हर महिला के लिए आमतौर पर पीरियड्स का साइकिल 24 से 38 दिनों के बीच होती है, लेकिन हर महिला के लिए यह जरूरी नहीं है। कई महिलाओं को 28 दिन बाद भी पीरियड्स होने लगते हैं। हालांकि 28 या 30 दिन बाद नियमित पीरियड्स होना सामान्य है, लेकिन अगर पीरियड्स 15 दिन बाद दोबारा आते हैं, तो इसे सामान्य पीरियड्स मान लेना ठीक नहीं है। इस बारे में Dr. Manjeet Arora, Senior Clinical Director at Cloudnine Group of Hospitals, Kailash Colony, Delhi ने कहा कि पीरियड्स का दो हफ्ते में दो बार आने का कारण कई बार शरीर में हो रहे सामान्य हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में किसी स्वास्थ्य समस्या की वजह से भी बार-बार ब्लीडिंग हो सकती है।
15 दिन में दो बार पीरियड्स होना
Dr. Manjeet Arora के अनुसार, अगर हर 15 दिन बाद पीरियड्स हो रहे हो, तो ब्लीडिंग की मात्रा, समय और साथ ही महिला से जुड़े लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए। बार-बार पीरियड्स होने के कई कारण हो सकते हैं।
1. हार्मोन में बदलाव
Dr. Manjeet Arora कहती हैं, “एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन पीरियड्स के साइकिल को कंट्रोल करने में महत्वपूर्ण होते हैं। इसके स्तर में बदलाव होने पर पीरियड्स समय से पहले आ सकते हैं या दो पीरियड्स के बीच हल्की ब्लीडिंग हो सकती है। कई बार महिलाओं को स्ट्रेस, नींद पूरी न होना, वजन में अचानक बदलाव या बहुत ज्यादा एक्सरसाइज जैसी चीजें भी शरीर के हार्मोनल बैलेंस को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में कभी-कभी पीरियड्स का पैटर्न बदल जाता है। अगर बार-बार ऐसा हो रहा है, तो डॉक्टर को दिखाना बहुत जरूरी है।”
2. ओव्यूलेशन के समय हल्की ब्लीडिंग होना
Cleveland Clinic के अनुसार, ओव्यूलेशन से पहले एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल तेजी से कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में गर्भाशय की अंदरूनी परत का एक छोटा हिस्सा वजाइना के रास्ते निकल सकता है। इससे कई बार महिलाओं को हल्की ब्लीडिंग हो सकती है। हालांकि, यह स्पॉटिंग हल्की होती है, लेकिन कुछ दिन रहने के कारण महिलाएं इसे पीरियड्स मान लेती है।
Dr. Manjeet Arora ने कहा, “कई बार महिलाओं को ब्लीडिंग नहीं होती, लेकिन वे इसे पीरियड्स की ब्लीडिंग समझ लेती हैं। कुछ महिलाओं को ओव्यूलेशन के आसपास हल्की स्पॉटिंग हो सकती है। यह ब्लीडिंग आमतौर पर बहुत कम होती है और एक-दो दिन तक रह सकती है। ऐसी कंडीशन में कई बार महिलाओं को लग सकता है कि पीरियड्स समय से पहले शुरू हो गए हैं, लेकिन वह स्पॉटिंग ओव्यूलेशन से जुड़ी हो सकती है। अगर किसी महिला को ऐसा लगता है, तो उसे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।”
3. गर्भनिरोधक दवाएं से पीरियड्स का पैटर्न बदलना
Dr. Manjeet Arora ने बताया कि अगर किसी महिला ने हाल ही में गर्भनिरोधक गोलियां लेनी शुरू की हैं या बंंद की हैं, तो उसके पीरियड्स में भी बदलाव हो सकता है। हालांकि, यह बदलाव कुछ समय के लिए ही होता है। जो महिलाएं IUD जैसे कुछ गर्भनिरोधक तरीकों को अपनाती हैं, उन्हें अनियमित ब्लीडिंग हो सकती है। ऐसे मामलों में भी कुछ समय के लिए पीरियड्स में बदलाव हो सकता है। अगर यह बदलाव लंबे समय तक रहता है, तो इसे बारे में डॉक्टर को जरूर बताएं।
periods after 2 weeks
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4. PCOS या थायराइड होना
Mayo Clinic के अनुसार, पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) को पहले PCOS के नाम से जाना जाता था। इस कंडीशन में महिलाओं को अनियमित पीरियड्स की समस्या हो सकती है। इसमें ओवरी का आकार बढ़ सकता है और उसमें कई फॉलिकल्स जमा हो जाते हैं। इस वजह से पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं।
