मानसून का सीजन शुरू होते ही कुछ लोगों को साइनस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस मौसम में खासतौर पर जिन लोगों को पहले से एलर्जी, बार-बार जुकाम या साइनस की दिक्कत रहती है, उनके लिए मानसून चुनौती भरा साबित हो सकता है। इस दौरान नाक बंद रहना, चेहरे में भारीपन, सिरदर्द और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं काफी आम हो जाती हैं।
इस बारे में जानने के लिए हमने Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj, ENT Expert, MedFirst ENT Centre, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि मानसून में नमी बढ़ने के कारण फंगस, धूल, डस्ट माइट्स और एलर्जी पैदा करने वाली चीजें तेजी से बढ़ने लगते हैं। इस वजह से मानसून में साइनस से जुड़ी शिकायतें पहले की तुलना में ज्यादा देखने को मिलती हैं।
मानसून में साइनस का रिस्क क्यों बढ़ जाता है?
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj कहते हैं, “आमतौर पर लोग इसे नाक से जुड़ी बीमारी समझते हैं, लेकिन यह चेहरे की हड्डियों के अंदर मौजूद हवा से भरी छोटी-छोटी कैविटी होती हैं। यह कैविटी एक पतली परत से ढकी रहती हैं, जो लगातार बलगम बनाती है। आमतौर पर तो बलगम नाक के रास्ते बाहर निकल जाता है, लेकिन एलर्जी या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण कैविटी की अंदरूनी परत में सूजन आ जाती है। सूजन बढ़ने से बलगम का रास्ता बंद हो जाता है।”
हवा में नमी होना
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj ने कहा, “मानसून के सीजन में हवा में नमी बढ़ने लगती हैं और नमी बढ़ने से घरों की दीवारों, बाथरूम, एयर कंडीशनर और बंद कमरों में फफूंद तेजी से पनपती है। इसमें फंगस के कणों के साथ शरीर में पहुंचकर एलर्जी और नाक की सूजन को बढ़ा सकते हैं।”
एलर्जी पैदा करने वाले जीव
बारिश के मौसम में डस्ट माइट्स भी तेजी से बढ़ने लगते हैं। इस वजह से बिस्तर, तकिए और गद्दे में छोटे-छोटे जीव पनपने लगते हैं। इस वजह से लोगों को नाक बंद होने, छींके आने और साइनस की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है।
वायरल संक्रमण होना
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj ने बताया कि बारिश के मौसम में वायरल संक्रमण भी तेजी से फैलने लगता है। इस वजह से बार-बार जुकाम होने की समस्या हो सकती है। यह परेशानी नाक की अंदरूनी परत में सूजन पैदा कर देती है। जब यह सूजन लंबे समय तक बनी रहती है, तो साइनस का ड्रेनेज प्रभावित होने लगता है और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
गीले कपड़ों में रहना
जो लोग बारिश में भीग जाते हैं, लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहते हैं या फिर गंदे पानी के संपर्क में आने से सर्दी-जुकाम बढ़ सकता है। इसके बाद ही कई लोगों में साइनसाइटिस विकसित हो जाता है।

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किन लोगों को सावधान रहना चाहिए?
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj ने कहा, “हालांकि, मानसून में साइनस की समस्या किसी को भी हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों को इसका रिस्क ज्यादा रहता है। इसमें एलर्जिक राइनाइटिस के मरीज, अस्थमा से पीड़ित लोग, धूल या फंगस से एलर्जी वाले व्यक्ति, कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग, स्मोकिंग करने वाले, बार-बार सर्दी-जुकाम से परेशान रहने वाले लोग और पहले से क्रोनिक साइनसाइटिस के मरीज शामिल हैं। अगर ये लोग सावधानी न बरतें, तो मानसून में परेशानी बार-बार हो सकती है।”
क्या कहती है रिसर्च?
International Journal of Biometeorology के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया राइनोलॉजी क्लिनिक ने साल 2010 से लेकर 2020 तक के साइनस पीड़ित मरीजों का आकलन किया। इसमें पाया गया कि बदलते मौसम वाले दिनों में गंभीर साइनस होने का स्कोर ज्यादा था। रिसर्चर्स का मानना है कि साइनस का इलाज करते समय मौसम के प्रभाव को ध्यान में रखना चाहिए।
साइनस के मरीजों को कौन-से चेकअप कराने चाहिए?
