Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vineeta Singh Tandon , Sr. Consultant – Internal Medicine

बारिश शुरू होते ही बार-बार होने लगती है दस्त और पेट की परेशानी? डॉक्टर से जानें 7 कारण

बारिश के मौसम में लोगों को दस्त और पेट की परेशानी होना आम है। इस वजह से कई लोगों को बहुत दिक्कत हो जाती है। इसलिए सबसे जरूरी है कि मानसून में दस्त होने के कारणों को जाना जाए। इस लेख में डॉक्टर ने कारणों को विस्तार से समझाया है।

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मानसून आते ही कुछ लोगों को पेट से जुड़ी परेशानियां भी बढ़ने लगती हैं। कई लोगों को बारिश के मौसम में अचानक दस्त, पेट दर्द, गैस, उल्टी या जी मिचलाने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। खासतौर पर जो लोग बहुत ज्यादा बाहर का खाना खाते है या पानी पीते हैं, उन्हें पेट खराब होने की शिकायत ज्यादा देखने को मिलती है। इस बारे में हमने Dr. Vineeta Singh Tandon, Senior Consultant, Internal Medicine, ISIC Hospital, Delhi से बात की।

मानसून में दस्त लगने के 7 कारण

Dr. Vineeta Singh Tandon कहती हैं, “मानसून के दौरान दस्त या डायरिया से जुड़ी बीमारियां होने का रिस्क बहुत ज्यादा होता है। बारिश के दिनों में हवा का तापमान, पानी का तापमान, बारिश का पैटर्न, मौसमी बदलाव और बहुत ज्यादा बारिश जैसी कंडीशन इन बीमारियों के फैलने का कारण बन सकती है।”

1. दूषित पानी

Dr. Vineeta Singh Tandon ने कहा, “मानसून में तेज बारिश, जलभराव और सीवेज की समस्या के कारण पीने के पानी के दूषित होने का खतरा बढ़ सकता है। अगर सीवेज किसी तरह पानी की पाइपलाइन या खुले जलस्रोत तक पहुंच जाए, तो उसमें बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया और वायरस मौजूद हो सकते हैं। ऐसा पानी सिर्फ पीने से ही नहीं, बल्कि खाना बनाने, बर्तन धोने या दांत साफ करने में इस्तेमाल करने से भी संक्रमण का खतरा पैदा कर सकता है। इस वजह से मानसून में बीमारियां बढ़ने का खतराहता है। इसलिए बारिश के दिनों में साफ और सुरक्षित पानी पीना बेहद जरूरी है। जहां पानी की क्वालिटी ठीक न लगे, तो वहां फिल्टर किए हुए या उबले पानी का इस्तेमाल करना चाहिए।”

2. बारिश में खाना जल्दी खराब होना

Dr. Vineeta Singh Tandon ने बताया कि मानसून के दौरान नमी ज्यादा रहने से भोजन को सही तरीके से स्टोर करना बहुत जरूरी हो जाता है। पका हुआ खाना लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखा रहे, तो कई तरह के बैक्टीरिया पनप सकते हैं। इसमें चावल, दाल, सब्जियां, ग्रेवी और डेयरी से बनी चीजें खासतौर पर शामिल हैं। खाना बनाने के बाद उसे ढककर रखें और जरूरत से ज्यादा देर तक बाहर न रखें।

3. स्ट्रीट फूड और खुले में बिकने वाला खाना

Dr. Vineeta Singh Tandon का कहना है, “मानसून में बाहर के गोलगप्पे, चाट, समोसे, कटे हुए फल, पकौडे और जूस जैसी खाने की चीजों से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसी जगहों पर पानी, बर्फ या खाना बनाने के तरीके सही न होने पर पेट से जुड़ी समस्याएं होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। बारिश के दिनों में खासतौर पर ऐसी चीजों को खाने में सावधानी बरतनी चाहिए, जो बहुत समय से खुले में रखी हुई है।”

4. कटे हुए फल खाना

Dr. Vineeta Singh Tandon कहती हैं, “अक्सर मैं देखती हूं कि लोगों को पेट की समस्या बाहर से कटे हुए फल खाने से होती है। लोग हमेशा कहते हैं कि उन्होंने बाहर का पानी नहीं पिया, बल्कि सेहतमंद फल ही खाए हैं। माना कि फल स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है, लेकिन सड़क के किनारे कई घंटों पहले कटे फलों पर धूल, गंदा पानी और मक्खियों के जरिए बैक्टीरिया फैल सकते हैं। इसके अलावा, अगर इन्हें काटने के लिए इस्तेमाल होने वाला चाकू, बोर्ड या पानी साफ नहीं है, तो इंफेक्शन का खतरा और बढ़ सकता है। इसलिए घर पर ही अच्छी तरह धोकर फल काटकर खाना चाहिए।”

