Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr. Aravinda S N , Lead Consultant – Internal Medicine

मानसून के दौरान लोग ज्यादा बीमार क्यों पड़ते हैं? जानें डॉक्टर से

मानसून में नमी, मौसम में बदलाव और जलभराव के कारण बैक्टीरिया, वायरस और मच्छर तेजी से पनपते हैं, जिससे मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इस दौरान इनसे बचने के लिए कुछ आसान उपायों को अपनाया जा सकता है। 

गर्मियों के बाद मानसून को लोग बहुत पसंद करते हैं, लेकिन इसके साथ कई तरह की मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। वातावरण में नमी, मौसम में बार-बार बदलाव आने और जगह-जगह पानी के जमा होने के कारण लोगों को बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और मच्छर तेजी से पनपते हैं। इनके कारण मानसून के दौरान इंफेशन और मौसमी बीमारियों के मामले बढ़ जाते है। ऐसे में आइए इस बारे में विस्तार से Dr. Aravinda S N, Lead Consultant - Internal Medicine, Aster RV Hospital, Bengaluru से जानें।

मानसून में बीमार होने का खतरा क्यों बढ़ जाता है?

डॉ. अरविंद के अनुसार, बारिश के मौसम में हवा में नमी ज्यादा होती है, जिससे कई तरह की बीमारियों को फैलाने वाले माइक्रोऑर्गेनिज्म (microorganisms) तेजी से बढ़ने और फैलने लगते हैं। इसके अलावा, जगह-जगह जमा बारिश का पानी मच्छरों के पनपने की जगह बन जाता है, जिसके कारण मच्छर डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियां फैलाती हैं। इसलिए घर और आसपास पानी जमा होने से रोकना बहुत जरूरी है।

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मानसून में किन समस्याओं का खतरा बढ़ता है?

डॉ. अरविंद का कहना है, मानसून के दौरान बैक्टीरिया के पनपने या दूषित खान-पान के कारण कई तरह की स्वास्थ्य से समस्याओं का खतरा बढ़ता है।

साल 2025 में Clinical Infection in Practice में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, मानसून के आने से मच्छरों के पनपने की जगहें और बैक्टीरिया-वायरस का माहौल बदल जाता है, जिससे कई तरह की इंफेक्शियस बीमारियां (infectious diseases) तेजी से फैलती हैं। मानसून के मौसम में हैजा (cholera), डेंगू, मलेरिया, लेप्टोस्पायरोसिस और हेपेटाइटिस ई जैसी बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा होता है, खासकर उन जगहों पर जहां साफ-सफाई और बेसिरक सुविधाओं की कमी है। अब क्लाइमेट चेंज के कारण मानसून का चक्र बिगड़ रहा है, जिससे इन बीमारियों का खतरा और भी ज्यादा बढ़ गया है।

दूषित पानी या खाने से बढ़ती है परेशानी

डॉ. अरविंद का कहना है, भारी बारिश से ड्रेनेज सिस्टम पर दबाव पड़ सकता है और पीने का पानी सीवेज और हानिकारक माइक्रोब्स से पीने का पानी दूषित हो सकता है। अगर दूषित पानी पिएं या ठीक से न धोए गए फल और सब्जियां खाने से टाइफाइड, हैजा, हेपेटाइटिस ए और एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस जैसी पानी से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, नमी वाले मौसम में खाना भी जल्दी खराब होता है, जिससे अगर साफ-सफाई और सही तरीके से खाना स्टोर न किया जाए, तो फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ सकता है।

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बढ़ सकती हैं सांस से जुड़ी बीमारियां

मानसून में सांस से जुड़े इंफेक्शन भी बढ़ सकते हैं। इस दौरान तापमान में अचानक बदलाव, घरों में नमी और पर्याप्त वेंटिलेशन की कमी के कारण सर्दी-जुकाम, फ्लू इन्फ्लूएंजा और कोविड-19 जैसे वायरल इंफेक्शन तेजी से फैल सकते हैं। जिन लोगों को अस्थमा, एलर्जी या पहले से लंग्स से जुड़ी बीमारी है, उनकी परेशानी भी बढ़ सकती है, क्योंकि नमी वाले वातावरण में फफूंद, फंगस और धूल के कण तेजी से बढ़ते हैं, जो एलर्जी और सांस से जुड़ी समस्याओं को बढ़ावा दे सकते हैं।

