दिवाली में हर कोई अपने घर के कोने-कोने की सफाई करता है। ऐसे में कई बार धूल के कणों की वजह से लंबे समय तक खांसी होती है और कई बार दवाओं की जरूरत पड़ जाती है। कुछ लोगों को धूल से एलर्जिक राइनाइटिस की समस्या होती है, तो कुछ लोगों में धूल से हेय फीवर होने लगता है, हालांकि, सवाल यह है कि क्या धूल के कण किसी बीमारी को ट्रिगर करते हैं, जिसकी वजह से यह सब होता है। जानते हैं Dr. Sunil Kumar K, Lead Consultant - Interventional Pulmonology, Aster CMI Hospital, Bengaluru और Dr. Koushik. N, Consultant - Pulmonologist & Sleep Medicine Specialist, Aster RV Hospital, Bengaluru से।
धूल से खांसी क्यों होती है?
Dr. Koushik. N कहते हैं कि घर की सफाई के दौरान खांसी आने का सबसे आम कारण धूल है। खासकर दिवाली से पहले, जब लोग अलमारियों, पंखों, छतों, फर्नीचर और ऐसी जगहों की सफाई करते हैं, जिन्हें महीनों से छुआ तक नहीं गया होता। इन जगहों पर अक्सर धूल, डस्ट माइट्स, मोल्ड के कण, पालतू जानवरों की त्वचा के कण और अन्य सूक्ष्म कण जमा हो जाते हैं। सफाई के दौरान जब इन्हें छेड़ा जाता है, तो ये कण हवा में फैल जाते हैं और सांस लेने के साथ नाक, गले और सांस की नली में चले जाते हैं। इससे श्वसन तंत्र में जलन हो सकती है और खांसी, छींक आना, गले में खराश और नाक बहने जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं।
इन बीमारी वाले लोगों को होती है लंबे समय तक खांसी
जिन लोगों को अस्थमा, एलर्जी या सांस से जुड़ी अन्य बीमारियां हैं, उनमें इसके लक्षण और भी गंभीर हो सकते हैं, जैसे सांस लेते समय घरघराहट होना, छाती में जकड़न और सांस लेने में कठिनाई। यहां तक कि जिन लोगों को पहले से सांस की कोई समस्या नहीं है, उन्हें भी बहुत अधिक धूल के संपर्क में आने पर कुछ समय के लिए परेशानी या जलन महसूस हो सकती है। The Malaysian Journal of Medical Sciences के अनुसार, धूल की वजह से श्वसन संबंधी लक्षण जैसे खांसी, बलगम, सांस फूलना और घरघराहट जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।
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जब धूल सांस की नली में जाती है तो क्या होता है?
Dr. Sunil Kumar K कहते हैं कि धूल से खांसी आने का एक मुख्य कारण यह है कि शरीर का प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र सांस की नली से अवांछित कणों को बाहर निकालने की कोशिश करता है। जब धूल सांस की नली में जाती है, तो संवेदी नसें (sensory nerves) इस जलन को महसूस करती हैं और इन कणों को हटाने के लिए खांसी का रिफ्लेक्स (cough reflex) शुरू कर देती हैं। धूल के कण (dust mites) और मोल्ड के बीजाणु (mould spores) संवेदनशील लोगों में एलर्जी भी पैदा कर सकते हैं।
किन बातों का रखें ध्यान
डॉ. कौशिक कहते हैं कि दिवाली की सफाई के दौरान, बिना सही फिल्टर वाले वैक्यूम क्लीनर, झाड़ू या सूखे कपड़ों का इस्तेमाल करने से धूल हवा में और ज्यादा फैल सकती है। केमिकल वाले फ्लोर क्लीनर, रूम फ्रेशनर, कीटाणुनाशक (disinfectants) और तेज खुशबू वाली चीजें सांस की नली में जलन को और बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा घर में हवा का सही आवागमन (ventilation) न होने से भी समस्या बढ़ सकती है, क्योंकि धूल और केमिकल का धुआं लंबे समय तक घर के अंदर ही जमा रह सकता है।
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धूल से होने वाली खांसी से कैसे बचें?
डॉ. कौशिक कहते हैं कि सफाई के दौरान धूल से होने वाली खांसी से बचने के लिए घर की सफाई करते समय कुछ आसान सावधानियां बरतें जैसे
- सूखी सफाई या झाड़ू लगाने के बजाय गीले कपड़े या गीले पोछे का इस्तेमाल करें, ताकि धूल हवा में न उड़े।
- बारीक धूल के कणों को सांस के जरिए अंदर जाने से रोकने के लिए अच्छी तरह फिट होने वाला N95 मास्क पहनें।
- घर में हवा के सही आवागमन के लिए खिड़कियां खुली रखें।
- अगर संभव हो, तो धूल को अच्छी तरह हटाने के लिए HEPA फिल्टर वाले वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करें।
- सफाई के लिए तेज केमिकल वाली चीजों को आपस में मिलाने से बचें और रूम फ्रेशनर या कृत्रिम खुशबू वाली चीजों का इस्तेमाल कम से कम करें।
निष्कर्ष:
जिन लोगों को अस्थमा या धूल से एलर्जी है, उन्हें धूल वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपनी दवाएं लेनी चाहिए। अगर सफाई के बाद भी खांसी बनी रहती है, या इसके साथ घरघराहट (wheezing), सीने में जकड़न या सांस लेने में दिक्कत होती है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। साथ ही अगर आपको पहले से ही कोई फेफड़े की बीमारी है जैसे ब्रोंकाइटिस और अस्थमा उन लोगों को सफाई के दौरान सतर्क रहना चाहिए।
FAQ
धूल मिट्टी से एलर्जी हो जाए तो क्या करें?
धूल मिट्टी से एलर्जी हो जाए तो नमक के पानी से नाक साफ करें। इसके अलावा गर्म पानी की भाप लें और इसके बाद मास्क पहनें।एलर्जी कितने दिनों में ठीक हो जाती है?
एलर्जी 3 से 5 दिनों में ठीक हो जाती है। हालांकि, अगर इससे ज्यादा समय ले तो आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
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Nov 05, 2026 12:12 IST
Published By : Pallavi Kumari
Reviewed By : Dr Sunil Kumar K
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