Thu Sep 24, 2026 | 01:08 PM IST

Medically Reviewed by Dr M Sheetal Kumar , Consultant Physician & Diabetologist

दूसरों के घर जाने पर ज्यादा छींक क्यों आती है, जबकि अपने घर में नहीं? डॉक्टर से जानें

कुछ घरों में पहुंचते ही छींक आने लगे लेकिन अपने घर में ऐसा न हो तो वहां मौजूद धूल, धूल के कण, फफूंद या दूसरे एलर्जेन वजह हो सकते हैं। यहां डॉक्टर से जानिए, दूसरों के घर जाने पर ज्यादा छींक क्यों आती है?
दूसरों के घर जाने पर ज्यादा छींक क्यों आती है, जबकि अपने घर में नहीं? डॉक्टर से जानेंदूसरों के घर जाने पर ज्यादा छींक क्यों आती है, जबकि अपने घर में नहीं? डॉक्टर से जानें

क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि अपने घर में बिल्कुल ठीक रहते हैं, लेकिन जैसे ही किसी रिश्तेदार, दोस्त या पड़ोसी के घर पहुंचते हैं, लगातार छींक आने लगती है? कई बार एक-दो छींक के बाद दिक्कत रुक जाती है, लेकिन कुछ लोगों को दूसरे घर में बैठने के कुछ ही मिनटों में बार-बार छींक, नाक में गुदगुदी, पानी आना या नाक बंद होने जैसी परेशानी होने लगती है। हैरानी की बात यह होती है कि अपने घर लौटते ही ये लक्षण कम होने लगते हैं। यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद में कंसल्टेंट फिजिशियन और डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. एम. शीतल कुमार के अनुसार, कुछ लोगों की नाक बाहरी कणों और तेज गंध के प्रति ज्यादा सेंसिटिव होती है। ऐसे में किसी खास वातावरण में पहुंचने के बाद नाक की अंदरूनी परत उत्तेजित हो सकती है और छींक आने लगती है लेकिन हर बार इसे एलर्जी समझ लेना भी सही नहीं है। छींक के पीछे एलर्जी के अलावा नाक की सेंसिटिविटी और दूसरे कारण भी हो सकते हैं।

दरअसल, अलग-अलग घरों में धूल, धुआं, परफ्यूम, अगरबत्ती, पालतू जानवरों के बाल और सफाई में इस्तेमाल होने वाले केमिकल की मात्रा अलग हो सकती है। इन्हीं चीजों के संपर्क में आने पर सेंसिटिव लोगों में छींक और एलर्जी जैसे लक्षण ट्रिगर हो सकते हैं। आइए डॉक्टर एम. शीतल कुमार से समझते हैं कि इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं।

दूसरे घर जाने पर ज्यादा छींक क्यों आती है?

डॉ. एम. शीतल कुमार के अनुसार, दूसरे घर में जाने पर छींक आने की सबसे आम वजह वहां मौजूद ऐसे कण हो सकते हैं, जिनसे आपकी नाक सेंसिटिव होती है। हर घर का वातावरण एक जैसा नहीं होता। कहीं कालीन और पर्दों में ज्यादा धूल जमा हो सकती है, तो कहीं कमरे में धूप, अगरबत्ती या रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल ज्यादा होता है।

  • डॉक्टर एम. शीतल कुमार के अनुसार, जब नाक की अंदरूनी परत किसी ऐसे पदार्थ के संपर्क में आती है जो उसे परेशान करता है, तो शरीर उसे बाहर निकालने के लिए छींकने का रिएक्शन कर सकता है।
  • इसलिए किसी खास जगह पर बार-बार छींक आना उस वातावरण में मौजूद ट्रिगर की ओर इशारा कर सकता है।
  • कई घरों में सोफा, कालीन, गद्दे, पर्दे और कुशन की सफाई नियमित रूप से नहीं हो पाती है। इन जगहों पर धूल के साथ डस्ट माइट्स भी जमा हो सकते हैं। कुछ लोगों में इनके संपर्क से नाक में एलर्जी का रिएक्शन हो सकता है।
  • अगर किसी घर में जाते ही छींक, नाक में खुजली और पानी आने जैसी परेशानी शुरू हो जाती है और वहां से निकलने के बाद धीरे-धीरे कम हो जाती है, तो वहां मौजूद धूल या अन्य एलर्जेन एक संभावित कारण हो सकते हैं।

