ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में महिलाओं को लगता है कि सर्जरी के दौरान उनका पूरा स्तन निकाल दिया जाएगा, लेकिन हर मामले में ऐसा जरूरी नहीं होता। कई बार महिलाओं में कैंसर वाली गांठ और उसके आसपास के थोड़े से स्वस्थ टिश्यू को निकालकर भी इलाज किया जा सकता है। वहीं, कुछ कंडीशन में पूरा स्तन निकालने की सलाह भी दी जा सकती है। इस बारे में Dr. Vishnu Hari, Associate Director & Head (Unit I) - Medical Oncology, Haematology & BMT, Sarvodaya Hospital, Faridabad कहते हैं कि ब्रेस्ट कैंसर में जरूरी नहीं कि पूरा स्तन ही निकाला जाए। कई बार महिलाएं यह सवाल लेकर आती है कि उनके किसी जानकार महिला का पूरा ब्रेस्ट निकाल दिया था, तो क्या मेरे साथ भी ऐसा ही होगा। यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर किसी पर कैंसर के इलाज का एक ही तरीका नहीं होता। इलाज का फैसला मरीज की मेडिकल कंडीशन को देखते हुए लिया जाता है।
ब्रेस्ट कैंसर में पूरा स्तन कब निकाला जाता है?
Mayo Clinic के अनुसार, मेस्टोकॉमी उन महिलाओं को कराने की भी सलाह दी जाती हैं, जो प्रेग्नेंट होती है। ऐसे मामलों में रेडिएशन थेरेपी देना सही नहीं होता। इसके अलावा, कैंसर कोशिकाओं का कई जगहों पर होना, कैंसर के आकार का बड़ा होना या आनुवांशिक कारणों के चलते भी पूरा स्तन निकालने की सलाह दी जाती है।
Dr. Vishnu Hari का कहना है, “जब मरीज का पूरा स्तन निकाला जाता है, तो उसे मास्टेक्टॉमी कहते हैं। ब्रेस्ट कैंसर के मरीज को इन खास परिस्थितियों में सलाह दी सकती है।”
- जब ट्यूमर स्तन के आकार के मुकाबले बड़ा हो - अगर ट्यूमर काफी बड़ा है और सिर्फ कैंसर वाला हिस्सा निकालने के बाद भी स्तन में दोबारा कैंसर होने का रिस्क बना रहता है। ऐसे मामलों में मरीज को मास्टेक्टॉमी की सलाह दी जा सकती है।
- जब कैंसर स्तन के कई हिस्सों में हो - कई मामलों में कैंसर ब्रेस्ट के कई हिस्सों में होता है। इस वजह से स्तन को बचा पाना मुश्किल होता है, क्योंकि कैंसर की कोशिकाओं को अलग-अलग निकालना मुश्किल होता है। ऐसी स्थिति में पूरा स्तन निकालने की सलाह दी जा सकती है।
- अगर पहले हुई सर्जरी में कैंसर कोशिकाएं पूरी तरह न निकल पाई हो - अगर मरीज की ब्रेस्ट कैंसर की सर्जरी पहले हुई थी और उसमें ब्रेस्ट पूरा नहीं निकाला गया हो। दोबारा कैंसर होने की स्थिति में कैंसर कोशिकाओं को फैलने से बचाने के लिए मास्टेक्टॉमी की जरूरत पड़ सकती है।
- जब रेडिएशन थेरेपी देना संभव न हो - ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी के बाद मरीज को रेडिएशन थेरेपी दी जाती है, ताकि कैंसर की कोशिकाएं पूरी तरह से नष्ट हो जाए। कुछ मामलों में सर्जरी के बाद रेडिएशन थेरेपी देना संभव नहीं होता, तो डॉक्टर ऐसे मामलों में पूरा स्तन तो निकालने की सलाह देते ही है, साथ ही इलाज के अन्य विकल्पों की भी सलाह दे सकते हैं। इलाज के अन्य तरीके मरीज की मेडिकल कंडीशन और उम्र को देखकर लिए जाते हैं।
- आनुवंशिक मामलों में कैंसर के रिस्क को रोकने के लिए - कुछ महिलाओं में BRCA1 या BRCA2 जैसे जीन में बदलाव के कारण ब्रेस्ट कैंसर होने या दोबारा कैंसर होने का रिस्क रहता है। ऐसे मामलों में ब्रेस्ट कैंसर के रिस्क को कम करने के लिए स्तन निकालने की सलाह दी जा सकती है।
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सिंगल और डबल मास्टेक्टॉमी क्या होती है?
