Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Rajeev Chowdry , General Physician & Internal Medicine Specialist, Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad | 23 Years of Clinical Experience

मॉनसून अलर्ट: बार‍िश में मच्छरों से फैलने वाले डेंगू, मलेर‍िया, च‍िकनगुन‍िया से कैसे बचें? डॉक्‍टर से जानें

द‍िल्‍ली एनसीआर समेत कई शहरों में मॉनसून दस्‍तक दे चुका है। बार‍िश के मौसम में डेंगू, मलेर‍िया और च‍िकनगुन‍िया का प्रकोप बढ़ जाता है क्‍योंक‍ि ये मौसम मच्‍छरों के प्रजनन का समय होता है। जानें मॉनसून में कैसे करें अपना बचाव?

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मॉनसून में घर और आसपास के क्षेत्रों में पानी भर जाता है और गंदगी रहती है ज‍िसके कारण डेंगू, मलेर‍िया और च‍िकनगुन‍िया जैसी मच्‍छर जन‍ित बीमार‍ियों का प्रकोप बढ़ जाता है। मॉनसून में नमी बढ़ने से मच्‍छरों की संख्‍या तेजी से डबल होती है ज‍िससे व्‍यक्‍त‍ि बीमारी की चपेट में आ सकता है। डेंगू, मलेर‍िया, च‍िकनगुन‍िया के प्रकोप से व्‍यक्‍त‍ि को तेज बुखार, स‍िर दर्द, जोड़ों में दर्द, थकान, कमजोरी, ठंड लगना (मलेर‍िया में), भूख कम लगना, मतली या उल्‍टी जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं और गंभीर मामलों में व्‍यक्‍त‍ि की मौत भी हो सकती है। जानें इन बीमार‍ियों से बचने के ल‍िए क्‍या करना चाह‍िए? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Rajeev Chowdry, Internal Medicine Specialist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

1. डेंगू है जानलेवा बीमारी

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डेंगू (Dengue) एडीस एजिप्टी नामक प्रजात‍ि के मच्‍छरों से फैलने वाली बीमारी है। डेंगू के कारण हर साल कई गंभीर मामलों में लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। जब डेंगू से पीड़ि‍त व्‍यक्‍त‍ि को मच्‍छर काटता है और फ‍िर वही मच्‍छर क‍िसी स्‍वस्‍थ व्‍यक्‍त‍ि को काटता है, तो पीड़ि‍त व्‍यक्‍त‍ि से स्‍वस्‍थ व्‍यक्‍त‍ि में बीमारी ट्रांसफर हो जाती है इसल‍िए इसे मच्‍छरों से फैलने गंभीर बीमारी माना जाता है ज‍िससे बचाव जरूरी है।

बचाव: एडीज मच्छर के प्रजनन स्थल खत्म करें

मॉनसून में साफ-सफाई करना थोड़ा मुश्‍क‍िल होता है, लेक‍िन लापरवाही बरतने पर बीमार‍ियां दस्‍तक दे सकती हैं। डेंगू फैलाने वाले एड‍ीज मच्‍छर साफ और रुके पानी में अंडे देते हैं, इसल‍िए कहीं आसपास पानी न जमा होने दें और पानी खाली करने के साथ-साथ बर्तन, टंकी, गमले, कूलर वगैरह की सफाई पर भी गौर करें।

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2. ऑक्‍सीजन सप्‍लाई को प्रभाव‍ित कर सकता है मलेर‍िया

परजीवी यानी पैरासाइट के कारण मलेर‍िया फैलता है। मलेरिया मुख्य रूप से संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है। मलेर‍िया में पीड़ि‍त व्‍यक्‍ति‍ को ठंड लगने के साथ तेज बुखार आता है और गंभीर मामलों में व्‍यक्‍त‍ि कोमा में भी जा सकता है या उसकी मौत भी हो सकती है। मलेर‍िया इसल‍िए एक गंभीर बीमारी है क्‍योंक‍ि यह शरीर के रेड ब्‍लड सेल्‍स को प्रभाव‍ित करके शरीर में अंगों तक ऑक्‍सीजन की सप्‍लाई में रुकावट डाल सकता है ज‍िससे सांस लेने में कठ‍िनाई हो सकती है इसल‍िए जरूरी है क‍ि इससे समय रहते बचाव क‍िया जाए।

बचाव: बुखार को सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज न करें

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं। तेज बुखार, शरीर दर्द, कमजोरी, सिरदर्द या ठंड लगने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करने से बीमारी गंभीर हो सकती है। बुखार लंबे समय तक बना रहे या लक्षण बढ़े, तो समय पर डॉक्टर से जांच करवाएं।

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3. च‍िकनगुन‍िया से सूजन हो सकती है

चि‍कनगुन‍िया एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस प्रजात‍ि के मच्‍छर के काटने से फैलता है। यह एक तरह का वायरल इंफेक्‍शन है। लंबे समय तक यह बीमारी हार्ट, द‍िमाग और शरीर के अन्‍य अंगों में सूजन का कारण बन सकती है। खासतौर पर बुजुर्गों, बच्‍चों और गर्भवती मह‍िलाओं को यह बीमारी गंभीर रूप से प्रभाव‍ित कर सकती है क्‍योंक‍ि उनकी इम्‍यून‍िटी कमजोर होती है। इसल‍िए समय रहते बचाव करना चाह‍िए।

च‍िकनगुन‍िया के खतरे क्‍या हैं?

