स्मार्टफोन को आजकल लोग हर वक्त अपने पास रखते हैं। कई लोगों को स्मार्टफोन को अपने तकिए के पास रखकर सोते हैं। स्मार्टफोन को लेकर यह धारणा है कि यह आदत कैंसर का कारण बन सकता है। इससे रेडियोफ्रीक्वेंसी (RF) इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें निकलती हैं। इनकी मदद से फोन मोबाइल टावर, वाई-फाई नेटवर्क और ब्लूटूथ डिवाइस से जुड़ता है, लेकिन क्या वाकई स्मार्टफोन से कैंसर फैलता है? आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब। बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Arun Goel, Surgical Oncologist & Chairman At Andromeda Cancer Hospital, Haryana से बात की।
साल 2016 में Indian Journal Of Occupational And Environmental Medicine में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, शोध में मोबाइल फोन के इस्तेमाल और कैंसर के बीच ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं। मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियोफ्रीक्वेंसी नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन है। लेख के अनुसार, यह एक्स-रे जैसी आयोनाइजिंग रेडिएशन की तरह सीधे DNA के रासायनिक बंधों को तोड़ने में सक्षम नहीं होती है।
कैंसर और स्मार्टफोन रेडिएशन के बीच संबंध के ठोस प्रमाण नहीं मिले
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Cancer Research, UK के मुताबिक, मोबाइल फोन और वाई-फाई से कैंसर होने का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। मोबाइल फोन और वाई-फाई से निकलने वाला रेडिएशन इतना शक्तिशाली नहीं होता कि वह डीएनए को नुकसान पहुंचाकर कैंसर पैदा कर सके। स्मार्टफोन से रेडियो तरंगें निकलती हैं। यह कम ऊर्जा वाला रेडिएशन है। इसी तरह की रेडियो तरंगें रेडियो, टेलीविजन और माइक्रोवेव ओवन में भी इस्तेमाल होती हैं।
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड का मानव शरीर पर प्रभाव
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (EMF) हमारे आस-पास कई उपकरणों से निकलते हैं, जैसे मोबाइल फोन, वाई-फाई राउटर, टेलीविजन और बिजली की तारें। इनका प्रभाव इनके स्रोत, आवृत्ति और संपर्क की तीव्रता पर निर्भर करता है। अधिक तीव्रता वाले रेडियोफ्रीक्वेंसी संपर्क से शरीर के टिशूज में गर्मी पैदा हो सकती है। अन्य स्वास्थ्य स्थिति और रेडियोफ्रीक्वेंसी के संबंध पर शोध जारी हैं।
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स्मार्टफोन को कम से कम तीन फीट दूर रखकर सोएं
सोते समय मोबाइल फोन को बिस्तर से कम से कम तीन फीट दूर रखें। इससे RF रेडिएशन का संपर्क कम हो सकता है। इससे रात में बार-बार फोन उठाने की आदत से बचने में भी मदद मिल सकती है।
क्या वाई-फाई और ब्लूटूथ से कैंसर होता है?
नहीं, वाई-फाई और ब्लूटूथ से कैंसर होने का कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं मिले हैं। ये वायरलेस तकनीकें भी रेडियो तरंगों का इस्तेमाल करती हैं। फिटनेस ट्रैकर, स्मार्टवॉच और वायरलेस हेडफोन जैसे उपकरणों के इस्तेमाल से भी कैंसर का खतरा बढ़ने का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है।
क्या स्मार्टफोन से ब्रेन ट्यूमर का खतरा रहता है?
American Cancer Society के मुताबिक, अब तक ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने से ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ता है। आज के समय में लेटेस्ट स्मार्टफोन से निकलने वाले रेडिएशन के संपर्क में आने से लोगों को होने वाले संभावित जोखिमों का पूरी तरह अध्ययन करने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।
सोते समय स्मार्टफोन से दूरी बनाए रखने के उपाय
रात में सोते समय मोबाइल फोन को अपने सिरहाने या तकिए के नीचे रखने की आदत से बचना चाहिए। फोन को दूर रखने से न केवल रेडियोफ्रीक्वेंसी रेडिएशन के संपर्क को कम किया जा सकता है, बल्कि देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत से भी छुटकारा मिल सकता है। इसके लिए आप कुछ आसान उपाय अपना सकते हैं जैसे-
- सोते समय मोबाइल को तकिए के नीचे या सिर के पास रखने के बजाय कमरे में किसी टेबल पर रखें, जो बिस्तर से कुछ दूरी पर हो।
- सोने से पहले फोन इस्तेमाल करना बंद करें। सोने से कम से कम 30 मिनट पहले मोबाइल का इस्तेमाल बंद करने की कोशिश करें।
निष्कर्ष:
कई लोगों को लगता है स्मार्टफोन को अपने तकिए के पास रखकर सोने से कैंसर हो सकता है, लेकिन फिलहाल स्टडीज में इसके पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं। स्मार्टफोन से जो तरंगें निकलती हैं उससे कैंसर होने की संभवना नहीं देखी गई है। अध्ययनों में यह बताया गया है कि मोबाइल फोन और वाई-फाई से निकलने वाला रेडिएशन इतना शक्तिशाली नहीं होता कि वह डीएनए को नुकसान पहुंचाकर कैंसर पैदा कर सके। सोते समय मोबाइल फोन को बिस्तर से कम से कम तीन फीट दूर रखें। इससे RF रेडिएशन का संपर्क कम हो सकता है। वाई-फाई और ब्लूटूथ से भी कैंसर होने का कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं मिले हैं।
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FAQ
कैंसर का पता लगाने के लिए कौन सी जांच की जाती है?
कैंसर की जांच उसके प्रकार और लक्षणों पर निर्भर करती है। डॉक्टर शारीरिक जांच, ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई, मैमोग्राफी या एंडोस्कोपी की सलाह दे सकते हैं।क्या कैंसर का इलाज संभव है?
हां, कई प्रकार के कैंसर का इलाज संभव है। इलाज की सफलता कैंसर के प्रकार, उसकी स्टेज, मरीज की सेहत और इलाज के प्रति प्रतिक्रिया पर निर्भर करती है।
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Oct 19, 2026 20:32 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Arun Goel