National Cancer Institute के अनुसार, आमतौर पर अगर एक ब्रेस्ट में कैंसर होता है, तो उसे हटा दिया जाता है। इसे सिंगल मास्टेक्टॉमी कहा जाता है। अगर कैंसर दोनों स्तनों में फैल चुका होता है, तो डॉक्टर डबल मास्टेक्टॉमी की सलाह दे सकते हैं। कई मामलों में जेनेटिक म्यूटेशन या फिर फैमिली हिस्ट्री के कारण दूसरे स्तन में कैंसर होने के रिस्क को कम करने के लिए डबल मास्टेक्टॉमी की सलाह दे सकते हैं।
क्या पूरा स्तन निकालने के बाद दोबरा ब्रेस्ट बन सकती है?
Dr. Vishnu Hari का कहना है, “जब महिला की पूरी ब्रेस्ट निकाल दी जाती है, तो वह शारीरिक बदलाव के कारण आत्मविश्वास महसूस नहीं कर पाती। इसलिए ऐसे मामलों में इलाज के बाद मरीज की कंडीशन और जरूरत के अनुसार इम्प्लांट कराने की सलाह दी जा सकती है। यहां मैं साफ कर देना चाहता हूं कि हर महिला के लिए रिकंस्ट्रक्शन की जरूरत नहीं होती। अगर महिला बिना ब्रेस्ट के रहना प्रेफर करती हैं, तो यह उनकी पसंद होती है। ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी में पूरा स्तन निकालने के बाद मरीज की मेंटल और मेडिकल कंडीशन को देखते हुए ब्रेस्ट सर्जन इस बारे में सलाह दे सकते हैं।”
ब्रेस्ट कैंसर में पूरा स्तन कब नहीं निकाला जाता?
Dr. Vishnu Hari कहते हैं, “अगर ब्रेस्ट कैंसर शुरुआती स्टेज पर है और ट्यूमर स्तन के एक सीमित हिस्से में है, तो कुछ मरीजों में ब्रेस्ट कंजर्वेशन सर्जरी की जा सकती है। इसे लम्पेक्टॉमी भी कहा जाता है। इस स्थिति में सर्जरी करते हुए मरीज की कैंसर वाली गांठ और उसके आस-पास के टिश्यू निकाल दिए जाते हैं और स्तन का बाकी हिस्सा सुरक्षित रहता है। इसके बाद मरीज को रेडिएशन थेरेपी दी जाती है, ताकि उसी जगह कैंसर दोबारा होने का खतरा कम किया जा सके। हालांकि, इस सर्जरी को करने से पहले ट्यूमर का आकार, स्तन में उसकी जगह, कैंसर कितने हिस्सों में मौजूद है और रेडियोथेरेपी देना संभव है या नहीं, इन सभी बातों को ध्यान में रखा जाता है।”
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निष्कर्ष
ब्रेस्ट कैंसर का इलाज सिर्फ सर्जरी में स्तन निकाल देने तक नहीं होता। सर्जरी के बाद कैंसर के टिश्यू को पूरी तरह से नष्ट करने के लिए कीमोथेरेपी, हार्मोन थेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी या रेडियोथेरेपी की जरूरत भी पड़ सकती है। कई बार सर्जरी से पहले भी ट्यूमर को छोटा करने के लिए कीमोथेरेपी की जा सकती है। ब्रेस्ट कैंसर के इलाज का पूरा तरीका डॉक्टर मरीज की उम्र, कैंसर के प्रकार और स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए करते हैं। ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि इसके लक्षणों जैसे ब्रेस्ट में गांठ, स्किन में बदलाव, निप्पल का अंदर की ओर होना या निप्पल से खून आने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
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FAQ
क्या पूरा स्तन निकालने से मरीज की उम्र बढ़ सकती है?
ऐसा जरूरी नहीं है। शुरुआती स्टेज के ब्रेस्ट कैंसर में लम्पेक्टॉमी और रेडिएशन थेरेपी कराने पर मिलने वाला सर्वाइवल रेट, पूरा स्तन निकालने के बराबर ही होता है। सिर्फ कैंसर वाले हिस्से को बचाना सेफ माना जाता है, जब तक ट्यूमर सीमित हो।मास्टेक्टॉमी के बाद हाथ में सूजन क्यों आ जाती है?
सर्जरी के दौरान बगल के लिम्फ नोड्स निकाले जाने पर उस हाथ में तरल पदार्थ जमा होने लगता है, जिसे लिम्फेडेमा कहते हैं। इससे बचने के लिए सर्जरी वाले हाथ पर ब्लड प्रेशर न नापें, इंजेक्शन न लगवाएं और डॉक्टर द्वारा सुझाई गई हल्के स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें।
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Oct 13, 2026 15:39 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Vishnu Hari
