अनहेल्दी लाइफस्टाइल और हार्मोन असंतुलन के कारण लड़कियों को पीरियड्स 7-8 साल की उम्र में शुरू हो जाती है। पहले पीरियड्स 12 साल के बाद आते थे, लेकिन अब उम्र से पहले पीरियड्स शुरू होने पर पेरेंट्स का अक्सर सवाल होता है कि क्या इतनी कम उम्र में पीरियड्स शुरू होने का असर आगे चलकर उनकी सेहत पर पड़ सकता है? क्या इससे ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है? इस बारे में हमने Dr. Vishnu Hari, Associate Director & Head (Unit I) - Medical Oncology, Haematology & BMT, Sarvodaya Hospital, Faridabad से बात की। उन्होंने बताया कि ब्रेस्ट कैंसर होने के कई कारण हो सकते हैं। कम उम्र में पीरियड्स शुरू होना भी एक रिस्क फैक्टर हो सकता है, लेकिन सिर्फ इसी कारण महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर हो, ऐसा नहीं हो सकता है।
कम उम्र में पीरियड होना और ब्रेस्ट कैंसर का कनेक्शन
Dr. Vishnu Hari कहते हैं, “लड़कियों के पहले पीरियड को मेनार्की कहा जाता है। इस दौरान लड़कियों के हार्मोन में बदलाव होते हैं। इसमें एस्ट्रोजन ऐसा हार्मोन है, जो ब्रेस्ट के टिश्यू बनाने में मदद करता है। अगर किसी लड़की के कम उम्र में पीरियड शुरू हो जाते हैं और मेनोपॉज भी सामान्य से देर से होता है, तो उसके ब्रेस्ट के टिश्यू लंबे समय तक शरीर के नेचुरल हार्मोन के संपर्क में रह सकते हैं। लंबे समय तक हार्मोन के संपर्क में रहने से ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क देखा गया है। हालांकि, इसके साथ यह समझना भी जरूरी है कि कम उम्र में पीरियड शुरू होना कैंसर का सीधा कारण नहीं हो सकता है। ब्रेस्ट कैंसर होने के कई कारण हो सकते हैं और महिलाओं को सभी रिस्क फैक्टर्स पर ध्यान देना चाहिए।”
रिसर्च क्या कहती है?
Cancer Causes & Control 2026 में प्रकाशित जर्नल में कम उम्र में पीरियड आने और ब्रेस्ट कैंसर के कनेक्शन पर रिसर्च की गई है। इस रिसर्च में 2014 से 2025 के बीच प्रकाशित 74 केस-कंट्रोल अध्ययनों के आंकड़ों का लिया गया था। रिसर्चर्स ने पाया कि 13 साल की उम्र से पहले पीरियड शुरू होने वाली लड़कियों को ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क ज्यादा था। 12 साल की उम्र से पहले पीरियड शुरू होने पर ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क और ज्यादा बढ़ जाता है। रिसर्च में यह भी बताया गया है कि इसका यह कतई मतलब नहीं है कि कम उम्र में पहला पीरियड आने वाली हर लड़की को ब्रेस्ट कैंसर होगा।
Dr. Vishnu Hari बताते हैं कि हालांकि, कम उम्र में पीरियड आने वाली लड़कियों को ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क रहता है, लेकिन इससे डरने की बजाय उन्हें ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े अन्य रिस्क भी देखने चाहिए।
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ब्रेस्ट कैंसर के रिस्क फैक्टर्स क्या है?
CDC के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर के कुछ कारकों को बदलना मुश्किल है, तो कुछ कारकों को नियंत्रित करके ब्रेस्ट कैंसर के रिस्क को कम किया जा सकता है।
ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े कारक, जिन्हें बदला नहीं जा सकता है।
- उम्र बढ़ने के साथ ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क बढ़ सकता है।
- फैमिली हिस्ट्री ब्रेस्ट और ओवरी कैंसर का रिस्क बढ़ा सकती है।
- जिन महिलाओं के स्तन बहुत बड़े होते हैं, उनमें मैमोग्राम के जरिए ट्यूमर देखना मुश्किल हो सकता है।
- जिन महिलाओं को पहले ब्रेस्ट कैंसर हो चुका है, उन्हें दोबारा कैंसर होने का रिस्क बढ़ सकता है।
- अगर किसी महिला की 30 साल की उम्र से पहले छाती या स्तनों की रेडिएशन थेरेपी हो चुकी है, तो उन्हें आगे चलकर ब्रेस्ट कैंसर होने का रिस्क हो सकता है।
रिस्क फैक्टर्स, जिन्हें कंट्रोल करके ब्रेस्ट कैंसर से बचा जा सकता है।
- जो महिलाएं फिजिकली एक्टिव नहीं होती, उन्हें ब्रेस्ट कैंसर होने का रिस्क बढ़ सकता है।
- मेनोपॉज के बाद वजन बढ़ने या मोटापे से ग्रस्त महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा हो सकता है।
- जो महिलाएं हार्मोनल दवाएं लेती हैं, उन्हें इन दवाओं को लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
- 30 साल के बाद पहली प्रेग्नेंसी होना और शिशु को ब्रेस्टफीडिंग न कराना खतरा बढ़ा सकता है।
- ज्यादा शराब पीने वाली महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर होने का रिस्क बढ़ सकता है।
ब्रेस्ट कैंसर के रिस्क को कम करने के लिए क्या करें?
Dr. Vishnu Hari कहते हैं कि पहले पीरियड के समय को तो नहीं बदला जा सकता, लेकिन कुछ आदतें अपनाकर सेहत का ध्यान रखा जा सकता है।
- रोजाना फिजिकल एक्टिविटी करनी चाहिए।
- बैलेंस्ड डाइट जरूर लें।
- हेल्दी वजन बनाए रखना जरूरी है।
- शराब बिल्कुल न पिएं।
- अगर ब्रेस्ट में गांठ, स्किन में बदलाव, निप्पल का अंदर की ओर जाए या खून आने लगे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
- उम्र के अनुसार, समय पर मैमोग्राफी जरूर कराएं।
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डॉक्टर की सलाह
Dr. Vishnu Hari महिलाओं को सलाह देते हैं कि अगर कम उम्र में पीरियड शुरू हो गए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे जरूरी बात यह है कि ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क किसी एक कारक पर निर्भर नहीं करता। इसमें फैमिली हिस्ट्री, उम्र, लाइफस्टाइल में बदलाव और अन्य पहलू भी मायने रखते हैं। अगर महिलाओं को ब्रेस्ट में किसी भी तरह का बदलाव दिखे, तो समय पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
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FAQ
क्या गर्भाशय या अंडाशय निकालने की सर्जरी से यह खतरा खत्म हो जाता है?
हालांकि अंडाशय हटाने से शरीर में एस्ट्रोजन बनना बहुत कम हो जाता है और खतरा घटता है, लेकिन बिना किसी गंभीर बीमारी के इसे बचाव के लिए करना गलत है।छोटी उम्र में पीरियड शुरू होने वाली महिलाओं को मैमोग्राफी टेस्ट किस उम्र से शुरू करना चाहिए?
सामान्य रिस्क वाली महिलाओं को 40 साल की उम्र से हर एक से दो साल में मैमोग्राम कराना चाहिए, लेकिन अगर परिवार में भी ब्रेस्ट कैंसर की हिस्ट्री रही हो, तो 30 से 35 साल की उम्र से ही डॉक्टर की सलाह पर एमआरआई या मैमोग्राफी शुरू कर देनी चाहिए।
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Oct 12, 2026 20:16 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Vishnu Hari