स्किन और फंगल इंफेक्शन का खतरा

बारिश के मौसम में लंबे समय तक गीले कपड़े, नमी वाले जूते-चप्पल पहनने और ज्यादा पसीना आने से स्किन पर फंगल इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। इनके कारण एथलीट फुट, दाद और त्वचा पर रैशेज जैसी समस्याएं इस मौसम में आम होती हैं। ऐसे में इन समस्याओं से बचने के लिए स्किन को साफ रखने, पर्सनल हाइजीन का ध्यान रखने और स्किन के ड्राई रखना जरूरी होता है।

क्या मानसून में इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है?

डॉ. अरविंद बताते हैं, बारिश का मौसम सीधे तौर पर इम्यूनिटी को कमजोर नहीं करता है, लेकिन मानसून के दौरान रोज की कुछ आदतों में बदलाव बीमारी के खतरे को इनडायरेक्टली (Indirectly) बढ़ा सकते हैं। जैसे - धूप कम मिलना, नींद पूरी न होना, खान-पान की खराब आदतें और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर ज्यादा समय बिताने से इंफेक्शन आसानी से फैल सकते हैं।

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मानसून में हेल्दी रहने के लिए उपाय

डॉ. अरविंद के अनुसार, बारिश के मौसम में कुछ छोटी-छोटी सावधानियां को अपनाकर कई बीमारियों से आसानी से बचा जा सकता है। जैसे -

  • हमेशा उबला या साफ पानी पिएं
  • ताजा और अच्छी तरह पका हुआ खाना खाएं
  • नियमित रूप से हाथ धोएं
  • घर के आसपास पानी जमा न होने दें
  • मच्छरों से बचाव के लिए रिपेलेंट का इस्तेमाल करें
  • पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें
  • घर को साफ, सूखा और हवादार रखें

इन आदतों को अपनाने से इंफेक्शन का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

डॉक्टर से सलाह कब लें?

डॉ. अरविंद के अनुसार, अगर बुखार 2 दिन से ज्यादा रहे, बार-बार उल्टी हो, शरीर में पानी की कमी महसूस हो, सांस लेने में परेशानी हो, लगातार उल्टी हो या असामान्य ब्लीडिंग जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि समय से इलाज मिलने से किसी भी गंभीर समस्या से समय रहते जा सकता है।

निष्कर्ष

मानसून में बैक्टीरिया और मच्छरों के पनपने या दूषित खान-पान के कारण लोग इस मौसम में जल्दी बीमार पड़ते हैं। इस मौसम में अक्सर फूड पॉइजनिंग, सांस से जुड़ी बीमारियों, स्किन इंफेक्शन और फंगल इंफेक्शन जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में इन समस्याओं से बचने और मानसून में हेल्दी रहने के लिए उबला हुआ साफ पानी पिएं, ताजा पका खाना खाएं, हाथ धोएं, घर को साफ रखें और घर के पास पानी जमा न होने दें। ध्यान रहे, इस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी परेशानी महसूस होती है, खासकर बुखार और उल्टी तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

All Images Credit- Freepik

FAQ

  • बारिश में सबसे ज्यादा क्या खाना चाहिए?

    बारिश के मौसम में आसानी से पचने वाला खाना खाना चाहिए। इसके लिए डाइट में हर्बल टी, काढ़ा, विटामिन सी से भरपूर फल, मौसमी सब्जियों, दलिया और खिचड़ी जैसे फलों को शामिल किया जा सकता है।
  • बारिश के मौसम में कौन-कौन सी बीमारी होती है?

    बारिश के मौसम में व्यक्ति को डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, टाइफाइड, पीलिया, हैजा, डायरिया, फ्लू और सर्दी-जुकाम जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Priyanka Sharma

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Sub Editor

प्रियंका शर्मा हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की है। फिलहाल प्रियंका जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में बतौर सब एडिटर काम कर रही हैं। प्रियंका को स्वास्थ्य, पोषण, स्किन केयर और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म की है। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 17, 2026 15:44 IST

    Modified By : Priyanka Sharma
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