Dr. Manjeet Arora ने बताया कि जिन महिलाओं के थायराइड हार्मोन का स्तर कम या ज्यादा (हाइपरथायरॉयडिज्म या हाइपोथायरॉयडिज्म) है, उनके पीरियड्स में लगातार बदलाव हो सकता है। कई बार महिलाओं को बहुत जल्दी-जल्दी पीरियड्स होने लगते हैं, तो कुछ महिलाओं को बहुत देर भी हो जाती है। इसलिए अगर 15 दिन में दो बार पीरियड्स हो जाए, तो थायराइड या PMOS का चेकअप भी कराना चाहिए।
5. गर्भाशय की समस्या
Dr. Manjeet Arora कहती हैं, “कई महिलाओं को फाइब्रॉइड्स, पॉलिप या एडेनोमायोसिस जैसी गर्भाशय से जुड़ी समस्याएं होने के कारण दो हफ्ते में दो बार ब्लीडिंग हो सकती है।अगर दो हफ्ते के अंतर पर ब्लीडिंग बार-बार हो रही है, तो इसकी वजह पता करना जरूरी होता है और खासतौर पर जब थोड़े-थोड़े अंतराल में बार-बार पीरियड्स हो और इसके साथ दर्द या ब्लीडिंग की मात्रा में बदलाव भी हो। अगर ऐसा होता है, तो डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरूरी हो जाता है।”
Women's Health के मुताबिक, फाइब्रॉइड्स में महिलाओं को बहुत हैवी ब्लीडिंग हो सकती है। कई बार ऐसी महिलाओं को एनीमिया की समस्या भी देखने को मिल सकती है।
6. प्रेग्नेंसी की संभावना में ब्लीडिंग होना
Dr. Manjeet Arora के अनुसार, अगर किसी महिला को प्रेग्नेंसी की संभावना हो और उसे पहले ही ब्लीडिंग शुरू हो जाए, तो इसे सीधे पीरियड मान लेना सही नहीं है। कई बार शुरुआती प्रेग्नेंसी में भी कुछ महिलाओं को ब्लीडिंग हो सकती है। ऐसी कंडीशन में प्रेग्नेंसी टेस्ट और डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी हो सकता है, ताकि ब्लीडिंग की सही वजह पता चल सके।
डॉक्टर की सलाह
Dr. Manjeet Arora सलाह देती हैं कि अगर दो हफ्ते में बार-बार पीरियड्स या ब्लीडिंग हो रही है और ब्लीडिंग की मात्रा ज्यादा हो, बड़े-बड़े ब्लड क्लॉट्स निकल रहे हों या तेज पेट और पेल्विक दर्द हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार महिलाओं को 15 दिन में दो बार ब्लीडिंग होने से चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना या थकान लगने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसे में कई बार जरूरत पड़ने पर डॉक्टर प्रेग्नेंसी टेस्ट, ब्लड टेस्ट, थायरॉइड जांच या अल्ट्रासाउंड जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं।
निष्कर्ष
अगर 15 दिन में दो बार पीरियड्स कुछ समय के लिए है, तो कई बार यह कोई बीमारी का संकेत नहीं होते, लेकिन अगर यह बार-बार हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज करना नुकसान दे सकता है। महिलाओं को पीरियड्स कब शुरू हुए, कितने दिन चले, ब्लीडिंग कितनी थी और अन्य लक्षण क्या थे? इन बातों पर ध्यान देना चाहिए और समय रहते डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
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FAQ
क्या दो हफ्ते में बार-बार पीरियड्स आने से शरीर में खून की कमी (एनीमिया) हो सकती है?
महीने में दो बार या बार-बार पीरियड्स आने से शरीर में हीमोग्लोबिन और आयरन का स्तर तेजी से गिरता है, जिससे गंभीर थकान, कमजोरी और एनीमिया हो सकता है।क्या पेरीमेनोपॉज की वजह से भी 15 दिनों में पीरियड्स आ सकते हैं?
40 साल की उम्र के बाद पेरीमेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर तेजी से घटता-बढ़ता है, जिससे पीरियड साइकिल छोटी हो जाती है और महीने में दो बार ब्लीडिंग हो सकती है।
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Current Version
Oct 06, 2026 20:20 IST
Modified By : Aneesh Rawat Oct 06, 2026 20:20 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Manjeet Arora
