Wed Sep 23, 2026 | 03:43 PM IST

Medically Reviewed by Dr (Maj) A P Dubey , Senior Consultant & Unit Head – Medical Oncology, Haemato-Oncology & Bone Marrow Transplant Metro Hospitals & Heart Institute, Noida

क्या वाकई बायोप्सी से कैंसर फैल सकता है? डॉक्टर से जानें दावे का सच और झूठ

कैंसर में की जाने वाली जांच बायोप्‍सी के प्रत‍ि लोगों के मन में डर है। कई लोगों को लगता है क‍ि स्‍क‍िन ट‍िशू को शरीर से न‍िकालकर जांच करने की प्रक्र‍िया से कैंसर फैल सकता है। डॉक्‍टर से जानते हैं इस बात में क‍ितनी सच्‍चाई है?
क्या वाकई बायोप्सी से कैंसर फैल सकता है? डॉक्टर से जानें दावे का सच और झूठक्या वाकई बायोप्सी से कैंसर फैल सकता है? डॉक्टर से जानें दावे का सच और झूठ

कई मरीज यह साेचते हैं क‍ि जब कैंसर का पता चल गया है, तो डॉक्‍टर इलाज करने के बजाय बायोप्‍सी कराने की सलाह क्‍यों देते हैं? ऐसा इसल‍िए होता है क्‍योंक‍ि अलग-अलग प्रकार के कैंसर टाइप के सेल्‍स का र‍िएक्‍शन सभी पर एक जैसा नहीं होता। कई बार एक ही अंग में एक से अध‍िक प्रकार के कैंसर टाइप डेवल्‍प हो जाते हैं। ऐसे में कैंसर का प्रकार जानने के ल‍िए बायोप्‍सी की जाती है। बायोप्‍सी के दौरान ट्यूमर के फैलने का डर रहता है ज‍िसे ट्यूमर सीड‍िंग कहा जाता है। जब नीडल को बाहर न‍िकाला जाता है, तो इस बात की संभावना होती है क‍ि ट्यूमर क‍िसी अन्‍य ट‍िशूज में फैल जाए। कई बार नीडल के कारण ट्यूमर के सेल्‍स बाहर न‍िकल जाते हैं और आस-पास के ह‍ि‍स्‍से में फैल सकते हैं। ऐसे में कैंसर के मरीज अक्‍सर बायोप्‍सी से डरते हैं। आइए डॉक्‍टर से समझते हैं क‍ि क्‍या वाकई बायोप्‍सी से कैंसर फैलता है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. (Maj) A.P. Dubey, Senior Consultant & Unit Head- Medical Oncology, Haemato-Oncology & Bone Marrow Transplant Metro Hospitals & Heart Institute, Noida से बात की।

बायोप्‍सी से कैंसर फैलने की संभावना कम होती है

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बायोप्‍सी से कैंसर फैल सकता है, लेक‍िन यह स्‍थ‍िति‍ बहुत रेयर केस में देखी जाती है। American Cancer Society के मुताब‍िक, बायोप्‍सी से कैंसर फैल सकता है, लेक‍िन इसकी संभावना बेहद कम होती है। बायोप्सी से कैंसर फैलने का जोखिम बहुत मामूली होता है, जबकि सही बीमारी का पता लगाने और उचित इलाज तय करने में इसके फायदे कहीं ज्यादा होते हैं।

साल 2024 में Cancers में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी में देखा गया क‍ि नीडल बायोप्सी के दौरान कैंसर कोशिकाओं के सुई के रास्ते में फैलने का कितना खतरा होता है? इसके पर‍िणाम से पता चलता है क‍ि 32% मरीजों में सुई के रास्ते में कैंसर कोशिकाएं मिलीं। अलग-अलग अध्ययनों में यह दर 17 से 38% तक बताई गई है।

बायोप्‍सी कैसे की जाती है?

बायोप्‍सी में मास का टुकड़ा शरीर से न‍िकालकर जांच की जाती है। इसके बाद ट‍िशू को कल्‍चर यानी जांच के ल‍िए भेजा जाता है। बायोप्‍सी में पूरी तरह से बेहोश नहीं क‍िया जाता है। लोकल एनेस्‍थीस‍िया देकर 15 से 20 म‍िनट में बायोप्‍सी हो जाती है।

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क्‍या कैंसर के हर मरीज को बायोप्‍सी की जरूरत होती है?

बायोप्‍सी कराने से यह पता चलता है क‍ि कौन से सेल टाइप का कैंसर है? हालांक‍ि, हर कैंसर के मरीज को बायोप्‍सी कराने की सलाह नहीं दी जाती है। अगर अल्‍ट्रासाउंड में कैंसर का पता चला है, तो पीईटी सीटी स्‍कैन और पीईटी एमआरआई भी कराया जाता है। इसके बाद इम्‍युनोथेरेपी से कैंसर का इलाज क‍िया जाता है।

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बायोप्‍सी में इंटरनल सूजन आ सकती है

बायोप्‍सी भी एक तरह की इंजरी है। बायोप्‍सी करने के ल‍िए डॉक्‍टर नीडल या इंस्‍ट्रुमेंट को शरीर के अंदर तक इंसर्ट करते हैं ज‍िसके कारण वह त्‍वचा की कई लेयर को पार करके भीतर आता है। इससे ट‍िशूज में इंजरी हो सकती है और सूजन आ जाती है। सीटी स्‍कैन या अल्‍ट्रासाउंड जैसी जांच में यह सूजन ट्यूमर को बड़ा द‍िखाती है ज‍िसके कारण लोगों में यह डर फैल गया है कि‍ बायोप्‍सी से कैंसर फैलता है। हालांक‍ि, बायोप्‍सी से कैंसर फैलने का खतरा कम होता है। कई बार मरीज को दर्द होने लगता है और वे सोचते हैं क‍ि ट्यूमर में दर्द नहीं था, अब क्‍यों हो रहा है? दरअसल वह सूजन के कारण होता है जो समय के साथ ठीक हो जाता है।

न‍िष्‍कर्ष:

बायोप्‍सी से कैंसर फैल सकता है, लेक‍िन ऐसा बहुत रेयर केस में होता है। डॉक्‍टर हर कैंसर मरीज को बायोप्‍सी कराने की सलाह नहीं देते हैं। अगर कैंसर की पुष्‍ट‍ि हो गई है, तो पीईटी सीटी स्‍कैन या पीईटी एमआरआई की जाती है। बायोप्‍सी के कारण कुछ मरीजों में इंटरनल अंगों में सूजन आ सकती है जो कुछ समय में हील हो जाती है।

image credit: magnific 

FAQ

  • क्या बायोप्सी एक दर्दनाक प्रक्र‍िया है?

    ज्‍यादातर बायोप्‍सी में लोकल एनेस्‍थीस‍िया द‍िया जाता है ज‍िससे प्रक्र‍िया के दौरान दर्द काफी कम महसूस होता है। 
  • क्या बायोप्सी के बाद ब्‍लड आ सकता है?

    सुई वाली जगह से हल्‍की ब्‍लीड‍िंग हो सकती है या नीला न‍िशान द‍िख सकता है। ज्‍यादा ब्‍लीड‍िंग होने पर तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करना चाह‍िए।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 23, 2026 14:08 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Sep 23, 2026 14:08 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
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