5. हाथों की सफाई सही तरीके से न करना

Dr. Vineeta Singh Tandon के अनुसार, दस्त या पेट से जुड़ी परेशानी का सबसे बड़ा कारण हाथों की साफ-सफाई न रखना है। कई लोग टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद या खाना खाने से पहले हाथ नहीं धोते। इस वजह से हाथों में मौजूद कीटाणु पेट में पहुंच जाते हैं। जो बच्चे बार-बार मुंह में हाथ डालते हैं, उन्हें इस समस्या के होने का रिस्क बहुत ज्यादा होता है। इसलिए बच्चों को या फिर बड़ों को भी हाथ धोने में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। न धोने पर हाथों पर मौजूद रोगाणु भोजन के साथ शरीर में पहुंच सकते हैं।”

loose motion during monsoon

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6. कच्ची सब्जियों और पत्तेदार साग की सफाई ठीक से न करना

Dr. Vineeta Singh Tandon ने बताया कि मानसून में पत्तेदार सब्जियों से परहेज करना चाहिए, क्योंकि बारिश में पत्तेदार सब्जियों पर गंदगी और बैक्टीरिया मौजूद होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है। ऐसे में कच्ची सब्जी को खाने से पहले उसे बहुत अच्छी तरह से साफ पानी से धोना जरूरी है। खासतौर पर जो सलाद में कच्ची सब्जियां इस्तेमाल होती हैं, उनकी सफाई पर तो खास ध्यान देना चाहिए।

7. पहले से मौजूद पेट की समस्या

Dr. Vineeta Singh Tandon का कहना है, “कुछ लोगों को बारिश की वजह से दस्त की समस्या हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों को इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS), खाने से एलर्जी या डाइजेशन से जुड़ी अन्य समस्याओं को कारण भी दस्त हो सकते हैं। अगर किसी को पहले से पेट की समस्या है और मानसून में उसका खाना-पीना, नींद का रुटीन बदल जाता है, तो लक्षण बढ़ सकते हैं। अगर समस्या बार-बार हो रही हो, तो इसके कारणों को जानना बहुत जरूरी है।”

क्या कहती है रिसर्च?

Environmental Health Perspectives में प्रकाशित एक सिस्टेमेटिक रिव्यू में 111 अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। रिसर्चर्स ने पाया कि जब बारिश गर्मी के बाद होती है, तो दस्त या डायरिया होने का रिस्क बढ़ता है। इसका कारण यह हो सकता है कि तेज बारिश जमीन या आसपास मौजूद बैक्टीरिया या वायरस को जलस्रोतों तक पहुंचा सकती है। हालांकि, बारिश और दस्त के बीच संबंध हर जगह एक जैसा नहीं होता और पानी, साफ-सफाई और इंफेक्शन होने का कंडीशन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

दस्त होने पर कौन-से लक्षण नजर आ सकते हैं?

Dr. Vineeta Singh Tandon ने कहा कि लोगों को दस्त के इन लक्षणों को बिल्कुल इग्नोर नहीं करना चाहिए।

  • दस्त के साथ पेट में ऐंठन या मरोड़ उठना
  • जी मिचलाना या उल्टी होना
  • बुखार होना
  • कमजोरी महसूस होना
  • डिहाइड्रेशन के कारण शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी
  • बहुत ज्यादा प्यास लगना
  • चक्कर आना
  • पेशाब कम होना

डॉक्टर की सलाह

Dr. Vineeta Singh Tandon लोगों को सलाह देती हैं कि दस्त होने पर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए, तो इसकी गंभीरता से बचा जा सकता है।

  • पर्याप्त मात्रा में फ्लूड और ORS लेना चाहिए।
  • हल्का और आसानी से पचने वाला खाना खाएं।
  • तला-भुना या मसालेदार भोजन न खाएं।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक न लें।

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निष्कर्ष
मानसून में दस्त होने का कारण दूषित पानी, खाना और स्ट्रीट फूड हो सकता है। मानसून में साफ-सफाई में लापरवाही बरतने से भी दस्त या पेट की समस्याएं हो सकती हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को मानसून में खास ध्यान रखना चाहिए और दस्त के लक्षणों को नजरअंदाज न करें। अगर समस्या लगातार बनी हुई है, तो डॉक्टर की सलाह लेकर ही दवा लें।

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FAQ

  • क्या बारिश में दही खाने से दस्त या पेट का इंफेक्शन बढ़ता है?

    ताजा दही में मौजूद गुड बैक्टीरिया आंतों की इम्युनिटी को मजबूत करते हैं और बुरे बैक्टीरिया से लड़ते हैं। बस ध्यान रखें कि दही ताजा और रूम टेम्परेचर पर हो, बासी या बहुत ज्यादा खट्टा न हो।
  • क्या गीले हाथों से खाना खाने या बर्तन पूरी तरह न सूखने से भी पेट का इंफेक्शन हो सकता है?

    नमी के कारण गीले बर्तनों और हाथों पर फंगस और बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं। बर्तन धोने के बाद उन्हें सूखे कपड़े से पोंछकर धूप या हवा में सुखाएं और खाना खाने से पहले हाथ हमेशा साबुन से धोएं।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 04, 2026 12:43 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Vineeta Singh Tandon

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