Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vineeta Singh Tandon , Sr. Consultant – Internal Medicine

घर में सीलन और नमी को न करें नजरअंदाज, मानसून में बढ़ सकती हैं ये 5 बीमारियां

बारिश में घर में नमी और फूफंद लगने से कई लोगों को स्किन एलर्जी और अस्थमा जैसी परेशानियां हो सकती हैं। नमी और सीलन के कारण कौन-सी बीमारियां हो सकती हैं? जानने के लिए पढ़ें यह लेख। 

बारिश का मौसम आते ही घर के अंदर नमी बढ़ने लगती है और इस वजह से घरों में सीलन हो सकती है। कई लोग मानसून के दिनों में घर के अंदर ही कपड़े सूखते हैं और इस वजह से कमरों में एक अलग तरह की अजीब गंध महसूस होती है। लगातार नमी, सीलन और गंध के कारण सेहत पर असर पड़ सकता है। घर में ज्यादा नमी रहने पर फफूंद यानी मोल्ड पनप सकते हैं। इससे होने वाली बीमारियों के बारे में जानने के लिए हमने Dr. Vineeta Singh Tandon, Senior Consultant, Internal Medicine, ISIC Multispeciality Hospital, Delhi से बात की।

मानसून में सीलन और नमी के कारण होने वाली 5 बीमारियां

Dr. Vineeta Singh Tandon ने कहा, “फूफंद के छोटे-छोटे कण हवा में फैलकर सांस के साथ शरीर में जा सकते हैं। जिन लोगों को पहले से अस्थमा या एलर्जी की समस्या है, उनमें यह समस्या बहुत गंभीर हो सकती है। मानसून के दौरान नमी और सीलन से होने वाली बीमारियों के बारे में जानना जरूरी है, ताकि ऐसी एलर्जी या समस्याएं होने का इसका कारण पता हो।”

1. अस्थमा और सांस लेने में परेशानी होना

Dr. Vineeta Singh Tandon कहती हैं, “सीलन वाली दीवारों और नम जगहों पर मोल्ड आसानी से विकसित हो सकता है। मोल्ड से निकलने वाले स्पोर्स हवा में मिल सकते हैं और इन्हें सांस के जरिए अंदर लेने पर सेंसिटिव लोगों को परेशानी हो सकती है। जिन लोगों को पहले से अस्थमा की समस्या है, उन्हें घर के अंदर मौजूद मोल्ड और एलर्जेंस की वजह से खांसी, घरघराहट और सीने में जकड़न जैसे लक्षण बढ़ सकते हैं। कुछ लोगों में सांस फूलने की शिकायत भी हो सकती है। अगर किसी के घर की दीवारों पर लगातार काले, हरे या सफेद धब्बे दिखाई दे रहे हैं और वहां रहने पर सांस की समस्या बढ़ती है, तो सीलन को ठीक कराना बहुत जरूरी है।”

2. एलर्जी और साइनस की समस्या बढ़ना

Dr. Vineeta Singh Tandon ने बताया कि मानसून में सिर्फ मोल्ड ही नहीं बढ़ता, बल्कि ज्यादा नमी की वजह से डस्ट माइट्स की संख्या भी बढ़ सकती है। डस्ट माइट्स बहु ही छोटे कीटाणु होते हैं, जो मानसून के दौरान घर में हो सकते हैं। नमी और सीलन के कारण कुछ लोगों में एलर्जी के लक्षण बढ़ सकते हैं। अगर घर में नमी है और किसी को बार-बार छींक आ रही है, नाक बंद या पानी बहने की शिकायत है, गले में जलन या आंखों से पानी आ रहा है, तो सीलन को ठीक कराना ही बेहतर रहता है। जिन लोगों को पहले से एलर्जिक राइनाइटिस या साइनस की समस्या है, उन्हें नम वातावरण में परेशानी ज्यादा महसूस हो सकती है।

3. त्वचा में खुजली और रैशेज होना

Dr. Vineeta Singh Tandon का कहना है, "बारिश के मौसम में घर के अंदर नमी बढ़ जाती है। जो लोग लगातार घर में ही रहते हैं, उन्हें सीलन के कारण खुजली, लाल चकत्ते और जलन की शिकायत बढ़ सकती है। जिन लोगों को पहले से एक्जिमा या संवेदनशील त्वचा की समस्या है, उनमें मानसून के दौरान लक्षण ज्यादा परेशान कर सकते हैं। कुछ लोगों को फंगल इंफेक्शन होने का खतरा भी बढ़ सकता है।"

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4. फंगल इंफेक्शन का रिस्क होना

