Sun Oct 25, 2026 | 01:48 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vineeta Singh Tandon , Sr. Consultant – Internal Medicine

बाथरूम में रखे गीले कपड़े कैसे बढ़ा सकते हैं फंगल इंफेक्शन, डॉक्टर से जानें नमी कम करने के तरीके

अगर आपकी भी बाथरूम में गीले कपड़े और तौलिये छोड़ने की आदत है, तो यह आदत सेहत के लिए काफी भारी पड़ सकती है। इससे कपड़ों में नमी आ सकती है, जो फंगस के बढ़ने का कारण बन सकती है। इस लेख में डॉक्टर ने गीले कपड़े और तौलिए से होने वाली फंगल इंफेक्शन को विस्तार से समझाया है।
बाथरूम में रखे गीले कपड़े कैसे बढ़ा सकते हैं फंगल इंफेक्शन, डॉक्टर से जानें नमी कम करने के तरीकेबाथरूम में रखे गीले कपड़े कैसे बढ़ा सकते हैं फंगल इंफेक्शन, डॉक्टर से जानें नमी कम करने के तरीके

नहाने के बाद तौलिया बाथरूम में टांग देना या गीले कपड़ों को वहीं छोड़ देना, कई लोगों की रोज की आदत होती है। लोगों को लगता है कि गीले कपड़ों से पानी निकल जाएगा और इस कारण कई घंटों तक कपड़े बाथरूम में ही पड़े रहते हैं। बाथरूम में हवा निकलने या आने की जगह बहुत कम होती है, तो इससे आस-पास नमी बनी रह सकती है, जो फंगस बढ़ा सकती है। International Infection Prevention Week के मौके पर इस बारे में हमने Dr. Vineeta Singh Tandon, Senior Consultant, Internal Medicine, ISIC Multispeciality Hospital, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि जब कपड़ों और गीले तौलिये को दीवार पर कई घंटों तक टांग दिया जाता है, तो बाथरूम की दीवारे नम हो जाती है। इससे न तो कपड़े सूख पाते और दीवारों पर लगातार नमी बनने के कारण फंगस बढ़ने लगता है।

बाथरूम में नमी बढ़ने से क्या हो सकता है?

Dr. Vineeta Singh Tandon कहती हैं, “बाथरूम में नहाने के बाद भाप और नमी बढ़ जाती है, लेकिन अगर नमी बाहर नहीं निकलती, तो दीवारों, छत, टाइलों के जोड़ों और दूसरी सतहों पर सीलन जमा हो सकती है। ऐसे में गीले कपड़े या तौलिया भी घंटों तक टांग दिए, तो ऐसी जगहों पर फंगस पनपने की संभावना बढ़ जाती है। फंगस के छोटे-छोटे कण हवा में फैल सकते हैं, जो कपड़ों में भी लग सकते हैं। जब लोग इन्हें सांस के जरिए अंदर लेते हैं, तो कुछ लोगों को सांस से जुड़ी परेशानी हो सकती है।”

Centers for Disease Control and Prevention (CDC) के मुताबिक, नमी और फंगस वाली जगहों पर रहने वाले कुछ लोगों को नाक बंद होने, गले में खराश, खांसी, घरघराहट, आंखों में जलन या त्वचा पर रैश जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जिन लोगों को अस्थमा या फंगस से एलर्जी है, उनमें लक्षण ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। कमजोर इम्यून सिस्टम या फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों को भी खास ध्यान रखना चाहिए।

गीले कपड़े और तौलिये बाथरूम में छोड़ने पर क्या होता है?

Dr. Vineeta Singh Tandon ने कहा, “गीले कपड़ों का अगर एक-दूसरे के ऊपर ढेर लगाकर रख दिए जाएं, तो उनके बीच हवा नहीं पहुंच पाती। इससे उन्हें सूखने में ज्यादा समय लग सकता है। यही बात गीले तौलिये पर भी लागू होती है, खासतौर पर जब उसे भी बाथरूम में टांग दिया जाए। अगर बाथरूम में पहले से सीलन है, तो वहां गीले कपड़े रखने से नमी की समस्या और बढ़ सकती है। कपड़ों में देर तक गीलापन रहने पर उनमें सीलन जैसी गंध भी आने लगती है। इससे कपड़ों में फंगस लगने का चांस बढ़ जाता है, जो स्किन में एलर्जी पैदा कर सकता है। इसलिए बेहतर है कि नहाने के बाद गीले कपड़ों को बाथरूम के किसी कोने में छोड़ने के बजाय ऐसी जगह सुखाएं, जहां हवा आती-जाती हो। तौलिये को भी इस तरह फैलाकर टांगें, ताकि नमी जल्दी सूख जाए।”

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गीले कपड़ों को सुखाने का सही तरीका क्या है?

