Fri Oct 16, 2026 | 05:40 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

World Menopause Day: मेनोपॉज में रात को परेशान करते हैं हॉट फ्लैशेज? राहत पाने के लिए अपनाएं ये उपाय

मेनोपॉज के बाद कई महिलाओं को रात के समय हॉट फ्लैशेज की समस्या हो जाती है। इसे मैनेज करना मुश्किल नहीं है। इस लेख में जीवनशैली और खान-पान से जुड़े कुछ ऐसे टिप्स दिए गए हैं, जो आपको हॉट फ्लैशेज से डील करने में मदद कर सकते हैं। जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
World Menopause Day: मेनोपॉज में रात को परेशान करते हैं हॉट फ्लैशेज? राहत पाने के लिए अपनाएं ये उपायWorld Menopause Day: मेनोपॉज में रात को परेशान करते हैं हॉट फ्लैशेज? राहत पाने के लिए अपनाएं ये उपाय

मेनोपॉज होने के बाद महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है। ऐसे में उन्हें तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी क्रम में उन्हें रात के समय हॉट फ्लैशेज भी होने लगते हैं। हॉट फ्लैशेज यानी बहुत ज्यादा पसीना आना, सामान्य तापमान होने पर भी अत्यधिक गर्मी लगना आदि। सवाल है, मेनोपॉज के बाद महिलाएं इससे राहत के लिए क्या कुछ कर सकती हैं?

इस बारे में वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्टडॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "अक्सर महिलाओं को मेनोपॉज के बाद हाॅट फ्लैशेज की समस्या हो जाती है। हालांकि, ऐसा सब महिलाओं के साथ हो, यह जरूरी नहीं है। हां, अगर आपको यह परेशानी हो रही है, तो इसे इग्नोर न करें। घर के तापमान को कम रखें, कंफर्टेबल कपड़े पहनें और गर्मी या आग के पास जाने से बचें।"

मेनोपॉज के दौरान रात में हॉट फ्लैशेज क्यों होते हैं?

How To Deal With Nighttime Hot Flashes During MenopauseHow To Deal With Nighttime Hot Flashes During Menopause

The Journal of Steroid Biochemistry and Molecular Biology में प्रकाशित रिव्यू आर्टिकल के अनुसार,  मेनोपॉज के दौरान रात में हॉट फ्लैशेज का मुख्य कारण शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में गिरावट है। असल में, एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से ब्रेन का बॉडी टेंप्रेचर कंट्रोल करने वाला हिस्सा यानी हाइपोथैलेमस काफी सेंसिटिव हो जाता है। यही कारण है कि आपका ब्रेन सामान्य तापमान को भी बहुत ज्यादा गर्मी समझने लगता है। ऐसे में बॉडी खुद को ठंडा रखने के लिए त्वचा की ओर ब्लड फ्लो बढ़ा देता है, जिससे शरीर में पसीने आने की प्रक्रिया भी तेज हो जाती है। अगर मेनोपॉज से गुजर रही महिलाएं रात के समय कैफीन, शराब या अधिक मसालेदार चीजें खाती हैं, तो उनकी समस्या और बढ़ सकती है।

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हॉट फ्लैशेज से राहत पाने के लिए प्रभावी तरीके

  1. घर का तापमान कम करेंः वैसे तो अचानक तापमान में काफी गिरावट आ गई है। अगर इसके बावजूद, आपकी हॉट फ्लैशेज परेशान कर रहे हैं, तो बेहतर है कि आप अपने कमरे के टेंप्रेचर को कम करें। घर में एसी को उतनी तापमान पर चलाएं, जिससे आप सहज महसूस करें।
  2. कंफर्टेबल कपड़े पहनेंः हॉट फ्लैशेज होने पर महिलाओं को अपने पहनावे पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ऐसे कपड़े नहीं पहनने चाहिए, जिससे अधिक गर्मी लगे। ढीले और कॉटन फैब्रिक इन दिनों के लिए अच्छे विकल्प होते हैं। इसके अलावा, बेडशीट भी सूती की ही लें। हॉट फ्लैशेज में कमी आती है।
  3. ट्रिगर से बचेंः मेनोपॉज के बाद हॉट फ्लैशेज होना कोई हैरान करने वाली समस्या नहीं है। हालांकि, हॉट फ्लैशेज के कारण कुछ महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित होती है। ऐसे में जरूरी है कि वे उन ट्रिगर्स को पहचानें, जिससे हॉट फ्लैशेज बढ़ जाते हैं। National Institute of Aging के अनुसार, मेनोपॉज के बाद हॉट फ्लैशेज से बचने के लिए शराब, कॉफी, निकोटिन और मसालेदार चीजों से दूर रहना चाहिए। इससे हॉट फ्लैशेज से निपटने में मदद मिलती है। 

