घर में सीलन और नमी को अक्सर लोग सिर्फ दीवारों पर दाग-धब्बों या बदबू की समस्या मानते हैं लेकिन लंबे समय तक नम और सीलन वाले वातावरण में रहना कुछ लोगों के लिए सांस से जुड़ी परेशानियों का कारण बन सकता है। कैलाश अस्पताल, देहरादून के सीनियर कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन डॉ. गोपाल जी शर्मा के अनुसार, जहां नमी के कारण फफूंदी (Mold) पनपती है, वहां हवा में मौजूद इसके कण और अन्य एलर्जेन सांस के साथ शरीर में पहुंच सकते हैं। इससे एलर्जी, नाक बंद होना, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
घर की सीलन से फेफड़ों पर क्या असर पड़ता है?
डॉ. गोपाल जी शर्मा के अनुसार, घर में लगातार नमी रहने से फफूंदी और दूसरे बैक्टीरिया के पनपने की संभावना बढ़ जाती है। इनसे निकलने वाले कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। कुछ लोगों का रेस्पिरेटरी सिस्टम इनके प्रति सेंसिटिव होता है, जिसके कारण एलर्जिक रिएक्शन शुरू हो सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति में सीलन का असर एक जैसा नहीं होता। जिन लोगों को पहले से एलर्जी, अस्थमा या सांस से जुड़ी सेंसिटिविटी है, उनमें इसके कारण लक्षण ज्यादा परेशान कर सकते हैं।
- सीलन और फफूंदी से जुड़े कण कुछ सेंसिटिव लोगों में अस्थमा के लक्षणों को ट्रिगर कर सकते हैं।
- ऐसे व्यक्ति को खांसी, सांस फूलना या सीने में जकड़न पहले की तुलना में ज्यादा महसूस हो सकती है।
- खासकर बंद कमरों में जहां वेंटिलेशन कम हो और नमी लगातार बनी रहती हो, वहां समस्या बढ़ सकती है।
- इसलिए अस्थमा या एलर्जी वाले लोगों के लिए घर के वातावरण को सूखा और हवादार रखना जरूरी है।
साल 2015 में Clinical & Experimental Allergy में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, घर में सीलन और फफूंदी होने से बच्चों और वयस्कों में अस्थमा होने का खतरा 30% से 50% तक बढ़ जाता है। अमेरिका में अस्थमा के कुल मामलों में से 21% मामले इसी कारण होते हैं, जिसका सालाना खर्च अरबों डॉलर बैठता है। स्टडीज में यह भी सामने आया है कि सीलन, पानी के रिसाव, दिखने वाली फफूंदी और उसकी बदबू अस्थमा के जोखिम को बढ़ाते हैं।
damp home health problems
सीलन वाले घर में रहने से कौन से लक्षण दिख सकते हैं?
- डॉ. गोपाल जी शर्मा के अनुसार, अगर घर की दीवारों, छत या फर्नीचर में लंबे समय से नमी है, तो कुछ लोगों में लगातार छींक आना, नाक बहना या बंद रहना, गले में खराश और खांसी जैसी समस्या हो सकती है।
- इसके अलावा आंखों में जलन, पानी आना और स्किन में खुजली जैसे एलर्जी के लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
- सांस से जुड़े लक्षणों में सीने में जकड़न, सांस फूलना भी शामिल हो सकता है।
- यदि कोई व्यक्ति घर से बाहर रहने पर बेहतर महसूस करता है और घर लौटने पर लक्षण बढ़ जाते हैं, तो वातावरण में मौजूद किसी एलर्जेन की भूमिका हो सकती है।
क्या सीलन से फेफड़ों की गंभीर बीमारी हो सकती है?
डॉ. गोपाल जी शर्मा बताते हैं कि सिर्फ घर में सीलन होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को फेफड़ों की गंभीर बीमारी हो जाएगी। सीलन और फफूंदी के संपर्क का असर व्यक्ति की सेंसिटिविटी, संपर्क का समय और हेल्थ कंडीशन पर निर्भर करता है। बहुत कम मामलों में फफूंदी के लंबे या ज्यादा संपर्क से गंभीर रेस्पिरेटरी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए लगातार खांसी, सांस फूलना, सीने में दर्द या सांस लेने में ज्यादा परेशानी को केवल सीलन का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
घर की सीलन कम करने के लिए क्या करें?
घर में नमी की समस्या का मूल कारण दूर करना सबसे जरूरी है। दीवारों या छत से पानी का रिसाव हो रहा है तो उसकी मरम्मत कराएं। दीवारों, पर्दों और फर्नीचर पर दिखाई देने वाली फफूंदी को सही तरीके से साफ करना चाहिए।
निष्कर्ष
घर की सीलन केवल घर की साफ-सफाई से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि सेंसिटिव लोगों में यह रेस्पिरेटरी हेल्थ को प्रभावित कर सकती है। लगातार सीलन वाले वातावरण में फफूंदी और अन्य एलर्जेन की मौजूदगी खांसी, नाक बंद होने, एलर्जी और अस्थमा जैसे लक्षणों को बढ़ा सकती है। इसलिए घर को सूखा, साफ और हवादार रखना जरूरी है। अगर सीलन वाले घर में रहने के दौरान सांस से जुड़ी परेशानी लगातार बनी रहती है, तो डॉक्टर से जांच कराना सही है।
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FAQ
क्या घर की सीलन से सांस लेने में परेशानी हो सकती है?
कुछ सेंसिटिव लोगों में नम और फफूंदी वाले वातावरण के संपर्क से सांस लेने में परेशानी या अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं।क्या फफूंदी और सीलन एक ही चीज हैं?
सीलन या ज्यादा नमी एक पर्यावरण से जुड़ी समस्या है, जबकि फफूंदी एक प्रकार का फंगस है जो नम जगहों पर पनप सकता है। लंबे समय तक नमी रहने पर फफूंदी बढ़ने की संभावना रहती है।
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Sep 30, 2026 21:32 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Gopal Jee Sharma