Dr. Vineeta Singh Tandon कहती हैं कि आमतौर पर लोग जगह की कमी के चलते गीले कपड़ों को एक के ऊपर एक रख देते हैं या फिर घर के अंदर ही सुखाने लगते हैं। इससे कपड़ों में बदबू भी आनी शुरू हो जाती है और स्किन इंफेक्शन, एलर्जी और सांस से जुड़ी बीमारियों का रिस्क भी बढ़ सकता है। इसलिए गीले कपड़ों को कुछ ऐसे सुखाएं।

  • गीले कपड़ों को एक-दूसरे के ऊपर रखने के बजाय अलग-अलग फैलाकर टांगें। इससे हवा उनके बीच से गुजर सकती है और वे जल्दी सूख सकते हैं।
  • अगर घर में बालकनी, खुली जगह या अच्छी हवा आने वाला कमरा है, तो कपड़ों को वहां सुखाना बेहतर हो सकता है।
  • इस्तेमाल के बाद तौलिये को फैलाकर टांगें। उसे गीला ही मोड़कर किसी बैग, बंद टोकरी या अलमारी में रखने से बचें।
  • अगर कपड़े लंबे समय तक गीले रहे हैं और उनमें गंध आ रही है, तो उन्हें दोबारा धोकर पूरी तरह सुखाएं। इसे परफ्यूम से छिपाने की कोशिश न करें।

बाथरूम की नमी कैसे कम करें?

Dr. Vineeta Singh Tandon के अनुसार, सिर्फ गीले कपड़े बाहर रखने से हर बार समस्या हल नहीं होती। अगर बाथरूम में लगातार सीलन बनी रहती है, तो बाथरूम की नमी को कम करने की कोशिश करनी चाहिए।

  • नहाने के दौरान और उसके बाद बाथरूम में हवा आने-जाने के लिए एग्जॉस्ट फैन का इस्तेमाल करें।
  • नहाने के बाद जहां पानी जमा हो, उसे पोंछ दें। बाथरूम की फर्श को लंबे समय तक गीला न रहने दें।
  • अगर बाथरूम में पानी का लीकेज हो रहा है, तो उसे ठीक करवाएं। लगातार पानी से सीलन और फंगस की समस्या बढ़ सकती है।
  • अगर दीवारों के कोनों, टाइलों के जोड़ों और छत पर काले या हरे धब्बे दिखाई दें, तो ये फंगस हो सकती है।
  • अगर फंगस बार-बार हो रहा है, तो इसके कारणों को जानना बहुत जरूरी है।

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निष्कर्ष
नहाने के बाद गीले कपड़े या तौलिया बाथरूम में छोड़ देने से नमी के कारण फंगस की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए स्किन एलर्जी या सांस की समस्या से बचने के लिए कपड़ों को बाहर खुली जगह में सुखाएं। अगर बाथरूम में लीकेज हो रही है, तो उसे ठीक कराएं और नहाने के बाद बाथरूम को सुखा दें, ताकि नमी न रहें। अगर दीवारों पर फंगस दिखाई दे या सीलन की गंध लगातार बनी रहे, तो बाथरूम की लीकेज चेक कराएं।

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FAQ

  • क्या गीले अंडरगारमेंट्स को बाथरूम के अंदर सुखाना सुरक्षित है?

    बाथरूम में धूप और ताजी हवा न मिलने से अंडरगारमेंट्स में बैक्टीरिया और फंगस जमा हो जाते हैं। अंडरगारमेंट्स को हमेशा सीधी धूप में ही सुखाएं। धूप का यूवी रेडिएशन फंगस के कणों को पूरी तरह नष्ट कर देता है।
  • क्या बाथरूम का बाथ मैट भी फंगल इंफेक्शन फैला सकता है?

    बाथरूम के फर्श पर पड़ा रहने वाला गीला मैट फंगस और बैक्टीरिया फैला सकता है। गीले पैरों से उस पर खड़े होने पर नाखूनों का फंगस और एथलीट फुट आसानी से फैलते हैं। बाथ मैट को हफ्ते में कम से कम एक बार गर्म पानी और एंटीसेप्टिक लिक्विड से धोकर धूप में सुखाना चाहिए।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 25, 2026 12:33 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Vineeta Singh Tandon