कई मरीज यह साेचते हैं कि जब कैंसर का पता चल गया है, तो डॉक्टर इलाज करने के बजाय बायोप्सी कराने की सलाह क्यों देते हैं? ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अलग-अलग प्रकार के कैंसर टाइप के सेल्स का रिएक्शन सभी पर एक जैसा नहीं होता। कई बार एक ही अंग में एक से अधिक प्रकार के कैंसर टाइप डेवल्प हो जाते हैं। ऐसे में कैंसर का प्रकार जानने के लिए बायोप्सी की जाती है। बायोप्सी के दौरान ट्यूमर के फैलने का डर रहता है जिसे ट्यूमर सीडिंग कहा जाता है। जब नीडल को बाहर निकाला जाता है, तो इस बात की संभावना होती है कि ट्यूमर किसी अन्य टिशूज में फैल जाए। कई बार नीडल के कारण ट्यूमर के सेल्स बाहर निकल जाते हैं और आस-पास के हिस्से में फैल सकते हैं। ऐसे में कैंसर के मरीज अक्सर बायोप्सी से डरते हैं। आइए डॉक्टर से समझते हैं कि क्या वाकई बायोप्सी से कैंसर फैलता है? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. (Maj) A.P. Dubey, Senior Consultant & Unit Head- Medical Oncology, Haemato-Oncology & Bone Marrow Transplant Metro Hospitals & Heart Institute, Noida से बात की।
बायोप्सी से कैंसर फैलने की संभावना कम होती है
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बायोप्सी से कैंसर फैल सकता है, लेकिन यह स्थिति बहुत रेयर केस में देखी जाती है। American Cancer Society के मुताबिक, बायोप्सी से कैंसर फैल सकता है, लेकिन इसकी संभावना बेहद कम होती है। बायोप्सी से कैंसर फैलने का जोखिम बहुत मामूली होता है, जबकि सही बीमारी का पता लगाने और उचित इलाज तय करने में इसके फायदे कहीं ज्यादा होते हैं।
साल 2024 में Cancers में प्रकाशित एक स्टडी में देखा गया कि नीडल बायोप्सी के दौरान कैंसर कोशिकाओं के सुई के रास्ते में फैलने का कितना खतरा होता है? इसके परिणाम से पता चलता है कि 32% मरीजों में सुई के रास्ते में कैंसर कोशिकाएं मिलीं। अलग-अलग अध्ययनों में यह दर 17 से 38% तक बताई गई है।
बायोप्सी कैसे की जाती है?
बायोप्सी में मास का टुकड़ा शरीर से निकालकर जांच की जाती है। इसके बाद टिशू को कल्चर यानी जांच के लिए भेजा जाता है। बायोप्सी में पूरी तरह से बेहोश नहीं किया जाता है। लोकल एनेस्थीसिया देकर 15 से 20 मिनट में बायोप्सी हो जाती है।
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क्या कैंसर के हर मरीज को बायोप्सी की जरूरत होती है?
बायोप्सी कराने से यह पता चलता है कि कौन से सेल टाइप का कैंसर है? हालांकि, हर कैंसर के मरीज को बायोप्सी कराने की सलाह नहीं दी जाती है। अगर अल्ट्रासाउंड में कैंसर का पता चला है, तो पीईटी सीटी स्कैन और पीईटी एमआरआई भी कराया जाता है। इसके बाद इम्युनोथेरेपी से कैंसर का इलाज किया जाता है।
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बायोप्सी में इंटरनल सूजन आ सकती है
बायोप्सी भी एक तरह की इंजरी है। बायोप्सी करने के लिए डॉक्टर नीडल या इंस्ट्रुमेंट को शरीर के अंदर तक इंसर्ट करते हैं जिसके कारण वह त्वचा की कई लेयर को पार करके भीतर आता है। इससे टिशूज में इंजरी हो सकती है और सूजन आ जाती है। सीटी स्कैन या अल्ट्रासाउंड जैसी जांच में यह सूजन ट्यूमर को बड़ा दिखाती है जिसके कारण लोगों में यह डर फैल गया है कि बायोप्सी से कैंसर फैलता है। हालांकि, बायोप्सी से कैंसर फैलने का खतरा कम होता है। कई बार मरीज को दर्द होने लगता है और वे सोचते हैं कि ट्यूमर में दर्द नहीं था, अब क्यों हो रहा है? दरअसल वह सूजन के कारण होता है जो समय के साथ ठीक हो जाता है।
निष्कर्ष:
बायोप्सी से कैंसर फैल सकता है, लेकिन ऐसा बहुत रेयर केस में होता है। डॉक्टर हर कैंसर मरीज को बायोप्सी कराने की सलाह नहीं देते हैं। अगर कैंसर की पुष्टि हो गई है, तो पीईटी सीटी स्कैन या पीईटी एमआरआई की जाती है। बायोप्सी के कारण कुछ मरीजों में इंटरनल अंगों में सूजन आ सकती है जो कुछ समय में हील हो जाती है।
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FAQ
क्या बायोप्सी एक दर्दनाक प्रक्रिया है?
ज्यादातर बायोप्सी में लोकल एनेस्थीसिया दिया जाता है जिससे प्रक्रिया के दौरान दर्द काफी कम महसूस होता है।क्या बायोप्सी के बाद ब्लड आ सकता है?
सुई वाली जगह से हल्की ब्लीडिंग हो सकती है या नीला निशान दिख सकता है। ज्यादा ब्लीडिंग होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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Current Version
Sep 23, 2026 14:08 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Sep 23, 2026 14:08 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr (Maj) A P Dubey