नींद की गुणवत्ता सुधारने के लिए सही खान-पान और डाइट

National Institute Of Aging के अनुसार, मेनोपॉज में हॉट फ्लैशेज होने के कारण कई बार महिलाओं को अच्छी और गहरी नींद लेने में दिक्कत आती है। ऐसी स्थिति में जरूरी है कि महिलाएं अपने खान-पान और डाइट का विशेष ध्यान रखें-

  1. फाइटोएस्ट्रोजन युक्त चीजों का सेवन करेंः हॉट फ्लैशेज से निपटने के लिए सोयाबीन, टोफू, तिल और अलसी का सेवन करें। इनमें प्राकृतिक रूप से फाइटोएस्ट्रोजन होते हैं, जो शरीर में एस्ट्रोजन के घटते स्तर को संतुलित करने में मदद करते हैं।
  2. मैग्नीशियम और ट्रिप्टोफैन युक्त चीजेंः बदाम, कद्दू के बीज, केला और गर्म दूध ट्रिप्टोफैन और मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत हैं। इससे नर्वस सिस्टम शांत होता है और नींद के हार्मोन को बढ़ावा मिलता है।
  3. पिएं हर्बल चायः मेनोपॉज हो चुकी महिलाओं को सोने से आधा घंटा पहले कैमोमाइल टी या पुदीने की चाय पीनी चाहिए। इससे तनाव कम होता है और शरीर को भी ठंडक मिलती है।
  4. पर्याप्त मात्रा में पानी पिएंः मेनोपॉज के बाद हॉट फ्लैशेज से निपटने के लिए और रात को बेहतर नींद लेने के लिए शाम के समय नारियल पानी या पर्याप्त मात्रा में सादा पानी पिएं। इससे बॉडी हाइड्रेटेड रहती है और रात को नींद भी बेहतर आती है।

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डॉक्टर से कब संपर्क करेंः गंभीर लक्षणों की पहचान

डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, वैसे तो मेनोपॉज में हॉट फ्लैशेज होना अपने आप में एस्ट्रोजन के स्तर में आई कमी का संकेत है। कई बार यह स्थिति बहुत बिगड़ जाती है, लेकिन महिलाएं तब भी डाॅक्टर के पास नहीं जाती हैं। असल में, उन्हें यह पता ही नहीं होता है कि डाॅक्टर के पास जाने का सही समय क्या है? यहां बताए गए कुछ लक्षणों पर गौर करें और समय पर डाॅक्टर के पास जरूर जाएं-

  1. सीने में दर्द होना और हृदय गति का बढ़ना।
  2. बुखार, लगातार थकान और तेजी से वजन का घटना।
  3. अचानक हॉट फ्लैशेज की स्थिति का बिगड़ना।
  4. महज 40 साल की उम्र में ही मेनोपॉज के लक्षण नजर आना।
  5. यौन संबंध बनाने या पीरियड्स के बाद वजाइनल ब्लीडिंग होना।

निष्कर्ष

मेनोपॉज के बाद हॉट फ्लैशेज होते हैं, तो इससे डरे नहीं। इसे घर में ही आसानी से मैनेज किया जा सकता है। इसके लिए, अपनी जीवनशैली और खान-पान में कुछ जरूरी बदलाव करें, जैसे गर्म चीजें यानी मसालेदार चीजों से दूर रहें, कैफीन का सेवन न करें। इसी तरह, जीवनशैली में बदलाव करें, जैसे रात को अच्छी नींद लेने की कोशिश करें, कमरे का तापमान ठंडा रखें आदि। हां, जीवनशैली और खान-पान में बदलाव के बावजूद समस्या बनी रहे, तो बेहतर है कि समय पर डाॅक्टर के पास जाएं और अपना इलाज करवाएं।

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FAQ

  • क्या रात में होने वाले हॉट फ्लैशेज का कोई स्थाई हार्मोनल उपचार मौजूद है?

    हॉट फ्लैशेज से बचने के लिए डॉक्टर हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) या नॉन-हार्मोनल प्रिस्क्रिप्शन दवाओं का सुझाव दे सकते हैं। इससे हाइपोथैलेमस के तापमान नियंत्रण को संतुलित करने में मदद मिलती है।
  • हॉट फ्लैशेज की समस्या मेनोपॉज के बाद औसतन कितने वर्षों तक बनी रह सकती है?

    अधिकांश महिलाओं में हॉट फ्लैशेज की समस्या 4 से 7 वर्षों तक रहती है, लेकिन कुछ मामलों में इससे अधिक समय तक रह सकती है।

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Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Oct 16, 2026 16:20 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta