कैंसर का इलाज शुरू होने पर मरीज और उनके परिवार के मन में सबसे बड़ा सवाल होता है कि कीमोथेरेपी करवानी पड़ेगी या रेडिएशन थेरेपी? कई लोगों को लगता है कि दोनों इलाज के तरीके एक जैसे हैं, क्योंकि इनका मकसद कैंसर सेल्स को खत्म करना होता है लेकिन वास्तव में कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी के काम करने का तरीका बिल्कुल अलग है। मणिपाल अस्पताल भुवनेश्वर के सलाहकार मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ. सचिन शेखर बिस्वाल के अनुसार, कीमोथेरेपी और रेडिएशन दोनों का काम करने का तरीका अलग-अलग होता है। कीमोथेरेपी में दवाओं की मदद से कैंसर सेल्स को टारगेट बनाया जाता है, जबकि रेडिएशन थेरेपी में हाई एनर्जी किरणों का इस्तेमाल किया जाता है।
कीमोथेरेपी और रेडिएशन में क्या अंतर है?
ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ. सचिन शेखर बिस्वाल के अनुसार, कुछ मरीजों को कैंसर के इलाज के लिए कीमोथेरेपी और रेडिएशन दोनों की जरूरत पड़ सकती है। कई मामलों में डॉक्टर इन दोनों उपचारों को एक साथ या अलग-अलग समय पर देने की सलाह देते हैं।
| तुलना | कीमोथेरेपी (Chemotherapy) | रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy) |
| इलाज का तरीका | इसमें खास दवाओं और केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो पिल्स या इंजेक्शन के जरिए दी जाती हैं। | इसमें कैंसर सेल्स को नष्ट करने के लिए हाई-एनर्जी किरणों (जैसे एक्स-रे या प्रोटॉन बीम) का इस्तेमाल किया जाता है। |
| यह कैसे काम करती है? | ये दवाएं ब्लड के जरिए पूरे शरीर में फैलती हैं और शरीर के किसी भी हिस्से में मौजूद कैंसर सेल्स को निशाना बनाती हैं। | यह लोकल ट्रीटमेंट है, यानी इसका असर केवल शरीर के उसी खास हिस्से या ट्यूमर पर होता है जहां किरणें डाली जाती हैं। |
| मुख्य उद्देश्य | जब कैंसर शरीर में फैल चुका हो, सर्जरी के बाद बचे हुए सेल्स को खत्म करने या ट्यूमर छोटा करने के लिए। | शरीर के किसी एक खास और सीमित हिस्से में मौजूद ट्यूमर को सिकोड़ने या पूरी तरह नष्ट करने के लिए। |
| क्या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं? | चूंकि यह पूरे शरीर पर असर डालती है, इसलिए इससे बाल झड़ना, बहुत ज्यादा थकान, कमजोरी और उल्टी-मतली जैसी समस्याएं होती हैं। | इसका असर स्थानीय होता है, इसलिए उस खास जगह की स्किन में लालिमा, जलन, ड्राईनेस और थकान हो सकती है। |
| इलाज का दायरा | यह पूरे शरीर (सिस्टमिक) के लिए काम करती है, इसलिए इसे 'सिस्टमिक थेरेपी' कहा जाता है। | यह केवल एक निश्चित एरिया (लोकल) तक सीमित रहती है, इसलिए इसे 'लोकल थेरेपी' कहते हैं। |
साल 2021 में MedComm जर्नल में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, कैंसर के इलाज में सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन कई बार दवाइयों और किरणों के प्रति प्रतिरोधकता (Resistance) यानी कीमोरेजिस्टेंस और रेडियोरेजिस्टेंस के कारण इलाज असफल हो जाता है। यह समस्या कैंसर सेल्स में डीएनए की मरम्मत, स्टेम सेल और अन्य बदलावों के कारण उत्पन्न होती है। इस स्टडी से यह स्पष्ट होता है कि कीमो और रेडिएशन के प्रति कैंसर की इस प्रतिरोधकता यानी रेजिस्टेंस के पीछे के कारणों को समझना बेहद जरूरी है।
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क्या कैंसर के मरीज को कीमोथेरेपी और रेडिएशन दोनों दिए जा सकते हैं?
ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ. सचिन शेखर बिस्वाल बताते हैं कि कुछ मरीजों को कैंसर के इलाज के लिए कीमोथेरेपी और रेडिएशन दोनों की जरूरत पड़ सकती है। कई मामलों में डॉक्टर इन दोनों इलाज के तरीकों को एक साथ या अलग-अलग समय पर देने की सलाह देते हैं। किस मरीज को कौन सा उपचार दिया जाएगा, यह कैंसर के प्रकार, उसकी स्टेज, शरीर में ट्यूमर की जगह और मरीज की ओवरऑल हेल्थ पर निर्भर करता है। कुछ मरीजों के लिए केवल कीमोथेरेपी या रेडिएशन पर्याप्त हो सकता है, जबकि कुछ को सर्जरी के साथ दोनों इलाजों की जरूरत पड़ सकती है।
chemotherapy vs radiation
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निष्कर्ष
कीमोथेरेपी और रेडिएशन दोनों कैंसर के इलाज के अहम तरीके हैं, लेकिन दोनों का काम करने का तरीका अलग है। कीमोथेरेपी में दवाओं के जरिए पूरे शरीर में कैंसर सेल्स को निशाना बनाया जाता है, जबकि रेडिएशन में खास किरणों से शरीर के प्रभावित हिस्से का इलाज किया जाता है। हर कैंसर मरीज के लिए एक जैसा उपचार सही नहीं होता। इसलिए कैंसर के प्रकार, स्टेज, ट्यूमर की लोकेशन और मरीज की सेहत को ध्यान में रखकर ऑन्कोलॉजिस्ट इलाज तय करते हैं। मरीज को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही उपचार करवाना चाहिए और बिना परामर्श के इलाज में बदलाव नहीं करना चाहिए।
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FAQ
क्या कीमोथेरेपी के दौरान मरीज को अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है?
जरूरी नहीं है। कई मरीजों को कीमोथेरेपी अस्पताल या डे-केयर सेंटर में कुछ घंटों के लिए दी जाती है और इसके बाद वे घर जा सकते हैं।क्या कीमोथेरेपी के दौरान बाल झड़ना हमेशा तय है?
नहीं, हर मरीज के बाल नहीं झड़ते। यह इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं और उनकी खुराक पर निर्भर करता है।क्या रेडिएशन थेरेपी के दौरान दर्द होता है?
रेडिएशन देने की प्रोसेस आमतौर पर दर्द रहित होती है। मरीज को उपचार के दौरान मशीन से निकलने वाली किरणें महसूस नहीं होतीं। हालांकि, कुछ समय बाद उपचार वाले हिस्से में जलन या स्किन संबंधी परेशानी हो सकती है।
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Nov 05, 2026 15:34 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Sachin Sekhar Biswal