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj कहते हैं, “अगर सर्दी-जुकाम ठीक होने के बाद भी नाक या चेहरे में दर्द बना रहे और साइनस की समस्या बार-बार परेशान करे, तो सबसे पहले समस्या का कारण पता लगाने की कोशिश की जाती है। ऐसी कंडीशन में शुरुआत में मरीज के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और नाक की सामान्य जांच की जाती है। इसके अलावा, मरीज की कंडीशन देखते हुए ये चेकअप भी किए जा सकते हैं।
- नेजल एंडोस्कोपी - इसमें एक पतली कैमरे वाली ट्यूब के जरिए नाक और साइनस के अंदर की स्थिति देखी जाती है। इससे सूजन, पस, नाक में पॉलिप, टेढ़ी नाक की हड्डी या किसी अन्य रुकावट का पता लगाया जा सकता है।
- सीटी स्कैन ऑफ पैरानेजल साइनस (CT PNS) - अगर मरीज को सर्जरी करानी पड़ती है, तो नाक के अंदर मौजूद सूजन, ब्लॉकेज और संक्रमण की गंभीरता स्पष्ट रूप से देखने के लिए सीटी स्कैन ऑफ पैरानैजल साइनस (CT PNS) कराने की सलाह दे सकते हैं।
- एलर्जी टेस्ट - जिन लोगों को एलर्जी की समस्या रहती है, उन्हे एलर्जी टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है। इससे पता चलता है कि धूल, फफूंद, परागकण और डस्ट माइट्स के कारण बार-बार साइनस की समस्या तो नहीं हो रही।
मानसून में साइनस से बचने के तरीके
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj ने कहा कि मानसून के दौरान छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर साइनस की परेशानी से बचा जा सकता है।
- घर में नमी और फफूंद जमा न होने दें।
- कमरों में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें।
- धूल, धुएं और एलर्जी पैदा करने वाली चीजों से दूर रहें।
- बारिश में भीगने के बाद तुरंत ही सूखे कपड़े पहनें।
- बारिश में पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से बलगम पतला हो सकता है।
- डॉक्टर की सलाह पर नाक को आराम देने के लिए सलाइन नेजल इरिगेशन का इस्तेमाल कर सकते हैं।
- अगर बार-बार सर्दी-जुकाम हो, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
- बिना डॉक्टर की सलाह लिए लंबे समय तक नेजल स्प्रे या एंटीबायोटिक का इस्तेमाल न करें।
- डॉक्टर की दी दवाओं को समय पर लें।
निष्कर्ष
मानसून में साइनस से जूझ रहे लोगों को नाक बंद होने या चेहरे में दर्द होने पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए। इसके अलावा, अगर तेज बुखार के साथ आंखों और चेहरे पर सूजन महसूस हो, तो इसे सिर्फ सर्दी-जुकाम नहीं समझना चाहिए और न ही घरेलू नुस्खे आजमाने चाहिए। अगर नाक बंद से जुड़े लक्षण 10 दिन से ज्यादा रहते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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FAQ
क्या हर साइनस इंफेक्शन में एंटीबायोटिक लेना जरूरी है?
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj कहते हैं कि साइनस की समस्या वायरल इंफेक्शन की वजह से होती है। इसलिए एंटीबायोटिक बिल्कुल भी असर नहीं करती। नाक बंद होने के साथ तेज बुखार या नाक से गाढ़ा पीला या हरा स्त्राव हो, तो डॉक्टर को दिखाएं। बिना डॉक्टर की सलाह लिए किसी भी दवा को लेना नुकसानदायक हो सकता है।क्या मानसून में लगातार AC में रहने से साइनस बढ़ सकता है?
AC की ठंडी और सूखी हवा नाक के अंदरूनी म्यूकस को सुखा देती है, जिससे साइनस नलियों में रुकावट आने लगती है। इसके अलावा लंबे समय से साफ न किए गए AC फिल्टर में जमे डस्ट माइट्स और फफूंद हवा के साथ फैलकर साइनस अटैक को ट्रिगर करते हैं।क्या साइनस के मरीज मानसून में ठंडे पानी से नहा सकते हैं?
साइनस के मरीजों को ठंडे पानी से नहाने से बचना चाहिए। मानसून में सिर पर बहुत ठंडा पानी डालने से स्कैल्प और नाक की नसों में अचानक तापमान का बदलाव होता है, जिससे नाक बंद हो सकती है। हमेशा गुनगुने या सामान्य तापमान के पानी से ही नहाएं।
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Aug 04, 2026 18:38 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Major Rajesh Bhardwaj