Mayo Clinic के मुताब‍िक, च‍िकनगुन‍िया के कारण जोड़ों में सूजन आ सकती है और यह क्रोन‍िक च‍िकनगुन‍िया अर्थराइट‍िस में भी बदल सकता है। हालांक‍ि, च‍िकनगुन‍िया से मौत के केस कम हैं, लेक‍िन यह हाई बीपी, डायब‍िटीज जैसी बीमार‍ियों के मरीजों को ज्‍यादा प्रभाव‍ित कर सकता है। इससे आंखों, हार्ट और नसों की समस्‍या हो सकती है।

बचाव: सुबह और शाम के समय ज्‍यादा सावधानी बरतें

डेंगू और च‍िकनगुन‍िया के ल‍ि‍ए ज‍िम्‍मेदार एडीज मच्‍छर सुबह और शाम को ज्‍यादा एक्‍ट‍िव रहते हैं। इस दौरान फुल स्‍लीव के कपड़े पहनें और खिड़की-दरवाजों पर जाली लगाए। साथ ही मच्छरदानी, क्रीम, रिपेलेंट स्‍प्रे का इस्‍तेमाल करें। इससे मच्‍छरों के प्रवेश को कम कर सकते हैं।

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डेंगू, मलेर‍िया और च‍िकनगुन‍िया से बचाव के ल‍िए वैक्‍सीन उपलब्‍ध है?

भारत के वैक्‍सीन प्रोग्राम में फ‍िलहाल इन तीनों बीमार‍ियों के ख‍िलाफ कोई वैक्‍सीन मौजूद नहीं है। हालांक‍ि, तीनों बीमार‍ियों के ख‍िलाफ बचाव के ल‍िए वैक्सीन पर शोध जारी हैं। भारत में डेंगू से सुरक्षा के ल‍िए क्यूडेंगा (Qdenga) नामक वैक्‍सीन को मंजूरी म‍िली है। हालांक‍ि अभी यह वैक्‍सीन आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है। वहीं, भारत ने मलेरिया की पहली स्वदेशी वैक्सीन एडफाल्सीवैक्स (AdFalciVax) भी व‍िकस‍ित कर ली है, लेक‍िन यह वैक्‍सीन भी फ‍िलहाल ट्रायल फेज में है।

न‍िष्‍कर्ष:

डेंगू, मलेर‍िया और च‍िकनगुन‍िया तीनों ही गंभीर मच्‍छर जन‍ित रोग है और जरा ली लापरवाही भी जान को खतरे में डाल सकती है इसल‍िए मॉनसून के द‍िनों में ज्‍यादा एलर्ट रहें। क‍िसी भी लक्षण को सामान्‍य समझकर नजरअंदाज न करें खासकर बुखार जैसे कॉमन लक्षण को गंभीरता से लें और कारण का पता लगाएं। सुबह और शाम के वक्‍त इंफेक्‍शन फैलाने वाले मच्‍छर ज्‍यादा एक्‍ट‍िव रहते हैं इसल‍िए इस दौरान फुल स्‍लीव वाले कपड़े पहनें और मच्छरदानी, क्रीम, रिपेलेंट स्‍प्रे का इस्‍तेमाल करें।
साथ ही मच्‍छर जल भराव वाली जगहों को अपना प्रजनन स्थल बना लेते हैं इसल‍िए अपने आसपास या खाली जगहों पर पानी न भरने दें। इसके साथ ही फ‍िलहाल बचाव के ल‍िए भारत में डेंगू, मलेर‍िया या च‍िकनगुन‍िया का कोई टीका मौजूद नहीं है, हालांक‍ि कुछ वैक्‍सीन को मंजूरी म‍िली है, लेक‍िन फ‍िलहाल कोई वैक्‍सीन टीकाकारण कार्यक्रम का ह‍िस्‍सा नहीं है।

FAQ

  • क्‍या डेंगू के साइड इफेक्‍ट्स लंबे समय तक रहते हैं?

    डेंगू बुखार से पीड़ि‍त लोग आमतौर पर एक से दो हफ्तों में ठीक हो जाते हैं। हालांक‍ि, कुछ हफ्तों बाद भी थकान और कमजोरी बनी रह सकती है और धीरे-धीरे ठीक हो जाती है।
  • क्या मलेरिया दोबारा हो सकता है?

    हां, कुछ प्रकार के मलेरिया में दोबारा इंफेक्‍शन होने का खतरा रहता है इसलिए इलाज के बाद भी मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाना जरूरी है।
  • डेंगू और मलेरि‍या में क्‍या अंतर है?

    दोनों मच्छर से फैलने वाली बीमारियां हैं, लेकिन डेंगू एडीज जबक‍ि मलेर‍िया एनोफिलीज मच्‍छर के कारण फैलता है। दोनों के लक्षण एक जैसे लग सकते हैं इसलिए सही पहचान के लिए जांच जरूरी है।

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Disclaimer

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 13, 2026 16:26 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Rajeev Chowdry

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