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क्या दोनों को एक साथ लिया जा सकता है?
Dr. Chetan Sharma कहते हैं कि दोनों को एक साथ लिया जा सकता है या नहीं, ये महिला की मेडिकल कंडीशन और उम्र को देखकर लिया जा सकता है। कुछ लोग मान लेते हैं कि आयुर्वेदिक जड़ी-बुटियों को एक साथ लेने पर कुछ नुकसान नहीं होगा, तो ऐसा नहीं होता है। अगर बिना एक्सपर्ट की सलाह के गलत तरीके से अश्वगंधा या शतावरी को लिया जाए, तो इससे नुकसान भी हो सकता है। इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक दवा या जड़ी-बूटी के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
Frontiers in Reproductive Health में प्रकाशित अध्ययन में 45 से 65 साल की 135 महिलाओं को 8 हफ्ते तक शतावरी और शतावरी व अश्वगंधा मिलाकर दिया गया। जिन महिलाओं को शतावरी और अश्वगंधा मिलाकर दिया गया था, उनमें 4वें और 8वें हफ्ते मूड, स्ट्रेस, हॉट फ्लैशेस में सुधार दर्ज किया गया। इसके अलावा, इन दोनों जड़ी-बूटियों का किडनी, लिवर और थायराइड फंक्शन पर कोई असर नहीं पड़ा।
इस रिसर्च में बताया गया कि शतावरी के फाइटोएस्ट्रोजेनिक गुण (शतावरिन्स) एस्ट्रोजन रिसेप्टर्स के साथ जुड़कर हार्मोनल संतुलन बनाने और हॉट फ्लैशेस व अनिद्रा को कम करने में मदद करते हैं।
वहीं अश्वगंधा पॉवरफुल एडाप्टोजेन है, जो स्ट्रोस हार्मोन के स्तर को कम करके मेंटल हेल्थ में सुधार करने में मदद करता है।
अश्वगंधा या शतावरी में से कौन-सा बेहतर?
Dr. Chetan Sharma का कहना है, “इसका कोई एक जवाब हर महिला के लिए नहीं हो सकता। अगर किसी महिला को मेनोपॉज के दौरान स्ट्रेस, थकान या नींद में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह के बाद अश्वगंधा लिया जा सकता है। वहीं हॉट फ्लेश, पसीना आना, मूड स्विंग्स को मैनेज करने के लिए डॉक्टर की सलाह पर शतावरी ली जा सकती है, लेकिन किसी को भी लेने से पहले डॉक्टर की सलाह बहुत जरूरी है।”
आयुर्वेदाचार्य की सलाह
Dr. Chetan Sharma सलाह देते हैं कि मेनोपॉज के लक्षणों को मैनेज करते समय महिला के लक्षणों, उसकी गंभीरता, उम्र और मेडिकल हिस्ट्री चेक करना जरूरी होता है। इसके अलावा, यह समझना भी जरूरी है कि हर महिला को अश्वगंधा या शतावरी शुरू करना भी जरूरी नहीं है। अगर मेनोपॉज के लक्षण हल्के हैं, तो महिलाओं को अपनी डाइट, फिजिकल एक्टिविटी, वजन, पर्याप्त नींद और स्ट्रेस मैनेज करना चाहिए।
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निष्कर्ष
मेनोपॉज के दौरान महिलाओं को कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है और ऐसे में अगर किसी आयुर्वेदिक तरीके से लक्षणों को मैनेज किया जा सके, तो इससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता। हालांकि, डॉ. चेतन अश्वगंधा या शतावरी लेने से पहले आयुर्वेदाचार्य की सलाह लेने पर जोर देते हैं। अगर किसी महिला को थायराइड, लिवर या ऑटोइम्यून की समस्या है, तो खुद से दवा लेना बिल्कुल भी सही नहीं है। इसके अलावा, अगर महिला कोई भी एलोपैथी की दवा ले रही हैं, तो उसके बारे में भी जानकारी देना जरूरी होता है।
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FAQ
अश्वगंधा या शतावरी का सेवन दूध के साथ करना क्यों ज्यादा फायदेमंद माना जाता है?
आयुर्वेद में दूध को कैरियर माना गया है। दूध इन जड़ी-बूटियों के फैट-सॉल्यूबल एक्टिव कम्पाउंड्स को शरीर में बेहतर तरीके से सोखने में मदद करता है, और साथ ही दूध का कैल्शियम हड्डियों को मजबूती देता है।शतावरी और अश्वगंधा का असर दिखने में कितना समय लगता है?
इनका असर तुरंत नहीं दिखता। नियमित रूप से सही खुराक में लेने पर 2 से 4 हफ्तों के भीतर नींद, मूड, थकावट और हॉट फ्लैशेज जैसे लक्षणों में सुधार महसूस होने लगता है।
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Sep 14, 2026 16:37 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Chetan Sharma