Dr. Vineeta Singh Tandon के अनुसार, जिन घरों में नमी होती है, वहांं फंगस होने का रिस्क बढ़ सकता है। कई बार लोगों को मानसून में फंगल इंफेक्शन हो जाता है, लेकिन उन्हें इसका कारण समझ नहीं आता। इसकी वजह से घर के अंदर सीलन या नमी भी हो सकती है। कुछ लोगों के घरों के बाथरूम, दीवारों के कोने और ऐसे हिस्से जहां पानी या नमी जमा रहती है, वहां फंगस पनप सकता है और यह फंगस शरीर में इंफेक्शन बढ़ा सकता है।

5. सिरदर्द और मेंटल हेल्थ पर असर

Dr. Vineeta Singh Tandon कहती हैं, “सीलन भरे कमरे में लंबे समय तक रहने पर कई लोगों को बदबू से परेशानी हो सकती है। कई बार इनडोर एयर क्वालिटी खराब होने के कारण लोगों को सिरदर्द, बेचैनी या थकान जैसी शिकायतें हो सकती है। इसके अलावा, लगातार गीला, नम और सीलन वाला घर लोगों को स्ट्रेस और एंग्जायटी दे सकता है। हालांकि, बार-बार सिरदर्द या एंग्जायटी को सिर्फ घर की नमी से जोड़ना सही नहीं हैं, क्योंकि इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं, लेकिन ऐसा होने पर घर में मौजूद सीलन को खत्म करना बेहतर रहता है।”

क्या कहती है रिसर्च?

NHS के अनुसार, घर में नमी और सीलन के कारण लोगों को सांस से जुड़ी समस्याएं, एलर्जी, सांस से जुड़े इंफेक्शन और अस्थमा की शिकायत हो सकती है। इससे सबसे ज्यादा ये लोग प्रभावित हो सकते हैं।

  • शिशु
  • बच्चे
  • बुजुर्ग
  • जिन लोगों को पहले से स्किन से जुड़ी समस्याएं हैं
  • जिन लोगों को सांस से जुड़ी परेशानियां हैं
  • जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर है

बारिश में घर की नमी कैसे कम करें?

Dr. Vineeta Singh Tandon ने कहा कि मानसून में घर को पूरी तरह सूखा रखना मुश्किल हो सकता है, लेकिन कुछ आसान तरीकों से नमी और सीलन को कम किया जा सकता है।

  • घर के कमरों में वेंटिलेशन का ध्यान रखें।
  • घर की खिड़कियां खोलकर बाहर की हवा अंदर आने दें।
  • दीवारों पर दिखाई देने वाली सीलन और मोल्ड को ठीक कराएं।
  • गीले कपड़े कमरे के अंदर लंबे समय तक न सुखाएं।
  • बाथरूम इस्तेमाल करने के बाद उसे सूखा रखने की कोशिश करें।
  • गीले जूते और छाते को घर के अंदर खुला न रखें।
  • बेडशीट, पर्दे और कालीनों को रेगुलर साफ करें।
  • अगर घर में बहुत ज्यादा नमी रहती है तो जरूरत के अनुसार डीह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है।

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निष्कर्ष
Dr. Vineeta Singh Tandon सलाह देती हैं कि अगर घर में सीलन होने पर लगातार खांसी, सांस फूलना, घरघराहट, नाक बंद होना या आंखों में जलन जैसी शिकायत हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। अस्थमा वाले व्यक्ति को अगर सांस लेने में अचानक ज्यादा परेशानी हो, सीने में गंभीर जकड़न हो या इनहेलर के बावजूद राहत न मिले, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। मानसून में दीवारों की सीलन को नजरअंदाज न करें, बल्कि इसका ठीक कराना ही सेहत के लिए बेहतर रहता है।

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FAQ

  • घर में सीलन और फंगस की पहचान कैसे करें?

    दीवारों पर काले, हरे या सफेद धब्बे दिखना, पेंट का पपड़ी बनकर निकलना, कमरों से सीलन की अजीब बदबू आना और कपड़े या गद्दे छूने पर सीले हुए महसूस होना इसके स्पष्ट संकेत हैं।
  • क्या कमरे में एसी चलाने से सीलन और नमी कम होती है?

    एसी कमरे की हवा से नमी सोखकर ड्राई मोड में ह्यूमिडिटी घटाता है। हालांकि, अगर एसी के फिल्टर्स गंदे हैं या ड्रेन पाइप में लीकेज है, तो यह फंगस को पूरे कमरे में फैला भी सकता है।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 02, 2026 17:03 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Sep 02, 2026 17:03 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Vineeta Singh Tandon

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