1. परफ्यूम और अगरबत्ती भी कर सकते हैं ट्रिगर

डॉक्टर एम. शीतल कुमार बताते हैं कि किसी के घर में तेज परफ्यूम, अगरबत्ती, धूपबत्ती या रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल होता है। इनकी तेज खुशबू और उनसे निकलने वाले कण कुछ लोगों की नाक और रेस्पिरेटरी सिस्टम को परेशान कर सकते हैं। खास बात यह है कि ऐसा रिएक्शन हमेशा एलर्जी की वजह से ही हो, यह जरूरी नहीं है। कुछ लोगों में तेज गंध नाक की सेंसिटिविटी बढ़ाकर छींक, नाक बहने या सिर भारी होने जैसी परेशानी पैदा कर सकती है।

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2. पालतू जानवरों से एलर्जी

अगर किसी दूसरे घर में बिल्ली, कुत्ता या कोई अन्य पालतू जानवर है, तो उनके बालों के अलावा स्किन से मौजूद गंदगी भी छींक आने का कारण हो सकती है। सेंसिटिव व्यक्ति इनके संपर्क में आने पर छींक या नाक बहने जैसी समस्या महसूस कर सकता है। ऐसे में हो सकता है कि अपने घर में कोई परेशानी न हो, लेकिन पालतू जानवर वाले घर में पहुंचते ही लक्षण शुरू हो जाएं।

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साल 2021 में NIH में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने चूहों पर स्टडी करके छींक आने की प्रोसेस को कंट्रोल करने वाली खास कोशिकाओं और प्रोटीन्स की पहचान कर ली है। यह खोज यह समझने में मदद करती है कि हमारे तंत्रिका तंत्र यानी नर्वस सिस्टम और कोशिकाएं एलर्जी या वायरल इंफेक्शन पर कैसे रिएक्शन देती हैं। इस जरूरी जानकारी से वैज्ञानिकों को छींक को रोकने और खतरनाक रेस्पिरेटरी डिजीज के प्रसार को कंट्रोल करने के लिए नए और असरदार इलाज विकसित करने में बहुत मदद मिलेगी।

अचानक छींक आए तो क्या करें?

डॉक्टर एम. शीतल कुमार सलाह देते हैं कि सबसे पहले यह ध्यान दें कि छींक किस जगह और किन परिस्थितियों में शुरू होती है। क्या वहां कालीन ज्यादा हैं? क्या अगरबत्ती या परफ्यूम का इस्तेमाल हो रहा है? क्या घर में पालतू जानवर है? इस तरह के पैटर्न को नोट करने से संभावित ट्रिगर पहचानने में मदद मिल सकती है। अगर छींक बार-बार आती है, नाक लगातार बंद रहती है, सांस लेने में परेशानी होती है, आंखों में ज्यादा खुजली या पानी आता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर एलर्जी या नाक से जुड़ी अन्य समस्या की जांच कर सकते हैं।

निष्कर्ष

दूसरों के घर जाते ही छींक आना केवल संयोग नहीं हो सकता है। अलग-अलग घरों में मौजूद धूल, डस्ट माइट्स, पालतू जानवरों के कण, परफ्यूम, अगरबत्ती या दूसरे ट्रिगर सेंसिटिव लोगों में छींक की समस्या पैदा कर सकते हैं। अगर यह परेशानी बार-बार किसी खास जगह पर होती है, तो उसके पैटर्न पर ध्यान दें और लगातार लक्षण रहने पर डॉक्टर से जांच कराएं।

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FAQ

  • क्या बार-बार छींकने से शरीर को नुकसान पहुंचता है?

    आमतौर पर छींक शरीर का नॉर्मल रिएक्शन है लेकिन लगातार और बहुत ज्यादा छींक आने के साथ नाक में दर्द, खून या अन्य परेशानी हो तो डॉक्टर से सलाह लेना सही है।
  • छींक के साथ आंखों में पानी आए तो क्या करें?

    अगर छींक के साथ आंखों में खुजली, लालिमा या पानी आने की समस्या भी बार-बार होती है, तो यह किसी एलर्जिक रिएक्शन की ओर इशारा कर सकती है, ऐसे में डॉक्टर की सलाह लें।

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Akanksha Tiwari

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आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 24, 2026 11:24 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
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