ब्रेस्ट कैंसर को लेकर लोगों में कई तरह के मिथक हैं और इसी के चलते अक्सरर महिलाएं इसकी जांच कराने में देर भी कर देती हैं। अगर ब्रेस्ट कैंसर के मामलों की बात की जाए, तो भारत में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। GLOBOCAN 2022 के मुताबिक, दुनियाभर में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे ज्यादा देखने को मिलते हैं और भारत में महिलाओं में होने वाले कैंसर में ब्रेस्ट कैंसर पहले नंबर है। इसलिए ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के लिए इसकी रेगुलर स्क्रीनिंग कराना बहुत जरूरी है। Breast Cancer Awareness Month के मौके पर हमने Dr. Vishnu Hari, Associate Director & Head (Unit I) – Medical Oncology, Haematology & BMT, Sarvodaya Hospital, Sector-8, Faridabad से बात की और उनसे ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े टेस्ट के बारे में जानने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि आमतौर पर लोगों को लगता है कि ब्लड टेस्ट से ब्रेस्ट कैंसर का पता चल जाएगा, लेकिन इसके लिए महिलाओं को खासतौर पर ब्रेस्ट में हो रहे बदलावों पर नजर रखना जरूरी है।
क्या ब्लड टेस्ट से ब्रेस्ट कैंसर का पता चलता है?
Dr. Vishnu Hari कहते हैं, “ब्लड टेस्ट यानी CBC रिपोर्ट, ब्लड शुगर या लिवर-किडनी फंक्शन टेस्ट जैसी सामान्य जांच से ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि नहीं होती। ये टेस्ट सिर्फ शरीर की सेहत की जांच करने के लिए होते हैं। ब्लड टेस्ट के अलावा, कई लोग ट्यूमर मार्कर टेस्ट को भी कैंसर की पक्की जांच मान लेते हैं, लेकिन CA 15-3 और CA 27.29 जैसे कुछ ट्यूमर मार्कर शुरुआती ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए रेगुलर इस्तेमाल नहीं किए जाते।”
ब्रेस्ट कैंसर की जांच कैसे की जाती है?
Dr. Vishnu Hari का कहना है, “ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाने के लिए डॉक्टर मरीज के लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच के आधार पर ही मैमोग्राफी, ब्रेस्ट अल्ट्रासाउंड और जरूरत पड़ने पर MRI की सलाह दे सकते हैं। ब्रेस्ट कैंसर का चेकअप समझने के लिए तीन स्टेज जरूरी होते हैं।”
1. क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जामिनेशन
Dr. Vishnu Hari ने बताया कि सबसे पहले मरीज से उसके लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और परिवार में ब्रेस्ट कैंसर की हिस्ट्री के बारे में पूछा जा सकता है। इसके बाद स्तनों और बगल के आसपास की जांच की जाती है, ताकि किसी गांठ या असामान्य बदलाव का पता लगाया जा सके। इस चेकअप के आधार पर ही डॉक्टर आगे की जांच कराते हैं। इस बात का भी ध्यान जरूर रखें कि सिर्फ हाथ से जांच करने पर हर तरह के ब्रेस्ट कैंसर का पता नहीं लगाया जा सकता।
2. मैमोग्राफी, अल्ट्रासाउंड या MRI
Cleveland Clinic के मुताबिक, अगर स्तन में गांठ महसूस होती है, तो ये चेकअप कराने की सलाह दी जा सकती है।
- मैमोग्राफी - इसमें कम मात्रा में एक्स-रे का इस्तेमाल करके स्तन के अंदर की तस्वीरें ली जाती हैं। यह ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग और बदलावों को जांचने के लिए बेहतर तकनीक है।
- ब्रेस्ट अल्ट्रासाउंड - इसमें रेडियो वेव की मदद से स्तन के अंदर की तस्वीरें ली जाती हैं। इससे डॉक्टर को गांठ की प्रकृति समझने में मदद मिल सकती है।
- ब्रेस्ट एमआरआई (Breast MRI) -Dr. Vishnu Hari ने बताया कि कुछ खास कंडीशन में इसकी जरूरत पड़ सकती है, जैसे ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क ज्यादा होने पर या फिर अगर दूसरी जांच से जानकारी नहीं मिल रही है। ब्रेस्ट एमआरआई हर मरीज के लिए जरूरी नहीं होती।
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3. बायोप्सी
Dr. Vishnu Hari ने कहा, “अगर मैमोग्राफी या अल्ट्रासाउंड में कोई गांठ या हिस्सा दिखाई देता है, तो फिर मरीज को बायोप्सी कराने की सलाह दी जा सकती है। इसमें गांठ या टिश्यू का छोटा सैंपल लेकर लैब में माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। बायोप्सी से पता चलता है कि टिश्यू में कैंसर कोशिकाएं हैं या नहीं। अगर बायोप्सी में कैंसर की पुष्टि होती है, तो आगे ट्यूमर के प्रकार और कुछ खास बायोमार्कर की जांच भी की जा सकती है।”
ब्रेस्ट कैंसर में ब्लड टेस्ट क्यों किए जाते हैं?
Dr. Vishnu Hari कहते हैं, “ब्रेस्ट कैंसर की जांच में ब्लड टेस्ट कराने की सलाह इसलिए देते हैं, ताकि मरीज की पूरी सेहत की जानकारी मिल सके। इसे जानने के लिए डॉक्टर CBC, लिवर फंक्शन और किडनी फंक्शन जैसे चेकअप की सलाह दे सकते हैं। इन चेकअप से यह समझने में मदद मिलती है कि शरीर इलाज के लिए कितना तैयार है और आगे किन बातों का ध्यान रखना होगा। इसलिए ब्रेस्ट कैंसर में ब्लड टेस्ट कैंसर जानने के लिए नहीं, बल्कि मरीज की पूरी सेहत जानने की कोशिश की जाती है।”
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निष्कर्ष
ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाने के लिए सिर्फ ब्लड टेस्ट नहीं, बल्कि फिजिकल एग्जामिनेशन के बाद मैमोग्राफी, अल्ट्रासाउंड या MRI की सलाह दी जा सकती है। अगर डॉक्टर को ब्रेस्ट या बगल में किसी भी तरह की गांठ दिखाई देती है, तो बायोप्सी कराई जा सकती है। अगर ब्रेस्ट में किसी भी तरह का असामान्य बदलाव महसूस होता है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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FAQ
निप्पल से निकलने वाले डिस्चार्ज की जांच के लिए कौन-सा टेस्ट किया जाता है?
निप्पल से असामान्य या खूनी स्राव होने पर डक्टोग्राम (Ductography) किया जाता है। इसमें तरल को स्लाइड पर रखकर माइक्रोस्कोप के नीचे देखा जाता है कि उसमें कोई कैंसर कोशिकाएं तो मौजूद नहीं हैं।क्या PET-CT स्कैन कराने से पहले किसी विशेष ब्लड टेस्ट की जरूरत होती है?
पीईटी-सीटी (PET-CT) स्कैन से पहले सीरम क्रिएटिनिन (Kidney Function) और फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज (शुगर) की जांच की जाती है। यदि ब्लड शुगर बहुत ज्यादा हो, तो रेडियोएक्टिव ग्लूकोज ट्रेसर (FDG) ठीक से कैंसर सेल्स तक नहीं पहुंच पाता और टेस्ट की रिपोर्ट गलत आ सकती है।
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Oct 24, 2026 18:13 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Vishnu Hari
